⚖️ राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रांसजेंडर पहचान “कृपा” नहीं, मौलिक अधिकार
3/31/2026, 10:03:00 AM
राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर बेंच ने ट्रांसजेंडर पहचान को मौलिक अधिकार मानते हुए बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नौकरियों और शिक्षा में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को 3% अतिरिक्त वेटेज देने का निर्देश दिया। साथ ही, सभी ट्रांसजेंडर लोगों को OBC में डालने की नीति और 2026 के संशोधन बिल की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि आत्म-पहचान का अधिकार सबसे अहम है और सरकारों को इसे जमीन पर लागू करना होगा।
राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर बेंच ने ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर एक अहम और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जेंडर आइडेंटिटी किसी की “कृपा” से नहीं मिलती, बल्कि यह हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, जिसे पूरी इज्जत के साथ मान्यता मिलनी चाहिए। कोर्ट के मुख्य निर्देश कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आवेदन करने वाले ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को 3% अतिरिक्त वेटेज दिया जाए। इसका मतलब है कि अगर दो उम्मीदवार बराबरी पर हों, तो ट्रांसजेंडर उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलेगी, ताकि उन्हें असली अवसर मिल सकें। सरकारी नीति पर सख्त टिप्पणी यह फैसला हाल ही में पारित ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट बिल 2026 पर कड़ी टिप्पणी के बाद आया है। कोर्ट ने कहा कि यह संशोधन आत्म-पहचान (Self-Identity) के अधिकार को कमजोर करता है। मामले की पृष्ठभूमि यह फैसला गंगा कुमारी नाम की याचिकाकर्ता की याचिका पर दिया गया, जिसमें 2023 की उस सरकारी अ