पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में मछली बड़ा चुनावी मुद्दा बन गई है, जिसे TMC ने बंगाली संस्कृति से जोड़कर BJP को “बाहरी” पार्टी बताया। इसके जवाब में BJP नेताओं ने मछली के साथ प्रचार कर यह दिखाने की कोशिश की कि वे नॉनवेज के खिलाफ नहीं हैं। यह “फिश पॉलिटिक्स” अब चुनाव में सांस्कृतिक पहचान और वोटरों को प्रभावित करने का अहम मुद्दा बन गया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार एक अनोखा और दिलचस्प मुद्दा सामने आया है—मछली। जो आमतौर पर बंगाल की रोज़मर्रा की जिंदगी और खानपान का हिस्सा होती है, वही अब राजनीतिक बहस और चुनावी रणनीति का केंद्र बन गई है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच यह मुद्दा अब “फिश पॉलिटिक्स” के रूप में उभर चुका है। कैसे शुरू हुई ‘फिश पॉलिटिक्स’?
इस पूरे विवाद की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने बिना लाइसेंस मांस बिक्री और धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों के आसपास मांस-मछली बिक्री पर रोक लगाने की बात कही। भले ही बिहार में इस बयान पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं हुई, लेकिन पश्चिम बंगाल में TMC ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया।
17 फरवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी सभा में दावा किया कि अगर BJP सत्ता में आई, तो बंगाल में मछली और मांस की बिक्री पर रोक लग सकती है। उन्होंने BJP को “बाहरी पार्टी” बताते हुए कहा कि वह बंगाल की संस्कृति को नहीं समझती।
TMC ने मछली को सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति और पहचान से जोड़ दिया। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि BJP की नीतियां बंगाल की परंपराओं के खिलाफ हैं। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे BJP नेताओं का स्वागत मछली, मांस और अंडे से बने व्यंजनों से करें।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में मछली सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहारों में भी मांसाहारी भोजन का विशेष महत्व होता है। इसलिए यह मुद्दा खासकर भद्रलोक वर्ग और SC-ST समुदाय के वोटरों पर असर डाल सकता है।
TMC ने BJP पर नॉनवेज विरोधी छवि बनाने की भी कोशिश की। दिसंबर में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक घटना हुई थी, जहां चिकन पैटी बेचने वाले फेरीवालों के साथ मारपीट हुई। TMC ने इसे BJP की सोच से जोड़कर प्रचारित किया।
इसके अलावा BJP की परिवर्तन यात्रा के समापन पर कार्यकर्ताओं को दिए गए भोजन में मछली न होने को भी मुद्दा बनाया गया। TMC नेताओं ने दावा किया कि BJP बंगालियों पर शाकाहार थोपना चाहती है। TMC के आरोपों के जवाब में BJP ने भी रणनीति बदली।
पार्टी के नेता अब खुलकर मछली के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, स्वप्न दासगुप्ता और अभिनेता-नेता रुद्रनील घोष जैसे नेता सार्वजनिक रूप से मछली खाते नजर आए। वहीं, शरदवत मुखोपाध्याय तो बड़ी मछली लेकर कैंपेन करने निकल पड़े।
BJP नेताओं का कहना है कि TMC गलत जानकारी फैला रही है और हर व्यक्ति को अपनी पसंद का भोजन करने की आज़ादी है। उनका तर्क है कि मछली और मांस बंगाल की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं, और BJP इसका विरोध नहीं करती। चुनावी असर क्या होगा?
अब सवाल यह है कि क्या ‘फिश पॉलिटिक्स’ चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण वोटरों पर असर डाल सकता है।
TMC जहां इसे “बंगाली अस्मिता” से जोड़कर फायदा उठाना चाहती है, वहीं BJP इस नैरेटिव को तोड़ने के लिए खुद को उसी संस्कृति के करीब दिखाने की कोशिश कर रही है। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में मछली अब सिर्फ खाने की चीज नहीं रही, बल्कि यह राजनीति का हथियार बन चुकी है।
यह चुनाव यह भी दिखा रहा है कि भारत में राजनीति अब सिर्फ विकास और नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान के मुद्दों पर भी उतनी ही मजबूती से लड़ी जा रही है।
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