Meesho को असेसमेंट ईयर 2023–24 के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी ने कहा है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे कानूनी रूप से चुनौती देगी। कंपनी के अनुसार इस नोटिस का उसके बिजनेस या ऑपरेशन्स पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। वहीं हाल ही में जारी तिमाही नतीजों में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर 491 करोड़ रुपये हो गया, हालांकि रेवेन्यू 32% बढ़कर 3,517 करोड़ रुपये पहुंच गई।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho को असेसमेंट ईयर 2023–24 के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी ने 7 मार्च को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी और कहा कि वह इस ऑर्डर को चुनौती देगी।
कंपनी के मुताबिक यह डिमांड Income Tax Act की धारा 143(3) के तहत जारी असेसमेंट ऑर्डर और धारा 156 के तहत डिमांड नोटिस के जरिए जारी की गई है। फाइलिंग के अनुसार टैक्स विभाग ने कुल 1,499,73,82,840 रुपये की डिमांड उठाई है, जिसमें लागू ब्याज भी शामिल है।
Meesho का कहना है कि वह असेसमेंट ऑर्डर में की गई टिप्पणियों और एडजस्टमेंट से सहमत नहीं है और इस डिमांड को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने यह भी बताया कि इस आदेश का उसकी वित्तीय स्थिति, ऑपरेशन्स या अन्य गतिविधियों पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
पहले भी हुआ था टैक्स विवाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने बताया कि इससे पहले असेसमेंट ईयर 2022–23 के लिए भी इसी तरह का डिमांड ऑर्डर जारी किया गया था, जिसकी जानकारी कंपनी ने अपने प्रॉस्पेक्टस में दी थी। यह मामला फिलहाल कर्नाटक हाई कोर्ट में लंबित है। अदालत ने 17 अप्रैल 2025 को डिमांड नोटिस पर अंतरिम रोक (interim stay) लगा दी थी।
यह टैक्स नोटिस ऐसे समय आया है जब कंपनी ने हाल ही में दिसंबर तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें घाटा काफी बढ़ गया। Q3 में Meesho का नेट लॉस करीब 12 गुना बढ़कर 491 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 37.4 करोड़ रुपये था।
हालांकि कंपनी की रेवेन्यू 32% बढ़कर 3,517.6 करोड़ रुपये पहुंच गई। कंपनी के खर्च रेवेन्यू से ज्यादा तेजी से बढ़े, जिससे घाटा बढ़ गया, जबकि ऑर्डर और यूजर्स की संख्या में लगातार वृद्धि जारी रही। सालाना ट्रांजैक्ट करने वाले यूजर्स 34% बढ़कर 251 मिलियन हो गए
2015 में हुई थी कंपनी की शुरुआत Meesho की स्थापना 2015 में Vidit Aatrey और Sanjeev Barnwal ने की थी। कंपनी एक value commerce marketplace चलाती है, जो छोटे विक्रेताओं को प्लेटफॉर्म देती है और खास तौर पर Tier-II और छोटे शहरों के ग्राहकों पर फोकस करती है। कंपनी का कहना है कि वह टैक्स डिमांड के खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी और अपने बिजनेस ऑपरेशन्स सामान्य रूप से जारी रखेगी।
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