PM नरेंद्र मोदी ने गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट लॉन्च किया, जिससे भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत मानी जा रही है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, नौकरियां बढ़ेंगी और भारत ग्लोबल मार्केट में मजबूत बन सकता है। हालांकि, इसका पूरा असर दिखने में 5–10 साल लग सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात के साणंद में “केन्स सेमीकॉन प्लांट” का उद्घाटन किया। इस प्लांट को भारत में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक सेमीकंडक्टर उत्पादन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह यूनिट गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GIDC) क्षेत्र में स्थापित की गई है।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत चिप निर्माण के क्षेत्र में अपनी निर्भरता कम कर एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी बने। अब तक भारत मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर चिप्स का आयात करता रहा है। मोबाइल, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल से लेकर डिफेंस तक कई सेक्टर विदेशी चिप्स पर निर्भर हैं।
कोविड के दौरान और उसके बाद आई ग्लोबल चिप शॉर्टेज ने सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर किया। ऐसे में देश के भीतर फैब और पैकेजिंग जैसी क्षमताओं का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
केन्स सेमीकॉन प्लांट शुरुआती चरण में ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल एप्लिकेशन के लिए चिप्स बनाने पर फोकस करेगा। आगे चलकर सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और वैश्विक निवेश के जरिए और भी प्लांट आने की संभावना है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, गुजरात और आसपास के इलाकों में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इसमें इंजीनियरिंग, टेक्नीशियन, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। साथ ही चिप डिजाइन कंपनियों, टेस्टिंग लैब्स और रिसर्च संस्थानों को भी घरेलू स्तर पर नए अवसर मिलेंगे।
दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर Amazon, Google, Microsoft और Meta जैसी बड़ी कंपनियां 2026 में डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 700 अरब डॉलर तक खर्च करने की योजना बना रही हैं। इससे सेमीकंडक्टर की मांग और तेजी से बढ़ेगी।
अगर भारत इस मांग को समय पर सप्लाई से जोड़ पाता है, तो वह न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी कर सकेगा बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी अपनी मजबूत पकड़ बना सकता है। लंबी अवधि में, अगर भारत में बड़े पैमाने पर चिप निर्माण सफल होता है, तो मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
यानी कीमतें स्थिर रह सकती हैं या कम भी हो सकती हैं। रोजगार के लिहाज से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े कोर्स करने वाले युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे, खासतौर पर गुजरात और आसपास के राज्यों में। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री कैपिटल-इंटेंसिव और टेक्नोलॉजी-हेवी होती है।
इसलिए इसके नतीजे तुरंत नहीं दिखेंगे, बल्कि अगले 5 से 10 साल में इन निवेशों का असली प्रभाव सामने आएगा।
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