अंटार्कटिका और उप-अंटार्कटिक क्षेत्रों में पाया जाने वाला जेंटू पेंगुइन दुनिया का सबसे तेज तैरने वाला पक्षी है। यह पानी के नीचे 36 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर सकता है और 210 मीटर की गहराई तक गोता लगाने में सक्षम है। अपनी खास शारीरिक बनावट की बदौलत यह पक्षी किसी भी इंसानी तैराक से कहीं ज्यादा तेज तैरता है।
प्रकृति ने हर जीव को जीवित रहने के लिए कोई न कोई बेजोड़ खूबी बख्शी है। जहां अधिकांश पक्षी आसमान की ऊंचाइयों को नापने के लिए जाने जाते हैं, वहीं पेंगुइन प्रजाति ने लाखों वर्षों के विकासवादी सफर में हवा में उड़ने की अपनी क्षमता को त्याग दिया।
इस समझौते के बदले उन्हें पानी की गहराइयों में तैरने का ऐसा हुनर मिला, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में नहीं मिलती। इस बिरादरी में सबसे आगे नाम आता है जेंटू पेंगुइन (Pygoscelis papua) का, जिसे आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे तेज तैरने वाला पक्षी होने का गौरव हासिल है।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह बर्फीला तैराक पानी में 36 किलोमीटर प्रति घंटा (लगभग 22 मील प्रति घंटा) की विस्फोटक रफ्तार पकड़ सकता है।
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इस रफ्तार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जब दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट ने बीजिंग ओलंपिक में 100 मीटर दौड़ का विश्व रिकॉर्ड बनाया था, तब उनकी औसत गति लगभग 37 किमी/घंटा थी। यानी पानी के कड़े प्रतिरोध के बावजूद यह परिंदा जमीन पर दौड़ने वाले इंसानों की शीर्ष गति से तैरता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जेंटू पेंगुइन की इस असाधारण तैराकी क्षमता के पीछे उनकी शारीरिक संरचना (एनाटॉमी) का सबसे बड़ा हाथ है:
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आकार के मामले में जेंटू पेंगुइन, एम्परर (सम्राट) और किंग (राजा) पेंगुइन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी पेंगुइन प्रजाति है। एक वयस्क जेंटू की लंबाई औसतन 75 से 90 सेंटीमीटर (29 से 35 इंच) और वजन 4.5 से 8.5 किलोग्राम तक होता है। इन्हें पहचानना बेहद आसान है:
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जेंटू पेंगुइन 'जनरलिस्ट' शिकारी होते हैं, यानी वे मौसम और उपलब्धता के हिसाब से आहार चुनते हैं। इनका मुख्य भोजन क्रिल (एक प्रकार का छोटा झींगा), छोटी मछलियां और स्क्विड हैं। अपनी तूफानी रफ्तार की बदौलत वे सबसे तेज तैरने वाले शिकार को भी आसानी से दबोच लेते हैं।
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भोजन जुटाने का इनका तरीका भी अनोखा है। वे पहले 4 मीटर तक के छोटे-छोटे टोह लेने वाले गोते लगाते हैं और फिर 80 मीटर (260 फीट) की गहराई तक उतरते हैं। एक जेंटू पेंगुइन भोजन की तलाश में दिनभर में 450 बार तक गोता लगा सकता है। वैज्ञानिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इनका सबसे गहरा गोता 210 मीटर (688 फीट) दर्ज किया गया है, और वे पानी के भीतर लगातार 7 मिनट तक सांस रोक सकते हैं।
समंदर के भीतर जेंटू पेंगुइन का मुख्य शिकार लेपर्ड सील और किलर व्हेल (ऑर्का) जैसी खतरनाक शिकारी करती हैं। इन घातक शिकारियों से बचने के लिए जेंटू अपनी रफ्तार के साथ-साथ 'पोरपोइसिंग' तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। वे डॉल्फिन की तरह तैरते हुए बार-बार पानी की सतह से हवा में ऊंची छलांग लगाते हैं। यह हरकत उनकी गति को बनाए रखती है, उन्हें सांस लेने में मदद करती है और पीछा कर रहे शिकारी को भ्रमित कर देती है।
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वहीं जमीन पर, इनके घोंसलों में रखे अंडों और नन्हें चूजों को बड़े समुद्री पक्षियों जैसे साउदर्न जाइंट पेट्रेल, स्कुआ और शीथबिल से लगातार खतरा रहता है। बच्चे की सुरक्षा के लिए नर और मादा पेंगुइन बेहद आक्रामक हो जाते हैं। वे हवा से हमला करने वाले परभक्षियों पर अपनी सख्त फ्लिपर्स से जोरदार थप्पड़ मारते हैं और तेज आवाजें निकालकर उन्हें भगा देते हैं।
जेंटू पेंगुइन अधिकांश पक्षियों की तरह मौसमी प्रवास (माइग्रेशन) नहीं करते, बल्कि सर्दियों में भी अपनी कॉलोनियों के आसपास ही रहते हैं। इनका प्रजनन चक्र बेहद दिलचस्प है:
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अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में जेंटू पेंगुइन को फिलहाल 'लीस्ट कंसर्न' (Least Concern) यानी सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है और इनकी आबादी स्थिर मानी जाती है।
हालांकि, दक्षिणी महासागर में अंटार्कटिक क्रिल का अत्यधिक व्यावसायिक शिकार (ओवरफिशिंग) और जलवायु परिवर्तन इनके भोजन चक्र को प्रभावित कर रहा है।
अंटार्कटिक और दक्षिणी महासागर गठबंधन (ASOC) जैसी वैश्विक संस्थाएं इनके आवास और भोजन को सुरक्षित रखने के लिए अंटार्कटिक प्रायद्वीप में समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (Marine Protected Areas) को कड़ाई से लागू करने की मांग कर रही हैं।
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