जयपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। लेज पोटैटो चिप्स के 15 ग्राम अंकित वजन वाले पैकेट में वास्तविक रूप से केवल 4 ग्राम चिप्स पाए गए थे। आयोग ने पेप्सिको को चिप्स की कीमत 6% ब्याज सहित लौटाने, ₹5,000 मानसिक संताप का मुआवजा और ₹3,000 वाद व्यय देने का आदेश दिया है।
जयपुर। अक्सर पैकेज्ड फूड उत्पादों में वजन कम होने या हवा अधिक भरे होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक उपभोक्ता ने इसे कानूनी चुनौती देकर बड़ी जीत हासिल की है।
जयपुर स्थित जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय ने लेज (Lay's) चिप्स निर्माता कंपनी पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (PepsiCo India Holdings Pvt. Ltd.) को उत्पाद में तय मात्रा से काफी कम चिप्स देने का दोषी पाया है।
आयोग ने कंपनी को ग्राहक को हर्जाना और कानूनी खर्च चुकाने का कड़ा निर्देश जारी किया है।
यह आदेश आयोग के अध्यक्ष अशोक शर्मा तथा सदस्य अजय कुमार और सुप्रिया अग्रवाल की पीठ ने दिया। आयोग ने जहां निर्माणकर्ता कंपनी पेप्सिको को उत्तरदायी माना, वहीं विक्रेता मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया।
मामले के अनुसार, मैसर्स जालान बिल्डिंग एंड हार्डवेयर स्टोर के प्रोपराइटर और शिकायतकर्ता चंद्रमान जालान ने 10 नवंबर 2020 को अपने घर आए मेहमानों के सत्कार के लिए मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से कई खाद्य सामग्री खरीदी थीं। इनमें पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित लेज पोटैटो चिप्स का एक पैकेट भी शामिल था, जिसका बिल उसी दिन जारी किया गया था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब वे मेहमानों को चिप्स परोसने लगे, तो उन्हें पैकेट का वजन असामान्य रूप से काफी हल्का लगा। जब उन्होंने पैकेट की सामग्री को तौला, तो वे हैरान रह गए। पैकेट पर शुद्ध वजन (Net Weight) 15 ग्राम घोषित किया गया था, जबकि उसके भीतर वास्तविक रूप से मात्र 4 ग्राम चिप्स ही निकले। यानी पैकेट में घोषित मात्रा से 11 ग्राम कम सामग्री थी।
चंद्रमान जालान ने इस गंभीर अनियमितता की शिकायत तत्काल विक्रेता मेट्रो कैश एंड कैरी से की। हालांकि, विक्रेता कंपनी ने उनकी शिकायत पर कोई उचित ध्यान नहीं दिया और न ही समाधान निकाला। इसके बाद उपभोक्ता ने 6 अप्रैल 2022 को जिला उपभोक्ता आयोग-द्वितीय, जयपुर में पेप्सिको और मेट्रो कैश एंड कैरी दोनों के खिलाफ सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए परिवाद दाखिल किया।
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उपभोक्ता आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान विक्रेता मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने तर्क दिया कि चिप्स की मात्रा में कमी निर्माण प्रक्रिया के दौरान हो सकती है। पैकेजिंग और वजन का कार्य पूरी तरह निर्माता कंपनी के नियंत्रण में होता है, इसलिए किसी भी विनिर्माण दोष या कमी के लिए निर्माता को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को आयोग की ओर से विधिवत नोटिस तामील करवाया गया था। इसके बावजूद कंपनी की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि या वकील आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, आयोग ने पेप्सिको के विरुद्ध एकपक्षीय (Ex-parte) कार्यवाही शुरू की।
आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत खरीद इनवॉइस और साक्ष्यों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि 15 ग्राम घोषित वजन के मुकाबले मात्र 4 ग्राम चिप्स होना सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का हनन और सेवा में गंभीर कमी है। आयोग ने माना कि चूंकि पैकेट सीलबंद था और यह विनिर्माण से संबंधित मामला है, इसलिए मेट्रो कैश एंड कैरी को उत्तरदायी नहीं माना जा सकता।
पीठ ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स के खिलाफ शिकायत स्वीकार करते हुए निम्नलिखित आदेश दिए:
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आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर इस संपूर्ण राशि का भुगतान करना होगा। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर हर्जाना और वाद व्यय (कुल ₹8,000) का भुगतान नहीं किया जाता है, तो इस राशि पर भी आदेश की तारीख से भुगतान होने तक 6% वार्षिक दर से ब्याज देय होगा।
Q1: जयपुर उपभोक्ता आयोग ने पेप्सिको पर कितना जुर्माना और हर्जाना लगाया है?
उत्तर: आयोग ने पेप्सिको को चिप्स की कीमत ₹5 (6% वार्षिक ब्याज सहित), मानसिक संताप के लिए ₹5,000 और मुकदमा खर्च के लिए ₹3,000 का भुगतान करने का आदेश दिया है। तय समय में भुगतान न होने पर ₹8,000 पर भी 6% ब्याज लगेगा।
Q2: लेज चिप्स के पैकेट में वजन को लेकर क्या गड़बड़ी पाई गई थी?
उत्तर: पैकेट पर घोषित शुद्ध वजन 15 ग्राम था, लेकिन वास्तविक रूप से उसमें केवल 4 ग्राम चिप्स निकले, जो निर्धारित वजन से 11 ग्राम कम था।
Q3: विक्रेता 'मेट्रो कैश एंड कैरी' को इस मामले में राहत क्यों मिली?
उत्तर: आयोग ने माना कि चिप्स का पैकेट सीलबंद था और वजन में कमी निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी त्रुटि थी। इसके लिए केवल निर्माता कंपनी पेप्सिको जिम्मेदार है, विक्रेता नहीं।
Q4: यह घटना कब की है और उपभोक्ता ने आयोग में शिकायत कब दर्ज कराई थी?
उत्तर: उपभोक्ता ने 10 नवंबर 2020 को पैकेट खरीदा था और उचित समाधान न मिलने पर 6 अप्रैल 2022 को जयपुर उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया था।
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