शॉर्ट समरी: Nvidia अपने इंजीनियरों को सैलरी के अलावा “AI टोकन बजट” देने पर विचार कर रही है, जिससे उनकी कंप्यूटिंग पावर और काम करने की क्षमता बढ़ेगी। AI टोकन महंगे होते हैं और तेजी से खर्च होते हैं, इसलिए भविष्य में ये सैलरी का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
दुनिया की दिग्गज चिप कंपनी Nvidia ने अपने इंजीनियरों के लिए एक अलग और नया कदम उठाया है। कंपनी के CEO जेन्सेन हुआंग ने GTC कॉन्फ्रेंस (सैन जोस) में बताया कि वे इंजीनियरों को उनकी बेस सैलरी के करीब 50% के बराबर “AI टोकन बजट” देने पर विचार कर रहे हैं।
क्या हैं ये AI टोकन? AI टोकन असल में AI की दुनिया में गणना (measurement) की एक यूनिट है। जैसे बिजली को किलोवॉट और दूरी को किलोमीटर में मापा जाता है, वैसे ही AI मॉडल की प्रोसेसिंग को टोकन में मापा जाता है।
जब आप ChatGPT या Gemini जैसे AI टूल को कोई प्रॉम्प्ट देते हैं, तो वह उसे छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ देता है, जिन्हें टोकन कहा जाता है। उदाहरण के लिए “Unbelievable” शब्द को AI “un”, “believe” और “able” में बांट सकता है। आम तौर पर करीब 750 शब्द बनाने में लगभग 1000 टोकन खर्च होते हैं।
सैलरी का चौथा तरीका बनेगा टोकन जेन्सेन हुआंग के मुताबिक आज इंजीनियर की असली ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पास कितनी कंप्यूटिंग पावर है। उनका कहना है कि अगर किसी इंजीनियर की सैलरी लाखों डॉलर है, तो उसका आधा हिस्सा टोकन के रूप में देने से उसकी काम करने की क्षमता 10 गुना तक बढ़ सकती है।
अब तक नौकरी में सैलरी, बोनस और शेयर मिलते थे, लेकिन अब “टोकन बजट” सैलरी का चौथा हिस्सा बन सकता है। सिलिकॉन वैली में इंटरव्यू के दौरान अब उम्मीदवार यह भी पूछ रहे हैं कि उन्हें कितने AI टोकन मिलेंगे।
क्यों महंगा है AI टोकन? AI मॉडल का इस्तेमाल फ्री नहीं होता। कंपनियों को इसके लिए भारी खर्च करना पड़ता है। उदाहरण के लिए OpenAI अपने एडवांस मॉडल्स के लिए लगभग 10 लाख टोकन पर 15 डॉलर तक चार्ज करता है। जटिल कोडिंग या AI एजेंट्स के काम में ये टोकन बहुत तेजी से खर्च होते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार Vercel के एक इंजीनियर ने AI एजेंट का इस्तेमाल करते हुए सिर्फ एक दिन में लगभग 10,000 डॉलर (करीब 8.3 लाख रुपये) के टोकन खर्च कर दिए थे।
Nvidia के लिए भी फायदे का सौदा Nvidia खुद AI टोकन इस्तेमाल करने वाली चिप्स बनाती है, इसलिए यह कदम कंपनी के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। Zapier और Kumo AI जैसी कंपनियां पहले से ही कर्मचारियों के टोकन उपयोग को ट्रैक कर रही हैं ताकि टॉप परफॉर्मर्स की पहचान की जा सके।
आने वाले समय में अगर किसी जॉब ऑफर में टोकन बजट शामिल नहीं होगा, तो उसे कमजोर ऑफर माना जा सकता है। AI के इस दौर में अब सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि कंप्यूटिंग पावर भी उतनी ही जरूरी बनती जा रही है।
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