अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को दी जाने वाली सालाना करीब 4 अरब डॉलर की सहायता बंद करने का ऐलान किया है। मध्यावधि चुनाव के दिन फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि इजरायल अब आर्थिक व सैन्य रूप से इतना सक्षम है कि उसे अमेरिकी मदद पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अमेरिका अपने इस सहयोगी देश को आधुनिक हथियारों और रक्षा उपकरणों की बिक्री पहले की तरह जारी रखेगा।
वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल के दशकों पुराने कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों में एक अभूतपूर्व मोड़ देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका इजरायल को हर साल दी जाने वाली लगभग चार अरब डॉलर की विदेशी सहायता को बंद करने की दिशा में कदम उठाएगा। ट्रंप के अनुसार, इजरायल अब अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिकी खजाने की सहायता पर निर्भर रहने की स्थिति से बाहर निकल चुका है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के दिन 'फॉक्स न्यूज' के कार्यक्रम 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स' में बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बात कही। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इजरायल को मिलने वाली इस मदद को लेकर अमेरिकी घरेलू राजनीति में लगातार विवाद खड़ा किया जाता है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और वामपंथी धड़े इस सहायता के बहाने रिपब्लिकन नेताओं पर सवाल उठाते हैं। ट्रंप ने मिशिगन के सीनेट प्रत्याशी अब्दुल अल-सईद का भी उदाहरण दिया, जो इजरायल को मिलने वाली मदद के कड़े आलोचक रहे हैं।
वर्तमान में इजरायल को मिलने वाली यह आर्थिक व सैन्य मदद वर्ष 2016 में तय 10-वर्षीय द्विपक्षीय समझौते (MOU) के तहत दी जाती है, जो तत्कालीन ओबामा प्रशासन के दौरान हुआ था। वित्त वर्ष 2019 से 2028 तक प्रभावी इस समझौते का कुल बजट 38 अरब डॉलर है, जिसमें औसतन 3.8 अरब डॉलर सालाना (33 अरब डॉलर विदेशी सैन्य वित्तपोषण और 5 अरब डॉलर मिसाइल डिफेंस के लिए) का प्रावधान है।
यह सहायता सीधे अमेरिकी कांग्रेस (संसद) द्वारा फंड पास किए जाने पर निर्भर करती है। चूंकि वर्तमान समझौता 2028 तक वैध है, इसलिए 2027 या उससे पहले इस सहायता को समाप्त करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से मंजूरी और कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी। इसे पूरी तरह लागू करने से पहले दोनों देशों के बीच नई कूटनीतिक शर्तों पर काम करना होगा।
ट्रंप ने साफ किया कि वित्तीय सहायता रोकने का मतलब दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों का अंत नहीं है। इजरायल अमेरिकी रक्षा कंपनियों से हथियार और उन्नत रक्षा प्रणालियां खरीदना जारी रख सकेगा।
अब तक की व्यवस्था में अमेरिकी सैन्य सहायता की बड़ी रकम वापस अमेरिकी रक्षा कंपनियों के पास ही हथियारों की खरीद के रूप में लौटती थी। सहायता बंद होने पर इजरायल को अपने घरेलू बजट से इन हथियारों की खरीद करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि इससे इजरायल पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, लेकिन दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक और हथियारों का रणनीतिक व्यापार जारी रहेगा।
ट्रंप के दावे के अनुसार, इस विषय पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से पहले भी चर्चा हुई थी और वे इस दिशा में आत्मनिर्भर बनने के पक्षधर रहे हैं। नेतन्याहू ने भी पूर्व में अमेरिकी सहायता पर निर्भरता को धीरे-धीरे घटाने के संकेत दिए थे।
हालांकि, इस घोषणा के सामने आते ही इजरायल के विपक्षी खेमे में खलबली मच गई है। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट ने चिंता जताते हुए कहा कि रक्षा प्रतिष्ठान को रणनीतिक बदलावों की जानकारी मीडिया से मिलना गंभीर बात है। वहीं, विपक्षी नेता यायर गोलान ने चेतावनी दी कि कई मोर्चों पर जारी संघर्षों के बीच अचानक अमेरिकी सहायता बंद होने से देश की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
1. ट्रंप ने इजरायल की सहायता बंद करने को लेकर क्या कहा है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका इजरायल को सालाना दी जाने वाली लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता बंद करने जा रहा है, क्योंकि इजरायल अब इस पर निर्भर नहीं है।
2. क्या अमेरिका इजरायल को हथियार देना भी बंद कर देगा?
नहीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि केवल सहायता (अनुदान) बंद करने पर विचार हो रहा है, जबकि इजरायल को आधुनिक हथियार और सैन्य साजो-सामान की बिक्री पहले की तरह जारी रहेगी।
3. अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य सहायता का मौजूदा समझौता क्या है?
2016 में बराक ओबामा प्रशासन के तहत 10 साल (2019 से 2028 तक) के लिए 38 अरब डॉलर का सैन्य समझौता हुआ था, जिसके तहत इजरायल को औसतन 3.8 अरब डॉलर सालाना मिलते हैं।
4. ट्रंप ने इस फैसले के पीछे क्या मुख्य कारण बताया?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी घरेलू राजनीति में डेमोक्रेट्स इस सहायता को लेकर रिपब्लिकन पार्टी पर निशाना साधते हैं। साथ ही, इजरायल अब खुद सक्षम देश बन चुका है।
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