ईरान ने कहा कि अमेरिका-इज़राइल हमलों से उसे $270 अरब का नुकसान हुआ है और वह मुआवजा चाहता है। युद्ध से उसकी अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। फिर भी, ईरान बातचीत में बड़े समझौते के लिए तैयार नहीं है।
ईरान ने कहा है कि अमेरिका और इज़राइल के हमलों से उसे भारी नुकसान हुआ है, इसलिए उसे इसका मुआवज़ा (compensation) मिलना चाहिए। यह मांग ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत होने की संभावना है।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र (UN) में प्रतिनिधि ने कहा कि 5 क्षेत्रीय देशों को भी मुआवज़ा देना चाहिए, क्योंकि उनके इलाकों का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए किया गया था। कितना नुकसान हुआ? ईरान के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में उसे करीब 270 अरब डॉलर ($270bn) का सीधा और अप्रत्यक्ष नुकसान हुआ है।
हालांकि, सरकार ने अभी पूरी डिटेल नहीं दी है, लेकिन कहा है कि यह मुद्दा पहले भी बातचीत में उठाया गया था और आगे भी उठेगा। किन-किन चीज़ों को नुकसान हुआ? इन सबको काफी नुकसान हुआ है और इन्हें ठीक होने में कई साल लग सकते हैं।
सरकार ने माना है कि उसके पास इतना पैसा नहीं है कि जिन लोगों के घर टूट गए हैं, उन्हें तुरंत मुआवज़ा दे सके। तेहरान समेत कई शहरों के एयरपोर्ट को नुकसान हुआ है। रनवे, कंट्रोल टावर और हैंगर पर हमले हुए।
सरकार “Internet Pro” नाम की नई सर्विस ला रही है, जिसमें कुछ लोगों को थोड़ा बेहतर इंटरनेट मिलेगा, लेकिन आम लोगों के लिए अभी भी लिमिटेड इंटरनेट ही है। इतना नुकसान होने के बावजूद ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं, खासकर अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर।
ईरान इस समय भारी आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान झेल रहा है, लेकिन फिर भी वह अपनी शर्तों पर ही बातचीत करना चाहता है। आने वाले समय में बातचीत होती है या तनाव और बढ़ता है, यह देखना अहम होगा।
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