केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोल निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है। वहीं, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की गई है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
नई दिल्ली: त्योहारी सीजन के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर 'शून्य' कर दिया गया है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार के समीकरणों को देखते हुए डीजल और विमान ईंधन यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर टैक्स की दरों में इजाफा किया गया है।
वित्त मंत्रालय द्वारा 31 अक्टूबर की देर शाम जारी अधिसूचना के मुताबिक, ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं और अगले दो हफ्तों तक प्रभावी रहेंगी। सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और रिफाइनरियों के मुनाफे की समीक्षा कर इन दरों को संशोधित करती है।
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सरकार के इस संशोधन से पहले तक पेट्रोल के निर्यात पर 2.50 रुपये प्रति लीटर की दर से एक्सपोर्ट ड्यूटी लग रही थी, जिसे अब पूरी तरह हटाकर 0 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसके उलट, डीजल के निर्यात पर लगने वाले कर में तेज बढ़ोतरी की गई है। निर्यात किए जाने वाले डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को मिलाकर लगने वाली कुल लेवी को 8.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी डीजल निर्यातकों को अब प्रति लीटर 3 रुपये अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा।
वहीं, विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को 10.50 रुपये प्रति लीटर से मामूली रूप से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
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अधिकारियों के मुताबिक, टैक्स ढांचे में यह फेरबदल अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर किया गया है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों के मार्जिन में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल और एविएशन फ्यूल के क्रैक स्प्रेड (रिफाइनिंग मार्जिन) मजबूत बने हुए हैं, जिससे कंपनियों को निर्यात पर अतिरिक्त लाभ मिल रहा था। इसी मुनाफे को संतुलित करने के लिए इन ईंधनों पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया गया है, जबकि पेट्रोल पर मार्जिन में कमी आने के कारण उस पर से ड्यूटी हटा ली गई है।
इस फैसले के बाद आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पेट्रोल पंपों पर तेल के दाम बदलेंगे? इस पर वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
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यह बदलाव पूरी तरह से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात (Export) पर लागू होता है। घरेलू बाजार में आम उपभोक्ताओं के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) या वैट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए देश के खुदरा बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम जस के तस बने रहेंगे। आम उपभोक्ता पर इस फैसले का सीधा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
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विंडफॉल टैक्स (Windfall Profit Tax) वह विशेष शुल्क होता है, जिसे सरकार किसी कंपनी या उद्योग पर तब लगाती है जब वे किसी अप्रत्याशित या बाहरी वैश्विक परिस्थितियों के कारण सामान्य से बहुत अधिक 'सुपर-नॉर्मल' मुनाफा कमा रहे होते हैं।
जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बहुत ऊंची होती हैं, तो घरेलू रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार की बजाय विदेशों में ईंधन निर्यात कर मोटा मुनाफा कमाने लगती हैं। ऐसे हालात में सरकार इस टैक्स के जरिए दो उद्देश्य साधती है:
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भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में कच्चे तेल के उत्पादन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। करीब दो वर्षों तक लागू रहने के बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा लिया गया था। हालांकि, मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में फिर से आई तेजी और कच्चे तेल की कीमतों के उछाल के बाद सरकार ने इसे दोबारा लागू किया। तब से लेकर अब तक पाक्षिक (हर 15 दिन में) आधार पर इन दरों की नियमित समीक्षा की जाती रही है।
FREQUENTLY ASKED QUESTIONS — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: क्या इस फैसले से पेट्रोल पंप पर पेट्रोल सस्ता मिलेगा? उत्तर: नहीं। यह टैक्स कटौती केवल पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा विदेशों में किए जाने वाले पेट्रोल निर्यात पर लागू है। घरेलू खुदरा बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रश्न 2: सरकार ने डीजल और ATF पर टैक्स क्यों बढ़ाया है? उत्तर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर रिफाइनिंग कंपनियों को अतिरिक्त मुनाफा (सुपर-प्रॉफिट) मिल रहा था। वैश्विक परिस्थितियों के कारण होने वाले इस अप्रत्याशित मुनाफे को संतुलित करने और घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए लेवी बढ़ाई गई है।
प्रश्न 3: पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी कितनी घटाई गई है? उत्तर: पेट्रोल निर्यात पर पहले 2.50 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लग रहा था, जिसे सरकार ने अब घटाकर 0 रुपये (शून्य) कर दिया है।
प्रश्न 4: यह नया टैक्स ढांचा कब तक प्रभावी रहेगा? उत्तर: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह नई दरें 31 अक्टूबर से प्रभावी हो गई हैं और अगले दो हफ्तों के लिए लागू रहेंगी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की समीक्षा कर नई दरें तय की जाएंगी।
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