राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि व्हाट्सऐप से भेजा गया नोटिस कानूनी रूप से वैध नहीं है। ऐसे नोटिस के आधार पर गिरफ्तारी करना व्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में अधिकारी को अवमानना में तलब भी किया है।
Rajasthan High Court ने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ कर दिया है कि गिरफ्तारी से पहले केवल व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया नोटिस कानूनी रूप से वैध नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नोटिस के आधार पर की गई गिरफ्तारी व्यक्ति की वैयक्तिक स्वतंत्रता का हनन है। यह मामला एक रिश्वत प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें जांच एजेंसी एसीबी ने आरोपी को 25 जनवरी 2023 को व्हाट्सऐप के माध्यम से नोटिस भेजा था। इस नोटिस में उसे 31 जनवरी को पेश होने के लिए कहा गया था। याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए समय मांगा, लेकिन इसके बावजूद एसीबी ने 1 फरवरी 2023 को उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश Justice Praveer Bhatnagar ने कहा कि यह कार्रवाई कानून के निर्धारित प्रावधानों के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि CrPC Section 41A के तहत नोटिस भेजने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसे पालन करना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने कोर्ट में दलील दी कि एसीबी की यह कार्रवाई पूरी तरह अवैध थी और सीआरपीसी की धारा 41ए का उल्लंघन है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लिया और जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। साथ ही, अदालत ने इस मामले में एसीबी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और आईपीएस अधिकारी Pushpendra Singh Rathore को अवमानना का दोषी मानते हुए सजा पर सुनवाई के लिए 6 अप्रैल को तलब किया है। यह फैसला कानून व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना जरूरी है। केवल डिजिटल माध्यम, जैसे व्हाट्सऐप, के जरिए नोटिस भेजकर गिरफ्तारी करना उचित नहीं माना जाएगा।
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