राजस्थान में योद्धा तैयार करने की 250 साल पुरानी परंपरा बंद: चील की उड़ान से होती थी शुरुआत; एक मौत के बाद कोर्ट ने लगाई रोक
3/3/2026, 12:15:00 PM
राजस्थान के जालोर जिले के आहोर में करीब 250 साल पुरानी ‘भाटा गेर’ परंपरा योद्धा तैयार करने के लिए शुरू की गई थी। होली पर आयोजित इस खेल में प्रतिभागियों को पत्थरों और कांटों की बाड़ पार करनी होती थी, और विजेता को सेना में भर्ती किया जाता था। साल 2003 में एक युवक की गंभीर चोट के बाद मौत हो गई, जिसके बाद जोधपुर हाई कोर्ट ने इस खतरनाक परंपरा पर रोक लगा दी। तब से यह आयोजन बंद है और नई पीढ़ी धीरे-धीरे इसे भूलती जा रही है।
राजस्थान में योद्धा तैयार करने की 250 साल पुरानी परंपरा बंद: चील की उड़ान से होती थी शुरुआत; एक मौत के बाद कोर्ट ने लगाई रोक राजस्थान में योद्धा तैयार करने के लिए शुरू की गई एक अनोखी परंपरा अब इतिहास बन चुकी है। करीब 250 साल पुरानी ‘भाटा गेर’ (पत्थर मार गेर) की शुरुआत जालोर के आहोर में उस समय के राजाओं ने की थी। साल 2003 में एक युवक की मौत के बाद कोर्ट के आदेश से इस पर रोक लगा दी गई। तब से यह परंपरा पूरी तरह बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गेर को देखने के लिए सिर्फ जिले से ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी लोग आते थे। लेकिन अब पहले जैसे हालात नहीं रहे और नई पीढ़ी इस परंपरा को धीरे-धीरे भूलती जा रही है। डाकुओं के आतंक को खत्म करने के लिए हुई थी शुरुआत गांव के निवासी महिपाल सिंह के अनुसार, करीब ढाई सौ साल पहले उनके पूर्वज ठाकुर अनार सिंह का शासन आहोर में था। उस समय आहोर का रावला जोधपुर के अधीन था। जब भी युद्ध या किसी और जरूरत के कारण सेना जोधपुर चली जाती थी, तब आहोर में डाकुओं का आतंक ब