विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक 63 देशों ने कम से कम एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी (NTD) का पूरी तरह उन्मूलन कर दिया है, जो साल 2020 के अंत में 42 थी। स्लीपिंग सिकनेस के मामलों में 98 फीसदी की भारी गिरावट आई है और गिनी वर्म के मामले घटकर रिकॉर्ड 10 रह गए हैं। हालांकि, फंडिंग में आई कमी और डेंगू के बढ़ते रिकॉर्ड मामलों ने 2030 के वैश्विक लक्ष्यों पर चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों (Neglected Tropical Diseases - NTD) के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक ऐतिहासिक प्रगति की घोषणा की है।
डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मध्यावधि मूल्यांकन (Midterm Assessment) रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक दुनिया भर के 63 देशों ने सफलतापूर्वक कम से कम एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी का पूरी तरह उन्मूलन (Elimination) कर लिया है। साल 2020 के अंत तक ऐसे देशों की संख्या महज 42 थी।
यह रिपोर्ट 2021 से 2030 के लिए तय किए गए 'एनटीडी रोडमैप' के बीच की स्थिति का आकलन करती है। रिपोर्ट दर्शाती है कि समन्वित स्वास्थ्य अभियानों, मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) और निगरानी प्रणालियों के दम पर दुनिया के कई विकासशील और पिछड़े क्षेत्रों में दशकों से जारी बीमारियों को जड़ से खत्म करने में अभूतपूर्व सफलता मिली है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयसस (Dr. Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने इस उपलब्धि को वैश्विक स्वास्थ्य की असाधारण सफलता बताया। उन्होंने अपने बयान में कहा, "उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों का उन्मूलन ग्लोबल हेल्थ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।"
इसके साथ ही उन्होंने भविष्य के प्रति आगाह करते हुए कहा, "हमने बड़ी मेहनत से जो बढ़त हासिल की है, वह आसानी से खो भी सकती है। इसलिए देशों और साझेदारों को पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ना होगा।
इसके लिए घरेलू वित्तीय पोषण (Domestic Financing) को बढ़ाना, बाहरी सहयोग को जारी रखना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में एनटीडी से जुड़ी सेवाओं को एकीकृत करना अनिवार्य है।
हमारा लक्ष्य केवल बीमारियों को खत्म करना ही नहीं, बल्कि हाशिए पर मौजूद समुदायों को विकलांगता, विकृति, अकाल मृत्यु और पीढ़ियों से चली आ रही गरीबी के दुष्चक्र से मुक्त कराना है।"
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, कई जानलेवा और लाइलाज समझी जाने वाली बीमारियों के मामलों में ऐतिहासिक कमी आई है:
सकारात्मक प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट में कई गंभीर चुनौतियों को भी उजागर किया गया है। जहां कुछ बीमारियां समाप्ति की ओर हैं, वहीं मच्छर और अन्य वाहकों (Vectors) से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है।
दूसरी सबसे बड़ी चिंता वित्तीय संसाधनों की भारी कमी है। डब्ल्यूएचओ ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों के लिए मिलने वाले बजट और फंडिंग में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधन कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत नीचे बने हुए हैं। फंडिंग की इस भारी कमी के चलते वर्ष 2030 के लिए तय किए गए कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों के छूटने का जोखिम पैदा हो गया है।
Q1. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार कितने देशों ने एनटीडी को खत्म किया है?
जून 2026 तक दुनिया के 63 देशों ने कम से कम एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी का सफलतापूर्वक उन्मूलन कर दिया है।
Q2. गिनी वर्म और स्लीपिंग सिकनेस के मामलों में कितनी गिरावट आई है?
स्लीपिंग सिकनेस के मामलों में 1999 से अब तक 98% की गिरावट आई है, जबकि साल 2025 में गिनी वर्म के दुनिया भर में केवल 10 मामले सामने आए।
Q3. उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
फंडिंग का कोविड-पूर्व स्तर से 30% कम होना, डेंगू के रिकॉर्ड 1.51 करोड़ मामले और वेक्टर-जनित बीमारियों से होने वाली मौतों में वृद्धि सबसे बड़ी चिंताएं हैं।
Q4. कितने लोगों को अब एनटीडी के इलाज या देखभाल की जरूरत है?
साल 2024 तक एनटीडी के खिलाफ स्वास्थ्य हस्तक्षेप की जरूरत वाले लोगों की संख्या घटकर 1.41 अरब रह गई है, जो 2010 से 36% कम है।
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