जोधपुर के भोपालगढ़ में बंद पड़ी खदान में हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि अवैध तरीके से काम चल रहा था और जेसीबी की वजह से मलबा गिरा। अब पुलिस जांच कर रही है और खनन विभाग पर निगरानी व कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां बंद पड़ी पत्थर की खदान में दबने से एक युवक की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जेसीबी मशीन की टक्कर के बाद खदान में बड़ा पत्थर और मलबा नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में आने से युवक की मौके पर ही जान चली गई।
यह घटना बोरूंदा थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस खदान में हादसा हुआ, वह पहले से ही बंद घोषित थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बंद खदान में जेसीबी मशीन कैसे पहुंची और वहां काम किसके इशारे पर चल रहा था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मर्ग दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही खदान से जुड़े दस्तावेज और तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में कई बंद खदानों में चोरी-छिपे या अवैध तरीके से पत्थर निकालने का काम चलता रहता है। उनका आरोप है कि ऐसे कामों में सुरक्षा मानकों की खुलकर अनदेखी होती है। मजदूरों के पास न हेलमेट होते हैं, न सुरक्षा उपकरण और न ही कोई निगरानी।
यह हादसा भी इसी तरह की लापरवाही की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। अब निगाहें खनन विभाग पर हैं। अधिकारियों के सामने चुनौती है कि वे यह स्पष्ट करें कि खदान का लाइसेंस स्टेटस क्या था, क्या इसे आधिकारिक तौर पर सील किया गया था, और अगर हां, तो वहां मशीनरी कैसे पहुंची।
अगर जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है, तो खदान मालिक और ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।
इस तरह की घटनाएं मजदूरों की मजबूरी को भी उजागर करती हैं। काम की तलाश में दूर-दराज से आए लोग बिना सुरक्षा और बीमा के जोखिम भरे काम करने को मजबूर हो जाते हैं। हादसे के बाद उनके परिवार मुआवजे और न्याय के लिए भटकते रह जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद खदानों की नियमित जांच, स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और सख्त निगरानी बेहद जरूरी है। स्थानीय प्रशासन अगर असुरक्षित खदानों की पहचान कर ठोस कार्रवाई करे, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
फिलहाल, यह घटना जोधपुर क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा और खनन नियमों को लेकर नई बहस छेड़ रही है।
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