पश्चिम एशिया युद्ध के कारण राजस्थान की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री (जोधपुर हैंडीक्राफ्ट, भीलवाड़ा टेक्सटाइल) पर बड़ा असर पड़ा है और शिपिंग रुकने से माल बंदरगाहों व गोदामों में अटका है। फ्रेट महंगा होने और ऑर्डर रुकने से कारोबार प्रभावित हुआ है, जिससे करीब 10,000 करोड़ के व्यापार पर खतरा है। इस संकट से लाखों मजदूरों और छोटे यूनिट्स की आजीविका पर असर पड़ रहा है। उद्योग संगठनों ने सरकार से राहत पैकेज और नई मार्केट्स की मांग की है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने राजस्थान की एक्सपोर्ट आधारित इंडस्ट्री को गहरे संकट में डाल दिया है। खासकर जोधपुर की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री, राज्य का ओवरऑल एक्सपोर्ट कारोबार और भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
जोधपुर की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री, जो पहले ही अमेरिकी टैरिफ और यूरोपीय नियमों से जूझ रही थी, अब युद्ध के कारण और मुश्किल में फंस गई है। समुद्री रास्तों पर खतरे, बढ़ते फ्रेट चार्ज और कंटेनर मूवमेंट रुकने से एक्सपोर्ट लगभग ठप हो गया है।
पहले हर साल करीब 4,500 कंटेनर विदेश जाते थे, लेकिन अब सैकड़ों कंटेनर माल के साथ गोदामों में अटके पड़े हैं और नए ऑर्डर भी रुक गए हैं। जोधपुर में 5,000 से ज्यादा हैंडीक्राफ्ट यूनिट्स हैं, जिनसे करीब 5 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी है।
लकड़ी का फर्नीचर, मेटल क्राफ्ट और होम डेकोर जैसे प्रोडक्ट यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों में भेजे जाते हैं। लेकिन पहले 50% अमेरिकी टैरिफ से ऑर्डर में 40% गिरावट आई और अब युद्ध ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। शिपिंग कंपनियों ने कई रूट्स बंद या सीमित कर दिए हैं, जिससे फ्रेट रेट तेजी से बढ़े हैं।
कंटेनर समय पर पोर्ट तक नहीं पहुंच रहे और बुकिंग भी महंगी हो गई है। इससे एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ रही है, जबकि खरीदार अनिश्चित माहौल के कारण डिलीवरी टाल रहे हैं। नई दिल्ली में 11–14 मार्च के बीच होने वाला IMM India Furniture Fair भी अनिश्चितता के कारण टाल दिया गया।
इसमें जोधपुर के 70–100 एक्सपोर्टर्स हिस्सा लेने वाले थे। यह प्लेटफॉर्म नए ऑर्डर और इंटरनेशनल नेटवर्किंग के लिए अहम माना जाता है, इसलिए इसके टलने से कारोबार को बड़ा झटका लगा है। पाउडर कोटिंग और पेट्रोकेमिकल बेस्ड इनपुट महंगे हो गए हैं, जिससे फिनिशिंग लागत बढ़ गई है।
इससे भारतीय प्रोडक्ट ग्लोबल मार्केट में कम प्रतिस्पर्धी हो रहे हैं। छोटे और मझोले यूनिट्स पर सबसे ज्यादा दबाव है, और अगर हालात नहीं सुधरे तो छंटनी या फैक्ट्री बंद होने का खतरा है।
युद्ध का असर पूरे राजस्थान के एक्सपोर्ट सेक्टर पर भी पड़ा है। जयपुर, जोधपुर, किशनगढ़ जैसे औद्योगिक केंद्रों से जाने वाला माल लगभग रुक गया है। खाड़ी देशों को होने वाला करीब 10,000 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यापार खतरे में है, जो राज्य के कुल एक्सपोर्ट का लगभग 10% हिस्सा है।
मेहंदी, मार्बल-ग्रेनाइट, ज्वेलरी, टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट जैसे प्रोडक्ट की शिपमेंट रुकी हुई है या पोर्ट्स पर अटकी है। खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं और पुरानी डिलीवरी भी टाल रहे हैं। सोjat और नागौर की मेहंदी इंडस्ट्री भी प्रभावित है, जहां से तुर्की और खाड़ी देशों में बड़े स्तर पर निर्यात होता है।
अनिश्चितता के कारण डिमांड कमजोर पड़ गई है।
भीलवाड़ा, जिसे “टेक्सटाइल सिटी” कहा जाता है, वहां की इंडस्ट्री भी गंभीर संकट में है। यहां 450 से ज्यादा फैब्रिक यूनिट, 20+ स्पिनिंग यूनिट और कई प्रोसेसिंग यूनिट्स हैं, जिनका बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट पर निर्भर है। कपड़ा और डेनिम एक्सपोर्ट खाड़ी देशों में फंसा हुआ है।
कंटेनर पोर्ट्स पर रुके हैं, नए ऑर्डर धीमे हो गए हैं और फैक्ट्रियों में स्टॉक बढ़ता जा रहा है। कैश फ्लो पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे बैंक लोन, ब्याज और कर्मचारियों के वेतन देना मुश्किल हो सकता है।
आम लोगों पर सीधा असर इस पूरे संकट का असर लाखों मजदूरों, कारीगरों, ट्रांसपोर्ट स्टाफ और छोटे सप्लायर्स पर पड़ रहा है। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो छंटनी, वेतन कटौती और रोजगार के अवसर कम होने की आशंका है। इसका असर स्थानीय बाजार, किराना दुकानों और सर्विस सेक्टर तक पहुंचेगा।
सरकार से राहत की मांग उद्योग संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से राहत पैकेज की मांग की है, जिसमें: कम ब्याज पर वर्किंग कैपिटल लोन पोर्ट पर फंसे कंटेनरों पर शुल्क में राहत डिजिटल ट्रेड फेयर प्लेटफॉर्म नए इंटरनेशनल मार्केट्स (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) की खोज शिपिंग और कंटेनर उपलब्धता पर कूटनीतिक प्रयास
तीसरा बड़ा झटका यह संकट उन उद्योगों के लिए तीसरा बड़ा झटका है, जो पहले ही “टैरिफ” और यूरोपीय पर्यावरण नियमों से जूझ रहे थे। अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो जोधपुर की हैंडीक्राफ्ट पहचान, भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री और राजस्थान की एक्सपोर्ट इकॉनमी पर लंबी अवधि का असर पड़ सकता है।
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Netgram Team. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.