सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा लिवाली देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिकॉर्ड तिमाही मुनाफे, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा उछल गया और निफ्टी ने 23,300 के स्तर को मजबूती से पार कर लिया।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजारों ने धमाकेदार शुरुआत की। पिछले हफ्ते के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बाजारों में बिकवाली के दबाव को पीछे छोड़ते हुए घरेलू बाजार में शुरुआती कारोबार से ही आक्रामक खरीदारी का माहौल बना रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1,003.31 अंक यानी 1.35 प्रतिशत की छलांग लगाकर 75,462.84 के स्तर पर पहुंच गया।
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वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 271.85 अंक यानी 1.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,324.95 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इस जोरदार तेजी से निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।
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बाजार में आई इस ऐतिहासिक तेजी का सबसे बड़ा श्रेय देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) को जाता है। सितंबर तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 40.6 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट में रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल मार्जिन में हुए सुधार के साथ-साथ रिलायंस जियो के निरंतर मजबूत प्रदर्शन ने बाजार की धारणा को पूरी तरह बदल दिया। इस घोषणा के बाद रिलायंस के शेयरों में शुरुआती सत्र में ही 6 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया और शेयर 1,232.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
यह जनवरी 2024 के बाद से रिलायंस का सबसे बेहतरीन इंट्राडे प्रदर्शन माना जा रहा है।
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में गिरावट सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मार्जिन के लिए राहत लेकर आती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 3.17 प्रतिशत टूटकर 109.82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया, जो पिछले सप्ताह 118 डॉलर के छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक बातचीत जारी रहने की खबरों से मध्य-पूर्व में तनाव घटने की उम्मीदें बनी हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में दबाव कम हुआ है।
तेल की कीमतों में नरमी से भारत के चालू खाता घाटे (CAD) और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
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विदेशी संस्थागत निवेशक जो पिछले कुछ समय से भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे थे, वे अब फिर से लिवाली करते दिख रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में 3,598.54 करोड़ रुपये मूल्य के इक्विटी शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। पिछले 10 कारोबारी सत्रों में से 6 सत्रों में विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार रहे हैं, जिससे बाजार को तकनीकी तौर पर निचली सतह पर मजबूत सहारा मिला है।
घरेलू मांग की मजबूती को ऑटो कंपनियों के मासिक बिक्री आंकड़ों ने और पुख्ता किया है। अक्टूबर महीने के बिक्री आंकड़े काफी उत्साहजनक रहे, जिसमें देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने कुल बिक्री में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की।
नतीजतन, मारुति के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के मजबूत नतीजों और एनटीपीसी, टाटा स्टील तथा पावर ग्रिड जैसे हेवीवेट शेयरों में संस्थागत खरीदारी से बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) बेहद मजबूत रही।
शुक्रवार को अमेरिकी वॉल स्ट्रीट पर बड़ी टेक कंपनियों के एआई निवेश को लेकर उपजी चिंताओं के कारण नैस्डैक 2.8 प्रतिशत टूटा था, लेकिन सोमवार को एशियाई बाजारों ने परिपक्वता दिखाई।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट से उबरकर हरे निशान में आया, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक वार्ताओं की प्रगति ने जोखिम लेने की क्षमता (रिस्क-ऑन सेंटिमेंट) को बढ़ाया है।
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एक्सिस एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीनियर इक्विटी फंड मैनेजर सचिन रेलेकर के अनुसार, मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वास्तविक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रहने का अनुमान है। कॉरपोरेट अर्निंग्स में लचीलापन और अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव के चलते एक साल पहले की तुलना में वर्तमान रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो काफी बेहतर स्थिति में है, जिससे घरेलू और विदेशी फंड मैनेजर्स गिरावट पर खरीदारी करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
शुरुआती कारोबार में बाजार का रुख पूरी तरह से तेजी के पक्ष में रहा। निफ्टी 50 के 38 शेयर बढ़त के साथ और केवल 11 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।
FREQUENTLY ASKED QUESTIONS — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्र. 1. आज भारतीय शेयर बाजार में इतनी बड़ी तेजी की मुख्य वजह क्या है?
उ. आज की तेजी के मुख्य कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज के उम्मीद से कहीं बेहतर सितंबर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा की गिरावट, विदेशी निवेशकों (FIIs) की 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी और सकारात्मक एशियाई बाजार हैं।
प्र. 2. रिलायंस इंडस्ट्रीज के नतीजों में ऐसा क्या खास रहा जिससे शेयर 6% उछला?
उ. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सितंबर तिमाही में शुद्ध लाभ में 40.6 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी के रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल (O2C) मार्जिन में शानदार रिकवरी और जियो के स्थिर प्रदर्शन ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
प्र. 3. कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय शेयर बाजार को क्या फायदा होता है?
उ. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड सस्ता होने से भारत का आयात बिल घटता है, रुपये को स्थिरता मिलती है, महंगाई का दबाव कम होता है और ट्रांसपोर्ट व पेंट जैसी कंपनियों के इनपुट लागत में कमी आती है।
प्र. 4. क्या अमेरिकी बाजारों की गिरावट का असर घरेलू बाजार पर नहीं पड़ा?
उ. अमेरिकी बाजारों में टेक कंपनियों के भारी खर्च को लेकर नैस्डैक गिरा था, लेकिन भारत में मजबूत घरेलू आय, ऑटो बिक्री के अच्छे आंकड़े और 7% से अधिक जीडीपी वृद्धि के अनुमानों ने वैश्विक दबाव को बेअसर कर दिया।
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