AIIMS जोधपुर ने ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’ के 4 मरीजों का आधुनिक मिनिमली-इनवेसिव तकनीक से सफल इलाज किया, जिसमें ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी। इलाज के बाद मरीजों के अनियंत्रित हँसी के दौरे काफी कम हुए और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी व पढ़ाई में सुधार देखा गया।
AIIMS जोधपुर ने मिर्गी के एक बेहद दुर्लभ और दवा-रोधी रूप ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’ (Gelastic Seizures) से पीड़ित चार मरीजों का बिना ओपन ब्रेन सर्जरी के सफल इलाज कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन मरीजों में तीन बच्चे (5, 8 और 9 साल) और एक 25 वर्षीय युवक शामिल थे। सभी को बार-बार अनियंत्रित हँसी के दौरे पड़ते थे, जो दवाओं से कंट्रोल नहीं हो रहे थे।
क्या है ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’? इस बीमारी में मरीज बिना किसी वजह के अचानक और बार-बार जोर-जोर से हँसने लगता है, जबकि अंदर से उसे हँसी नहीं आ रही होती। यह समस्या दिमाग के गहरे हिस्से में मौजूद ‘हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा’ नाम के घाव से जुड़ी होती है।
अक्सर परिवार इसे मजाक, शरारत या अजीब आदत समझकर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन असल में यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। समय पर इलाज न हो तो यह बीमारी और गंभीर मिर्गी, व्यवहारिक दिक्कतों और पढ़ाई पर बुरा असर डाल सकती है।
कैसे किया गया इलाज? AIIMS जोधपुर ने पारंपरिक ओपन ब्रेन सर्जरी की बजाय एक आधुनिक मिनिमली-इनवेसिव तकनीक अपनाई। इस प्रक्रिया में छोटे-छोटे छेदों के जरिए दिमाग के प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर सटीक इलाज किया जाता है। संस्थान के अनुसार, यह तकनीक राज्य में पहली बार और देश के कुछ चुनिंदा केंद्रों पर ही उपलब्ध है।
इससे ऑपरेशन का जोखिम कम होता है और रिकवरी भी जल्दी होती है। इलाज के बाद मरीजों के दौरे में साफ कमी आई है और वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों में भी सुधार देखा गया है।
दुर्लभ मिर्गी के मामलों में सही पहचान होने में कई साल लग जाते हैं, क्योंकि इसके लक्षण सामान्य व्यवहार जैसे लगते हैं। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में उन्नत न्यूरोसर्जरी सुविधाएं सीमित हैं, ऐसे में जोधपुर में यह सुविधा मिलना पूरे क्षेत्र के मरीजों के लिए राहत की बात है।
AIIMS जोधपुर ने बताया कि वह आगे और ऐसे केस लेने और डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने की योजना बना रहा है, ताकि पूरे राज्य में बेहतर रेफरल सिस्टम तैयार हो सके।
कब सतर्क हों? अगर किसी बच्चे को बिना वजह बार-बार हँसी के दौरे पड़ते हैं और साथ में घूरना, सुन्न हो जाना या ध्यान टूटना जैसे लक्षण दिखते हैं, तो इसे हल्के में न लें। ऐसे मामलों की जांच AIIMS जोधपुर जैसे केंद्रों में MRI और EEG जैसी जांचों के जरिए की जा सकती है, जहां विशेषज्ञ टीम मौजूद होती है।
समय पर सही इलाज मिलने से ऐसी दुर्लभ और डरावनी दिखने वाली बीमारियों को भी काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे मरीज और उसका परिवार सामान्य और तनावमुक्त जीवन जी सकता है।
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