Siddaramaiah ने घोषणा की है कि Karnataka में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य मोबाइल और सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को कम करना है। सरकार स्कूल-कॉलेजों में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कदम भी उठाएगी। साथ ही शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए 15,000 शिक्षक पद भरे जाएंगे, स्कूलों के विकास, मेंटेनेंस और स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ काउंसलिंग पर भी बजट खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में 16 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगाया जाएगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक, जहां टेक हब बेंगलुरु है, ने 16 साल से कम उम्र के लोगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगाने का फैसला किया है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा करने वाले वे भारत के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चों पर मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के कुप्रभाव को रोकने के मकसद से, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में 16 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगाया जाएगा।
साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। विधानसभा में बजट 2026–27 पेश करते समय उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्कूलों और कॉलेजों में खाली पड़े 15 हजार शिक्षक पद अगले वित्त वर्ष में भरे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकारी प्राइमरी, हाई स्कूल और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में नए कमरे बनाने और मरम्मत के लिए 565 करोड़ रुपये, टॉयलेट बनाने के लिए 75 करोड़ रुपये और स्कूलों में फर्नीचर खरीदने के लिए 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
सदन में उन्होंने बताया कि 125 करोड़ रुपये सरकारी प्राइमरी स्कूल, हाई स्कूल और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के मेंटेनेंस पर खर्च किए जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स की हेल्थ, कैरेक्टर और भविष्य बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इसलिए सरकार कैंपस में ड्रग्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए अवेयरनेस और एजुकेशनल कैंपेन, सख्त अनुशासन और सपोर्ट व काउंसलिंग सेंटर बनाने जैसे कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि “उत्तम कालिके, उज्ज्वल भविष्य” (बेहतर लर्निंग, ब्राइटर फ्यूचर) के नारे के साथ 800 स्कूलों को कर्नाटक पब्लिक स्कूल (KPS) में अपग्रेड किया जाएगा।
इससे एक ही छत के नीचे अच्छी क्वालिटी की एजुकेशन देना आसान होगा। इसके लिए अगले तीन सालों में करीब 3,900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्टूडेंट्स का स्ट्रेस कम करने और उनकी मेंटल हेल्थ बेहतर बनाने के लिए हर 204 ब्लॉक रिसोर्स सेंटर में एक क्वालिफाइड मेंटल हेल्थ काउंसलर अपॉइंट किया जाएगा।
सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बाइलिंगुअल क्लास शुरू करने और टीचरों की क्षमता बढ़ाने के लिए 24 करोड़ रुपये की लागत से एक इंग्लिश लैंग्वेज ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा।
विद्या विकास स्कीम के तहत प्री-प्राइमरी स्टूडेंट्स को एक्टिविटी बुक्स, क्लास 1 से 10 तक के स्टूडेंट्स को वैल्यू एजुकेशन बुक्स और प्री-यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को 2026–27 तक फ्री टेक्स्टबुक्स दी जाएंगी।
इसके अलावा IIT धारवाड़ के साथ मिलकर AI टेक्नोलॉजी की मदद से एक पर्सनलाइज्ड सेल्फ-लर्निंग डिजिटल ट्यूटर सुविधा शुरू की जाएगी। यह सुविधा क्लास 8 से 12 तक के करीब 12.28 लाख स्टूडेंट्स को लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से उपलब्ध कराई जाएगी।
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