Jodhpur में 21 साल के एक युवक के बैंक खाते में लगभग 9.20 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन मिलने के बाद पुलिस और साइबर सेल सतर्क हो गई है। युवक के पास से 19 सिम कार्ड और 9 डेबिट-क्रेडिट कार्ड भी मिले हैं, जिससे शक है कि वह किसी ऑनलाइन ठगी या “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
जोधपुर में 21 साल के एक युवक के बैंक खाते में करीब 9.20 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का मामला सामने आने के बाद पुलिस और साइबर सेल सतर्क हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने युवक को 19 सिम कार्ड और 9 डेबिट-क्रेडिट कार्ड के साथ पकड़ा है, जिससे संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों का शक गहरा गया है।
शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि युवक किसी बड़े ऑनलाइन ठगी या “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जहां अपराधी दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल पैसे घुमाने के लिए करते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक युवक के खाते में अचानक बड़ी रकम के आने-जाने के कई रिकॉर्ड मिले हैं।
हैरानी की बात यह है कि खुद खातेधारक को भी इन ट्रांजेक्शनों की पूरी जानकारी नहीं थी। अक्सर साइबर गैंग युवाओं को “ऑनलाइन जॉब” या कमीशन का लालच देकर उनके दस्तावेज़ ले लेते हैं। इसके बाद उन्हीं दस्तावेज़ों से बैंक खाते, सिम कार्ड और ई-वॉलेट खोलकर अवैध लेन-देन किया जाता है।
युवक के पास से 19 सिम और 9 कार्ड मिलना इस ओर इशारा करता है कि यह किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पिछले कुछ सालों में देशभर में साइबर ठगी के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। खासकर UPI फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम, फर्जी कस्टमर केयर कॉल और लोन ऐप के जरिए लोगों से पैसे ठगे जा रहे हैं।
ऐसे मामलों में अपराधी पैसे को कई खातों और डिजिटल वॉलेट में घुमाकर तुरंत निकाल लेते हैं, जिससे ट्रांजेक्शन का पूरा ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक-KYC सिस्टम मजबूत होने के बावजूद अगर लोग अपने दस्तावेज़ किसी और को दे दें तो सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है।
इस मामले का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इतनी बड़ी रकम के ट्रांजेक्शन के बावजूद युवक की जीवनशैली बिल्कुल साधारण बताई जा रही है। इससे शक और गहरा गया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किन-किन खातों से आया, क्या इसमें विदेशी खातों या क्रिप्टो एक्सचेंज का भी कनेक्शन है, और आखिर यह रकम कहां निकाली गई।
अगर मामला किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गैंग से जुड़ा निकला तो ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं। आम लोगों के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी भी है।
किसी भी हालत में आधार, पैन, बैंक पासबुक की कॉपी, ATM कार्ड या नेटबैंकिंग डिटेल किसी अनजान व्यक्ति को न दें, चाहे वह कितना भी आकर्षक ऑफर क्यों न दे।
कई बार युवा थोड़े पैसों के लालच में अपना बैंक खाता “किराये” पर दे देते हैं, लेकिन बाद में जब मामला मनी लॉन्ड्रिंग या साइबर ठगी का निकलता है तो उनका नाम भी अपराध में शामिल माना जाता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर आपके खाते में अचानक कोई बड़ी या संदिग्ध रकम आए तो तुरंत बैंक और पुलिस को इसकी जानकारी दें।
उसे निकालने या ट्रांसफर करने की कोशिश न करें। समय पर रिपोर्ट करने से जांच एजेंसियां असली अपराधियों तक जल्दी पहुंच सकती हैं और निर्दोष लोगों को कानूनी परेशानी से बचाया जा सकता है। जोधपुर का यह मामला आने वाले समय में साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की शुरुआत भी साबित हो सकता है।
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