विधानसभा में बहस: बजट सत्र के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, जल संकट, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी चर्चा हुई। निजी बसों का चक्का जाम: करीब 30,000 निजी बस ऑपरेटर हड़ताल की चेतावनी दे रहे हैं, जिससे लगभग 12 लाख यात्रियों की रोज़ाना यात्रा प्रभावित हो सकती है। मौसम में सुधार: कई जिलों में बारिश रुकने और धूप निकलने से लोगों और किसानों को राहत मिली, हालांकि कुछ जगह हल्की बारिश की संभावना अभी भी बनी हुई है।
जयपुर। राजस्थान में इन दिनों राजनीति, परिवहन और मौसम से जुड़ी तीन अहम खबरें चर्चा में हैं। एक तरफ विधानसभा के बजट सत्र में महंगाई, बेरोजगारी और जल संकट जैसे मुद्दों पर तीखी बहस हुई, वहीं निजी बस ऑपरेटरों के संभावित चक्का जाम से लाखों यात्रियों की चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच राज्य के कई जिलों में बारिश रुकने और धूप निकलने से आम लोगों और किसानों को कुछ राहत मिली है। जयपुर में चल रहे राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण में राज्य की आर्थिक स्थिति, कानून–व्यवस्था, जल संकट और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए।
2 मार्च से शुरू हुए इस चरण में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के बाद अलग-अलग विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा जारी है। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए महंगाई, बेरोजगारी और पेयजल संकट को बड़ा मुद्दा बताया।
कई विधायकों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में कई पेयजल योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जबकि शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है। साथ ही युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार अवसर उपलब्ध न होने की बात भी उठाई गई।
सरकार की ओर से वित्त और योजना विभाग ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में पूंजीगत निवेश बढ़ा है और नई औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन देने के लिए जमीन और कर में रियायतें दी जा रही हैं। साथ ही कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कानून–व्यवस्था के मुद्दे पर भी सदन में चर्चा हुई, जिसमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई। गृह विभाग ने बताया कि पुलिस बल में नई भर्तियां की जा रही हैं और साइबर थानों की संख्या बढ़ाने की योजना है।
राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी मांगों को लेकर राज्यव्यापी चक्का जाम की चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में करीब 30,000 बसें शामिल हो सकती हैं, जिससे रोज़ाना यात्रा करने वाले लगभग 12 लाख यात्रियों पर असर पड़ सकता है।
बस ऑपरेटरों की मुख्य मांगों में टैक्स ढांचे में राहत, टोल शुल्क में कमी, डीज़ल पर सब्सिडी और पुराने वाहनों के लिए नीति में नरमी शामिल है। उनका कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें और टैक्स का बोझ परिवहन व्यवसाय को घाटे में धकेल रहा है।
राज्य सरकार ने अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया है, लेकिन परिवहन विभाग और बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। अगर समझौता नहीं हुआ और बसें बंद रहीं तो गांवों से शहरों तक रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी यात्राओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबे रूट की बसें बंद हुईं तो दिल्ली, गुजरात और दूसरे राज्यों के लिए यात्रा भी प्रभावित हो सकती है और रेलवे टिकटों पर दबाव बढ़ सकता है। राजस्थान के कई हिस्सों में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद अब मौसम में सुधार देखने को मिल रहा है।
चूरू और गंगानगर सहित उत्तरी जिलों में धूप निकलने से लोगों को ठंड और नमी से राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के असर से हुई थी, जो अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना अभी भी बनी रह सकती है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे गेहूं और सरसों जैसी फसलों में पानी भराव से बचाने के लिए खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें। बारिश की वजह से कई ग्रामीण सड़कों पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन गई थी, जिसे ठीक करने के लिए प्रशासन ने मरम्मत और सफाई का काम शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी मौसम बदलने के कारण सर्दी-जुखाम और वायरल संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि कई सरकारी अस्पतालों में OPD में मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है। इन तीनों घटनाओं का आम जनता पर अलग-अलग असर पड़ सकता है।
विधानसभा के बजट सत्र में लिए जाने वाले फैसले राज्य की आर्थिक नीतियों और रोजगार योजनाओं को प्रभावित करेंगे। वहीं निजी बसों के संभावित चक्का जाम से यात्रा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर मौसम में सुधार से लोगों के रोज़मर्रा के कामकाज में आसानी होगी, हालांकि कुछ क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान से किसानों की आर्थिक चिंता अभी भी बनी रह सकती है।
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