AIIMS जोधपुर की बड़ी सफलता: बिना ओपन सर्जरी ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’ का इलाज

4/3/2026, 9:59:00 AM

AIIMS जोधपुर ने ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’ के 4 मरीजों का आधुनिक मिनिमली-इनवेसिव तकनीक से सफल इलाज किया, जिसमें ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी। इलाज के बाद मरीजों के अनियंत्रित हँसी के दौरे काफी कम हुए और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी व पढ़ाई में सुधार देखा गया।

AIIMS जोधपुर ने मिर्गी के एक बेहद दुर्लभ और दवा-रोधी रूप ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’ (Gelastic Seizures) से पीड़ित चार मरीजों का बिना ओपन ब्रेन सर्जरी के सफल इलाज कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन मरीजों में तीन बच्चे (5, 8 और 9 साल) और एक 25 वर्षीय युवक शामिल थे। सभी को बार-बार अनियंत्रित हँसी के दौरे पड़ते थे, जो दवाओं से कंट्रोल नहीं हो रहे थे। क्या है ‘लाफ्टर एपिलेप्सी’? इस बीमारी में मरीज बिना किसी वजह के अचानक और बार-बार जोर-जोर से हँसने लगता है, जबकि अंदर से उसे हँसी नहीं आ रही होती। यह समस्या दिमाग के गहरे हिस्से में मौजूद ‘हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा’ नाम के घाव से जुड़ी होती है। अक्सर परिवार इसे मजाक, शरारत या अजीब आदत समझकर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन असल में यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। समय पर इलाज न हो तो यह बीमारी और गंभीर मिर्गी, व्यवहारिक दिक्कतों और पढ़ाई पर बुरा असर डाल सकती है। कैसे किया गया इलाज? AIIMS जोधपुर ने पारंपरिक ओपन ब्रेन सर्जरी की बजाय एक आधुनिक मिनिमली-इनवेसिव तकनीक