देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श ने कहा है कि ऊंचे एयरपोर्ट शुल्क और भारी करों के कारण भारतीय एयरलाइंस भारी वित्तीय दबाव झेल रही हैं। विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी के चलते इंडिगो को सितंबर तिमाही में 1,879.1 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए कंपनी को हवाई किराए बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
देश के एविएशन सेक्टर में बढ़ती लागत, महंगे ईंधन और घटते मुनाफे को लेकर अब सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने खुलकर चिंता जाहिर की है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श ने कहा कि भारत में हवाई अड्डों के संचालन शुल्क (एयरपोर्ट चार्ज) और एविएशन सेक्टर पर लगने वाले टैक्स अत्यधिक ऊंचे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इन शुल्कों और टैक्स में कटौती की जाए, तो भारतीय विमानन बाजार कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और यात्रियों के लिए भी सफर अधिक किफायती बन सकता है।
विली वॉल्श ने अगस्त में इंडिगो की कमान संभालने के बाद अपनी पहली व्यक्तिगत प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय हवाई अड्डों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। वॉल्श ने कहा, "एयरपोर्ट्स प्रभावी रूप से एकाधिकार (मोनोपॉली) की तरह काम करते हैं। हम लगातार उनसे यही उम्मीद करते हैं कि वे अपनी सेवाओं के दाम तय करने में अधिक प्रतिस्पर्धी बनें।"
अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) के महानिदेशक के अपने पिछले कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के टैक्स ढांचे और एयरपोर्ट शुल्कों को लेकर उनके विचार आज भी नहीं बदले हैं। वॉल्श ने कहा, "कम टैक्स और कम एयरपोर्ट चार्ज ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। यदि भारत में विमानन क्षेत्र का विस्तार करना है, तो सभी अंशधारकों को अपनी लागत पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।"
इंडिगो के लिए यह बयान ऐसे समय आया है जब कंपनी वित्तीय मोर्चे पर कठिन दौर से गुजर रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की सितंबर तिमाही में इंडिगो को 1,879.1 करोड़ रुपये का बड़ा शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा है।
इस नुकसान की मुख्य वजह एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी रही है। मुद्रा में गिरावट की वजह से लीज रेंटल और विदेश में होने वाले मेंटेनेंस खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है।
इन चुनौतियों के बीच एयरलाइन को अपनी उड़ान क्षमता (कैपेसिटी) में भी कटौती करनी पड़ी है। इतना ही नहीं, 30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही में इंडिगो के यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि टिकट की ऊंची कीमतों के कारण यात्रियों की संख्या पर विपरीत असर पड़ा है।
ईंधन की मार झेल रही एयरलाइन के पास अब किराए बढ़ाने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। विली वॉल्श ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, "हमारे पास ईंधन बिल में हुई भारी बढ़ोतरी की भरपाई के लिए हवाई किराए बढ़ाने पर विचार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। मैं पिछले 47 वर्षों से इस विमानन उद्योग में काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा अभूतपूर्व संकट कभी नहीं देखा।"
वॉल्श के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले त्योहारी और शीतकालीन यात्रा सीजन में हवाई यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
तमाम चुनौतियों के बावजूद इंडिगो नेतृत्व भारत में लंबी अवधि के विकास को लेकर आशान्वित है। विली वॉल्श ने कहा कि नवी मुंबई में बन रहा नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एयरलाइन के लिए विकास के बड़े अवसर लेकर आएगा। उन्होंने बताया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को आंशिक रूप से नवी मुंबई शिफ्ट करने का निर्णय एयरलाइन और यात्रियों के व्यापक हित में लिया गया है।
इसके अलावा, एयरलाइन अपनी अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी (लॉन्ग-हॉल) उड़ानों के विस्तार के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी को 2028 की दूसरी तिमाही से आधुनिक वाइड-बॉडी एयरबस ए350 (A350) विमान मिलने शुरू हो जाएंगे। वॉल्श ने विश्वास जताया कि इंडिगो के पास लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी सफलता हासिल करने के सभी जरूरी संसाधन मौजूद हैं।
वर्तमान में इंडिगो भारतीय घरेलू विमानन बाजार के 65 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर काबिज है। कंपनी के पास 400 से अधिक विमानों का सक्रिय बेड़ा है और यह रोजाना 2,100 से 2,200 उड़ानों का संचालन करती है।
FREQUENTLY ASKED QUESTIONS — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्र. 1. इंडिगो के सीईओ विली वॉल्श ने सरकार और एयरपोर्ट्स से क्या मांग की है?
उ. विली वॉल्श ने मांग की है कि एयरपोर्ट संचालन शुल्क और विमानन क्षेत्र पर लगने वाले भारी टैक्स में कमी की जाए, ताकि एयरलाइंस की परिचालन लागत घट सके और बाजार तेजी से बढ़ सके।
प्र. 2. इंडिगो को सितंबर तिमाही में कितना घाटा हुआ है और क्यों?
उ. इंडिगो को सितंबर तिमाही में 1,879.1 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगा विमान ईंधन (ATF) और डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना रहा।
प्र. 3. क्या आने वाले दिनों में हवाई टिकट के दाम बढ़ सकते हैं?
उ. हां, सीईओ विली वॉल्श के अनुसार बढ़ते ईंधन खर्च की भरपाई के लिए एयरलाइन के पास हवाई किराए में बढ़ोतरी करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
प्र. 4. इंडिगो को अपने वाइड-बॉडी एयरबस A350 विमान कब तक मिलने की उम्मीद है?
उ. इंडिगो को लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अपने नए एयरबस A350 विमानों की पहली खेप वर्ष 2028 की दूसरी तिमाही से मिलने की उम्मीद है।
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