ईरान–अमेरिका–इज़राइल युद्ध के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकाबंदी जारी है, जिससे समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जंग खत्म होने के करीब है और जल्द बातचीत हो सकती है। लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच हमले जारी हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, IMF ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर बड़ा असर पड़ेगा।
मध्य-पूर्व में जारी ईरान–अमेरिका–इज़राइल संघर्ष के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि यह युद्ध “खत्म होने के करीब” है और जल्द ही पाकिस्तान में ईरान के साथ दूसरी दौर की बातचीत हो सकती है।
अमेरिकी सेना ने कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी नाकाबंदी के चलते ईरान के साथ समुद्री व्यापार पूरी तरह रोक दिया गया है। यह नाकाबंदी दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। इस बीच, लेबनान में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
दक्षिण लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लगातार हमले जारी हैं। इज़राइल हवाई हमले कर रहा है, जबकि हिज़्बुल्लाह रॉकेट दाग रहा है। करीब 10 लाख लोग बेघर होकर टेंट और सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। हाल ही में हुए हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है।
इज़राइल और लेबनान के बीच बातचीत जरूर शुरू हुई है, लेकिन इसमें ईरान का मुद्दा अलग कर दिया गया है। अब लेबनान और इज़राइल के बीच अलग से समझौते की कोशिश हो रही है, जिसमें अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दौरे पर जा रहे हैं।
उनका मकसद क्षेत्रीय शांति और संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाना है। तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। दक्षिण कोरिया ने एहतियात के तौर पर 273 मिलियन बैरल कच्चा तेल स्टोर कर लिया है, जो करीब तीन महीने तक उसकी जरूरतें पूरी कर सकता है।
क्योंकि उसकी लगभग 70% तेल सप्लाई हॉर्मुज़ के रास्ते आती है। ईरान ने भी साफ किया है कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि विरोधी देशों से जुड़े जहाजों को वहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा।
साथ ही, ईरान इस रास्ते को बातचीत में दबाव बनाने के हथियार के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहा है। इज़राइल ने दक्षिण लेबनान के कई इलाकों—जैसे बिंट ज्बील, मजदल और अन्य क्षेत्रों—में हवाई हमले किए हैं। वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ गांवों को बुलडोजर से नष्ट किया जा रहा है, जैसा गाजा में किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पहले ही पड़ चुका है। अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो वैश्विक विकास दर घटकर करीब 2% रह सकती है और महंगाई 6% से ऊपर जा सकती है।
कुल मिलाकर, यह युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया—खासकर तेल बाजार, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा—पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में बातचीत होती है या तनाव और बढ़ता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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