बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार भारी बिकवाली के दबाव में आ गया। कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले आईटी व फाइनेंशियल शेयरों में आई गिरावट से बीएसई सेंसेक्स 826 अंक और निफ्टी 200 अंक से अधिक टूट गया। उधर, हालिया नियामक चिंताओं और मार्जिन दबाव के कारण बजाज फाइनेंस जैसे प्रमुख स्टॉक्स पर भी निवेशकों का दबाव साफ दिखाई दिया।
नई दिल्ली / मुंबई:
भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार (28 अक्टूबर 2026) को चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों में घबराहट के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स में 826 अंकों तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि एनएसई निफ्टी 50 फिसलकर 200 अंक से अधिक नीचे आ गया। इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आईटी और चुनिंदा हैवीवेट फाइनेंशियल शेयरों की अगुवाई में देखने को मिली।
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1. कच्चा तेल 115 डॉलर के पार (Crude Oil Surge)
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वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगे कच्चे तेल से देश का आयात बिल बढ़ता है, रुपये पर दबाव आता है और खुदरा व थोक महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो जाता है। कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होने की चिंता ने निवेशकों का मूड बिगाड़ा।
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2. अमेरिका-ईरान तनाव से भू-राजनीतिक अनिश्चितता (US-Iran Tensions)
पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों को सतर्क कर दिया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग है—में संभावित रुकावट की आशंका ने ऊर्जा आपूर्ति संकट को गहरा दिया है।
3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक का डर (US Fed Decision)
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले को लेकर असमंजस में हैं। हालांकि ब्याज दरों को 3.75% से 4% के दायरे में स्थिर रखे जाने की उम्मीद है, लेकिन फेड चेयरमैन के बयान से भविष्य में दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने (Hawkish stance) का संकेत मिलने का डर है। ऐसा होने पर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत होगी, जिससे भारतीय बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बढ़ सकती है।
4. आईटी शेयरों में भारी बिकवाली (IT Stocks Drag)
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.2% से अधिक की तीव्र गिरावट आई। इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसे दिग्गज शेयरों में तेज मुनाफावसूली दर्ज की गई, जिससे निफ्टी को संभलने का मौका नहीं मिला। वहीं एफएमसीजी इंडेक्स भी 1.22% टूटा।
5. बजाज फाइनेंस और NBFC सेक्टर पर दबाव (NBFC Sector Headwinds)
मार्केट की इस गिरावट में फाइनेंशियल सेक्टर का मूड भी कमजोर रहा। हालिया दिनों में बजाज फाइनेंस के शेयरों पर लगातार दबाव देखा गया है। मजबूत नतीजों के बावजूद कंपनी को लेकर कई चुनौतियां सामने आई हैं:
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मुख्य बेंचमार्क सूचकांकों में भारी गिरावट के बावजूद ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख रहा। जहां निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स मामूली 0.16% टूटा, वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.35% की हल्की बढ़त के साथ ट्रेड करता नजर आया। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते और फेड की स्पष्ट दिशा सामने नहीं आती, तब तक घरेलू बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
Q1: आज शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट क्यों आई?
उत्तर: शेयर बाजार में गिरावट के मुख्य कारणों में ब्रेंट क्रूड का 115 डॉलर के पार जाना, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी फेड रिजर्व के फैसले से पहले सतर्कता और आईटी व फाइनेंशियल शेयरों में मुनाफावसूली शामिल है।
Q2: कच्चे तेल के 115 डॉलर पहुंचने से भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर: भारत तेल का बड़ा आयातक है। महंगा कच्चा तेल व्यापार घाटा बढ़ाता है, भारतीय रुपये को कमजोर करता है और कंपनियों की लागत बढ़ाकर कॉर्पोरेट मुनाफे को चोट पहुंचाता है।
Q3: बजाज फाइनेंस के शेयर पर दबाव के क्या कारण हैं?
उत्तर: बजाज फाइनेंस पर आरबीआई के रिवॉल्विंग क्रेडिट संबंधी प्रस्तावित नियम, बीमा कमीशन पर IRDAI की सख्ती की आशंका और फंडिंग कॉस्ट बढ़ने से मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव के कारण बिकवाली देखी गई है।
Q4: आज के कारोबार में किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई?
उत्तर: आज के ट्रेडिंग सत्र में निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.2% से अधिक टूटा, जबकि निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में 1.22% की गिरावट आई। इंफोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा प्रमुख लूजर्स रहे।
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