ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि देर रात तक जागने वाले लोगों (नाइट आउल) में एक खास तरह के डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है। 'ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियाट्री' में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, बिगड़े हुए बॉडी क्लॉक वाले लोगों में डिप्रेशन कम उम्र में शुरू होता है, लक्षण अधिक गंभीर होते हैं और उन पर सामान्य एंटीडिप्रेसेंट दवाएं भी कम असर करती हैं।
सिडनी: देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना अक्सर लोगों की निजी पसंद या जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है। लेकिन एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस पर चौंकाने वाला खुलासा किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, देर रात तक सक्रिय रहने वाले लोगों का बॉडी क्लॉक (सर्कैडियन रिदम) गड़बड़ाने से वे डिप्रेशन के एक विशेष और गंभीर सब-टाइप की चपेट में आ सकते हैं।
यह अध्ययन 'ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियाट्री' (British Journal of Psychiatry) में प्रकाशित हुआ है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के 'ब्रेन एंड माइंड सेंटर' के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष 'ऑस्ट्रेलियन जेनेटिक्स ऑफ डिप्रेशन स्टडी' के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद निकाला है।
रिसर्च की प्रमुख लेखिका और पोस्टडॉक्टरल रिसर्च फेलो एमिलियाना टोनिनी के अनुसार, जिन लोगों में यह सर्कैडियन सब-टाइप पाया गया, उनमें कई तरह के मानसिक विकारों के साथ-साथ मेटाबॉलिक और सूजन (इन्फ्लेमेटरी) संबंधी समस्याओं का आनुवंशिक जोखिम भी अधिक देखा गया।
Loading...
अध्ययन में डिप्रेशन से पीड़ित 11,380 वयस्कों के जेनेटिक और सर्वे डेटा का विश्लेषण किया गया। इनमें से 2,604 प्रतिभागियों में सर्कैडियन सब-टाइप के लक्षण पाए गए। शोध के अनुसार, इन लोगों में डिप्रेशन औसतन 19 साल की उम्र में ही शुरू हो गया, जबकि सामान्य डिप्रेशन वाले मरीजों में यह उम्र 23 साल देखी गई। इसके अलावा, इनमें से ज्यादातर युवा और महिलाएं थीं।
शोधकर्ताओं ने इस विशेष स्थिति की पहचान के लिए छह प्रमुख संकेत बताए हैं। यदि किसी व्यक्ति में इनमें से कम से कम तीन लक्षण मौजूद हों, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाता है:
Loading...
अध्ययन में पाया गया कि इस सब-टाइप से पीड़ित लोगों में मानसिक तनाव, आत्मघाती विचार (सुसाइडल थॉट्स) और अन्य गंभीर मानसिक लक्षण अधिक तीव्र होते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि ऐसे मरीजों पर अवसाद दूर करने वाली आम दवाएं (एंटीडिप्रेसेंट्स) अपेक्षाकृत कम असरदार साबित होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से डिप्रेशन के इलाज में व्यक्ति की नींद के पैटर्न और बॉडी क्लॉक को ध्यान में रखकर बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद मिलेगी।
Loading...
Q1. नाइट आउल होना डिप्रेशन से कैसे जुड़ा है?
शोध के अनुसार, देर रात तक जागने से शरीर का आंतरिक बॉडी क्लॉक (सर्कैडियन रिदम) असंतुलित हो जाता है, जिससे सर्कैडियन सब-टाइप डिप्रेशन का जोखिम बढ़ जाता है।
Q2. इस डिप्रेशन के मुख्य लक्षण क्या हैं?
रात में देर से सोना, सुबह उठने पर भारी थकान महसूस होना, छुट्टियों और सामान्य दिनों में सोने के समय का बड़ा अंतर और डिप्रेशन के दौरान जरूरत से ज्यादा सोना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
Q3. क्या यह समस्या किसी खास उम्र में ज्यादा देखी जाती है?
रिसर्च के अनुसार, इस सब-टाइप से पीड़ित लोगों में डिप्रेशन के लक्षण औसतन 19 साल की उम्र में ही शुरू हो जाते हैं, जो सामान्य डिप्रेशन की औसत उम्र (23 वर्ष) से काफी पहले है।
Q4. क्या सामान्य एंटीडिप्रेसेंट दवाएं इस पर पूरी तरह कारगर हैं?
अध्ययन बताता है कि सर्कैडियन सब-टाइप वाले मरीजों पर आम एंटीडिप्रेसेंट दवाएं अपेक्षाकृत कम प्रभावी पाई गई हैं।
Disclaimer
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
Previous Article
Next Article