भारत को पोलियो मुक्त हुए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस के नए मामले सामने आ रहे हैं, जिससे भारत में वायरस की वापसी का जोखिम बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक दुनिया से पोलियो पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक नियमित टीकाकरण और सीवेज निगरानी भारत के लिए बेहद जरूरी है।
विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day) हर साल दुनिया भर में पोलियो उन्मूलन के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। भारत के लिए वाइल्ड पोलियो वायरस का खात्मा सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि रहा है।
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस गंभीर बीमारी के खिलाफ लड़ाई अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। भारत के पड़ोसी देशों में वायरस की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि देश को लगातार सतर्क रहना होगा।
भारत में वाइल्ड पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को दर्ज किया गया था। इसके बाद 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत समेत पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को आधिकारिक रूप से पोलियो मुक्त (Polio-Free) घोषित किया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किए 10 साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आज भी कड़े प्रयासों की जरूरत है।
ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनिशिएटिव (GPEI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान दुनिया के एकमात्र ऐसे देश हैं जहां वाइल्ड पोलियो वायरस अब भी स्थानिक (Endemic) रूप से सक्रिय है। 21 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में 42 मामले और पाकिस्तान में 6 नए मामले दर्ज किए गए हैं। सीमा पार लगातार सक्रिय यह वायरस अन्य देशों के लिए भी बड़ा खतरा बना हुआ है।
रोटरी इंटरनेशनल की इंडिया नेशनल पोलियोप्लस कमेटी के चेयरमैन गुलाम ए. वहानवती का कहना है कि किसी देश से वायरस समाप्त होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वहां इसका खतरा खत्म हो गया है। उनके मुताबिक, "केवल इसलिए कि कोई देश पोलियो मुक्त है, इसका यह अर्थ नहीं कि वह इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित है।"
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पोलियो एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो पोलियो वायरस के जरिए फैलती है। यह मुख्य रूप से दूषित पानी, दूषित भोजन या अस्वच्छ हाथों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। कई मामलों में इसके शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन वायरस जब तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है, तो यह बच्चों में आजीवन और स्थायी लकवा (Paralysis) पैदा कर सकता है।
चेन्नई स्थित रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा जी का कहना है कि जब तक पड़ोसी देशों में वायरस सक्रिय है, तब तक भारत में इसके दोबारा लौटने का खतरा हमेशा रहेगा। इसलिए बच्चों की सुरक्षा के लिए लगातार टीकाकरण ही सबसे बड़ा रक्षा कवच है।
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भारत में बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए दो तरह के टीकों का इस्तेमाल किया जाता है:
डॉ. अपर्णा के अनुसार, नियमित टीकाकरण (Routine Immunization) के साथ-साथ पल्स पोलियो अभियान बेहद प्रभावी रणनीति है। पल्स पोलियो अभियान के तहत 5 साल तक के सभी बच्चों को एक ही दिन दवा की अतिरिक्त खुराक दी जाती है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य 100 प्रतिशत कवरेज हासिल करना है, ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से न छूटे।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल टीका लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि कड़ी निगरानी (Surveillance) भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी भी बच्चे में अचानक कमजोरी या लकवे के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच की जाती है।
इसके अलावा पर्यावरणीय निगरानी (Environmental Surveillance) के तहत नालों और सीवेज के पानी के नमूनों की नियमित जांच की जाती है, ताकि बिना किसी मरीज के भी वायरस की मौजूदगी का तुरंत पता लगाया जा सके।
समय पर पहचान होने से स्वास्थ्य एजेंसियां तेजी से कदम उठा सकती हैं और इलाके में अतिरिक्त टीकाकरण अभियान चलाकर वायरस को फैलने से रोक सकती हैं। जब तक पूरी दुनिया से इस वायरस का नामोनिशान नहीं मिट जाता, तब तक भारत को अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सतर्कता और निगरानी बनाए रखनी होगी।
Q1: भारत को आधिकारिक रूप से पोलियो मुक्त कब घोषित किया गया था?
उत्तर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 27 मार्च 2014 को भारत को आधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त घोषित किया था। भारत में अंतिम मामला 13 जनवरी 2011 को मिला था।
Q2: पोलियो मुक्त होने के बावजूद भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: क्योंकि भारत के पड़ोसी देशों, विशेषकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस अब भी सक्रिय है और वहां लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं।
Q3: पोलियो वायरस शरीर में कैसे फैलता है?
उत्तर: यह वायरस मुख्य रूप से दूषित जल, दूषित भोजन और अस्वच्छ हाथों के माध्यम से मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है।
Q4: भारत में पोलियो से बचाव के लिए कौन से टीके दिए जाते हैं?
उत्तर: भारत में दो प्रकार के टीके दिए जाते हैं—ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) जो मुंह में ड्रॉप्स के रूप में दी जाती है, और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV) जो इंजेक्शन के जरिए दी जाती है।
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