राहुल गांधी ने संसद में गिग-वर्कर्स के मुद्दे उठाते हुए उनकी सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और बीमा को लेकर सवाल किए, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। देश में गिग-वर्कर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, फिर भी बहुत कम लोग eShram और बीमा योजनाओं से जुड़े हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गिग-वर्कर्स के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। हाल ही में उन्होंने गिग-वर्कर्स के एक समूह से मुलाकात की और उनकी समस्याएं समझीं। इसके बाद संसद में उन्होंने सरकार से पूछा कि इन वर्कर्स की समस्याओं का समाधान कब होगा, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
गिग-वर्कर्स की सुरक्षा पर गंभीर सवाल राहुल गांधी ने गिग-वर्कर्स के एक्सीडेंट और मौतों के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इन्हें न्यूनतम मजदूरी मिलेगी, लेकिन इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। बीमा और सुरक्षा को लेकर भी स्थिति कमजोर बनी हुई है, जिससे वर्कर्स लगातार चिंता में हैं।
सरकार की चुप्पी पर सवाल राहुल गांधी ने ID ब्लॉक होने और जाति-आधारित भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए। लेकिन इन सवालों का भी कोई जवाब नहीं मिला। नीति आयोग के अनुसार, देश में गिग-वर्कर्स की संख्या जल्द ही 2 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जबकि eShram पोर्टल पर अभी तक केवल 8.8 लाख वर्कर्स ही रजिस्टर हुए हैं।
बीमा योजनाओं की खराब स्थिति गिग-वर्कर्स के लिए बीमा योजनाओं का हाल भी अच्छा नहीं है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में सिर्फ 23,831 गिग-वर्कर्स जुड़े हैं, जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में यह संख्या करीब 1.3 लाख है। यानी बड़ी संख्या में वर्कर्स बिना किसी सुरक्षा के काम कर रहे हैं।
राहुल गांधी का सवाल: अधिकार या कॉर्पोरेट गुलामी? राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की चुप्पी से लगता है कि गिग-वर्कर्स सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये वर्कर्स इस नई गिग इकॉनमी में भागीदार बनेंगे या सिर्फ कॉर्पोरेट के लिए काम करने वाले बनकर रह जाएंगे। उन्होंने जोर दिया कि इन वर्कर्स को उचित आय और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
क्या बदलेगी स्थिति? गिग-वर्कर्स के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, उनका भविष्य अनिश्चित बना रहेगा। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।
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