ग्रीस सरकार 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लाने जा रही है, जो 2027 से लागू हो सकता है। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों की मानसिक सेहत और आदतों पर पड़ रहे बुरे असर को रोका जा सकेगा। हालांकि कुछ लोग इसे सही मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे बच्चे असुरक्षित प्लेटफॉर्म की ओर जा सकते हैं।
ग्रीस सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने इस फैसले की घोषणा की है। यह कानून इस साल पास होने की उम्मीद है और 1 जनवरी 2027 से लागू हो सकता है।
ग्रीस अब स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों की तरह इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर चिंता बढ़ रही है। खास बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसा बैन लागू कर चुका है, जबकि फ्रांस, मलेशिया, इंडोनेशिया और डेनमार्क भी इस पर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मित्सोताकिस ने कहा कि यह फैसला मुश्किल जरूर है, लेकिन जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई माता-पिता शिकायत करते हैं कि उनके बच्चे ठीक से सो नहीं पाते, जल्दी चिंता में आ जाते हैं और हमेशा फोन पर लगे रहते हैं। वहीं कई बच्चे भी सोशल मीडिया के दबाव, तुलना और लगातार ऑनलाइन रहने की मजबूरी से परेशान हैं।
सरकार का कहना है कि वे बच्चों को टेक्नोलॉजी से दूर नहीं करना चाहते, क्योंकि यह सीखने और क्रिएटिविटी के लिए जरूरी है। लेकिन कुछ ऐप्स का डिजाइन ऐसा होता है कि बच्चे उनमें ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे उनकी आजादी और बचपन पर असर पड़ता है।
यह बैन मैसेजिंग ऐप्स (जैसे चैट ऐप) पर लागू नहीं होगा। हालांकि, Google (YouTube), TikTok और Meta (Facebook, Instagram, Threads) जैसी कंपनियों ने इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पहले Google ने कहा था कि ऐसे बैन से बच्चे बिना अकाउंट के प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करेंगे, जिससे उनकी सुरक्षा कम हो सकती है।
वहीं Meta का कहना है कि ऐप स्टोर पर उम्र की जांच और पैरेंट की मंजूरी बेहतर तरीका है। कुछ लोग इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसका विरोध भी कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे बच्चे इंटरनेट के कम सुरक्षित हिस्सों में चले जाएंगे।
ग्रीस के डिजिटल मंत्री दिमित्रिस पापास्टेर्गियू ने बताया कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स की उम्र वेरिफाई करनी होगी। नियम न मानने पर उन्हें यूरोपियन यूनियन के कानून के तहत जुर्माना भरना पड़ेगा।
सरकार एक खास ऐप “Kids Wallet” का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है, जो बच्चे के फोन में इंस्टॉल होगा और पैरेंट्स के अकाउंट से जुड़ा रहेगा। इससे बच्चे की स्क्रीन टाइम और कुछ चीजों (जैसे शराब या तंबाकू खरीदना) पर पहले से ही कंट्रोल किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने यूरोपियन यूनियन से भी अपील की है कि पूरे यूरोप में ऐसा नियम लागू किया जाए और 15 साल से ऊपर के यूजर्स के लिए उम्र जांच सिस्टम बनाया जाए। उन्होंने बच्चों से कहा कि शायद वे इस फैसले से नाराज होंगे, लेकिन अगर कोई चीज हमें परेशान करती है या बुरा महसूस कराती है, तो उस पर रोक लगाना सही है।
साथ ही उन्होंने माता-पिता से कहा कि कोई भी कानून उनकी भूमिका की जगह नहीं ले सकता, यह सिर्फ उनकी मदद के लिए एक टूल है।
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