शुक्रवार को शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, जहां Nifty 50 23,000 के नीचे और BSE Sensex 1,000 पॉइंट से ज्यादा गिर गया। US-Iran तनाव और महंगे crude oil की वजह से मार्केट में दबाव बना रहा।
आज शुक्रवार को शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। US-Iran के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल (crude oil) की ऊंची कीमतों ने मार्केट के सेंटीमेंट को दबाव में रखा। Nifty50 23,000 के नीचे चला गया, जबकि BSE Sensex में 1,000 पॉइंट से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
करीब सुबह 10:30 बजे, Nifty50 22,994.40 पर ट्रेड कर रहा था, जो 312.05 पॉइंट या 1.34% नीचे था। वहीं BSE Sensex 74,256.59 पर था, जो 1,016.86 पॉइंट या 1.35% गिरा हुआ था। Geojit Investments Limited के Chief Investment Strategist, डॉ.
वी. के. विजयकुमार ने कहा कि युद्ध से जुड़ी खबरों पर बाजार का उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है। Brent crude की कीमत करीब $108 तक पहुंचने से भारतीय बाजार में फिर से risk-off का माहौल बन सकता है। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद आई गिरावट से Nifty की valuation अब काफी हद तक सही (fair) स्तर पर आ गई है।
अभी Nifty करीब 19 के PE पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले 10 साल के औसत 22.4 से कम है। लेकिन अगर इस energy crisis से भारत की अर्थव्यवस्था (macros) पर असर पड़ता है, तो आगे valuations और गिर सकती हैं, क्योंकि FY27 की earnings growth पर दबाव आ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर युद्ध जल्दी खत्म हो जाए, तेल की कीमतें कम हो जाएं और गैस की सप्लाई सामान्य हो जाए, तो भारतीय अर्थव्यवस्था इस झटके को संभाल सकती है।
लेकिन अगर युद्ध लंबा चलता है, तेल लंबे समय तक महंगा रहता है और गैस की कमी बनी रहती है, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव पड़ेगा और बाजार उसी हिसाब से react करेगा। संक्षेप में, सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि यह युद्ध कितने समय तक चलता है।
बाजार को उम्मीद है कि लंबा युद्ध किसी के हित में नहीं है, इसलिए यह जल्द खत्म हो सकता है। अमेरिका भी अब इससे निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है। वहीं, बाजार में गिरावट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें अमेरिका की सरकार पर भी दबाव बना सकती हैं कि वह इस तनाव को कम करे।
ग्लोबल संकेत भी कमजोर रहे। अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट आई—Nasdaq Composite 2% से ज्यादा गिरकर correction zone में चला गया, जबकि S&P 500 और Dow Jones में 1% से ज्यादा की गिरावट रही।
निवेशक सुरक्षित निवेश (safe assets) की तरफ बढ़े, क्योंकि US-Israel और Iran के बीच तनाव बढ़ने की आशंका से तेल की कीमतें बढ़ीं और inflation की चिंता भी बढ़ी। Wall Street की कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। ट्रेडर्स सतर्क नजर आए, भले ही Donald Trump ने Iran के साथ समझौते की deadline फिर बढ़ा दी हो।
हालांकि crude oil की कीमतों में थोड़ी गिरावट भी देखी गई। घरेलू स्तर पर, विदेशी निवेशकों (FII) ने बुधवार को ₹1,805.37 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों (DII) ने ₹5,429.78 करोड़ की खरीदारी की।
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