South China University of Technology के रिसर्चर्स ने रोबोट्स के लिए एक नया flexible capacitive sensor array विकसित किया है, जिससे रोबोट दूर की चीजों का पता लगाने के साथ-साथ हल्के टच को भी महसूस कर सकेंगे। यह सेंसर इंसानी आंखों से प्रेरित है और लगभग 90 mm से ज्यादा दूरी से वस्तुओं को पहचान सकता है। इससे भविष्य में रोबोट इंसानों के साथ ज्यादा सुरक्षित और स्मार्ट तरीके से काम कर पाएंगे। 🤖
भविष्य के रोबोट्स को इंसानों के लिए और भी उपयोगी बनाने के लिए South China University of Technology के रिसर्चर्स ने एक नया flexible capacitive sensor array डेवलप किया है। इससे रोबोट्स दूर की चीजों का भी पता लगा पाएंगे। आने वाले समय में इंसानों का ज्यादातर काम रोबोट्स करेंगे।
रोबोट्स को और ज्यादा उपयोगी और स्मार्ट बनाने के लिए कंपनियां अलग-अलग टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। भविष्य में इंसानों के साथ मिलकर काम करने के लिए रोबोट्स में दो तरह की sensing capabilities होना जरूरी होगा। रोबोट्स को दूर से आने वाले लोगों का पता लग जाना चाहिए और हल्के से टच का एहसास भी होना जरूरी है।
इन दोनों क्षमताओं को एक ही सेंसर में जोड़ना काफी मुश्किल है, लेकिन इंजीनियरों ने इसे संभव कर दिखाया है। बताया गया है कि छोटे electrodes बहुत कम दूरी से चीजों का पता लगा सकते हैं, जबकि बड़े electrodes ज्यादा दूरी से वस्तुओं को महसूस कर सकते हैं।
South China University of Technology के रिसर्चर्स का कहना है कि उन्होंने एक नए flexible capacitive sensor array की मदद से इस कमी को दूर कर लिया है। यह सेंसर अपने आसपास के माहौल को समझने की क्षमता को तेज बनाता है। यह सिस्टम किसी रोबोट को दूर की चीजों का पता लगाने में मदद करता है।
साथ ही अगर कोई चीज संपर्क में आती है, तो उसका भी तुरंत पता चल जाता है। इस डिजाइन में electrode array के ऊपर एक shielding layer लगाई गई है। इलेक्ट्रोड के जुड़ने और ढके होने के तरीके को बदलकर यह सिस्टम काम करता है, बिना इलेक्ट्रोड के आकार को बदले।
रिसर्चर्स का कहना है कि यह आइडिया इंसानी आंखों से आया है। इंसानी आंख अलग-अलग हालात के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेती है। जब हम किसी किताब पर ध्यान लगाते हैं तो आंखों की पुतलियां सिकुड़ जाती हैं, ताकि बारीक डिटेल साफ दिखे।
और जब हम अंधेरी या दूर की सड़क देखते हैं तो पुतलियां फैल जाती हैं, ताकि ज्यादा रोशनी अंदर आ सके। इसी लॉजिक को electric fields पर लागू किया गया। जब shielding layer सेंसिंग एरिया को छोटा कर देती है, तब सिस्टम अलग-अलग सेंसिंग यूनिट्स पर फोकस करता है।
इससे रोबोट बहुत हल्के स्पर्श को भी महसूस कर सकता है। यह मोड तब काम आता है जब रोबोट को नाजुक चीजें पकड़नी हों या छोटी चीजों के किनारों की पहचान करनी हो। इससे रोबोट को संपर्क में आने से पहले ही पास आ रही चीजों का पता चल जाता है।
टेस्ट के दौरान इस सेंसर ने 90mm से ज्यादा दूरी से आ रही चीजों का पता लगा लिया। यह दूरी भले ही कम लगे, लेकिन यह इतनी काफी है कि एक robotic arm किसी व्यस्त माहौल में काम कर रहे इंसान से टकराने से पहले ही रुक जाए। इन समस्याओं का समाधान होने से रोबोट और भी ज्यादा उपयोगी हो जाएंगे।
भविष्य में आने वाले रोबोट्स पहले से ज्यादा स्मार्ट और सुरक्षित होंगे।
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