Amazon ने हाल ही में करीब 30,000 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की छंटनी कर AI-based coding पर ज्यादा भरोसा किया। लेकिन इसके बाद कंपनी की वेबसाइट और ऐप एक हफ्ते में चार बार क्रैश हो गए और कई यूजर्स को Checkout जैसे जरूरी बटन भी नहीं दिखे। रिपोर्ट्स के मुताबिक AI-assisted या “Vibe Coding” से बने कोड में गड़बड़ी इसकी वजह हो सकती है। अब कंपनी ने सीनियर इंजीनियरों की मीटिंग बुलाकर निर्देश दिया है कि उनकी मंजूरी के बिना कोई नया कोड सिस्टम में नहीं जोड़ा जाएगा। यह मामला दिखाता है कि AI कोड बना सकता है, लेकिन क्वालिटी चेक और समस्या ठीक करने के लिए इंसानी डेवलपर्स अभी भी जरूरी हैं।
AI-assisted coding अब Amazon के लिए बड़ी परेशानी बनती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में कंपनी की वेबसाइट और ऐप चार बार डाउन हो चुके हैं। सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से कई यूजर्स को Checkout जैसे जरूरी बटन ही नहीं दिख रहे थे, जिससे वे खरीदारी पूरी नहीं कर पा रहे थे।
मामला इतना गंभीर हो गया कि कंपनी को अपने टॉप इंजीनियरों की इमरजेंसी मीटिंग बुलानी पड़ी। हालांकि Amazon ने आधिकारिक तौर पर ऐप और वेबसाइट डाउन होने की वजह नहीं बताई है, लेकिन रिपोर्ट्स में इसे “Vibe Coding” से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है Vibe Coding? पिछले कुछ समय से टेक इंडस्ट्री में एक ट्रेंड की चर्चा हो रही है—AI से कोडिंग। इसमें डेवलपर सिर्फ AI को एक प्रॉम्प्ट देता है और AI खुद ही कोड लिखकर ऐप या फीचर बना देता है। इस तरीके को अनौपचारिक तौर पर Vibe Coding कहा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि Amazon ने पिछले महीनों में लगभग 30,000 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की छंटनी की थी। कंपनी का मानना था कि अब इनका बड़ा हिस्सा AI टूल्स से किया जा सकता है—यानी डेवलपर बस निर्देश देंगे और AI कोड बना देगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 के आखिरी महीनों में भी कंपनी की कुछ सेवाएं Kiro AI coding assistant की वजह से प्रभावित हुई थीं। यह सिस्टम कई बार अपने आप कमांड रन कर देता है और पूरे प्रोसेस में इंसानी दखल कम रहता है। हालांकि Amazon ने इन रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए कहा था कि समस्या AI नहीं बल्कि Human Error की वजह से हुई थी।
लेकिन हाल के दिनों में बार-बार ऐप क्रैश होने से कंपनी को फिर से अलर्ट होना पड़ा है। अब Amazon ने अपने इंजीनियरों को साफ निर्देश दिया है कि सीनियर इंजीनियर की अनुमति के बिना कोई भी नया कोड ऐप या सिस्टम में शामिल नहीं किया जाएगा।
असली समस्या क्या है? AI की मदद से ऐप बनाना पहले से आसान हो गया है। Claude या ChatGPT जैसे टूल्स को प्रॉम्प्ट देकर कोड तैयार कराया जा सकता है। लेकिन असली चुनौती Quality Control और Debugging की होती है। डेवलपर्स का काम सिर्फ कोड लिखना नहीं, बल्कि सिस्टम में आने वाली समस्याओं को समझना और ठीक करना भी होता है।
अगर AI से बना कोड बिना सही जांच के सिस्टम में डाल दिया जाए, तो छोटी-सी गलती भी पूरे ऐप या वेबसाइट को प्रभावित कर सकती है—जैसा कि Amazon के मामले में देखने को मिल रहा है। क्या डेवलपर्स की नौकरी खत्म हो जाएगी? इस पूरे मामले से एक बात साफ होती है—AI डेवलपर्स की मदद कर सकता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह replace नहीं कर सकता।
क्योंकि AI कोड तो बना सकता है, लेकिन उसे सही तरीके से कंट्रोल करना, टेस्ट करना और जटिल समस्याओं को समझकर ठीक करना अभी भी इंसानी इंजीनियरों का ही काम है।
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