विप्रो का आईटी सर्विसेज रेवेन्यू स्थिर मुद्रा के आधार पर सपाट रहा और कुल डॉलर आय 2.6 अरब डॉलर पर सीमित रही, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन सुधरकर 16.5% पर पहुंचा।बड़े सौदों पर हस्ताक्षर में देरी और अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर की मंदी के चलते कुल डील बुकिंग्स 22.9% गिरकर 4 साल के निचले स्तर पर आ गईं और लार्ज डील्स 58.6% घट गईं।
विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही (Second Half) की शुरुआत काफी धीमी गति से की है। कंपनी की कुल कमाई यानी रेवेन्यू में पिछली तिमाही के मुकाबले कोई खास बदलाव नहीं देखा गया, जबकि नए बिजनेस सौदों (Deal Bookings) के आंकड़े गिरकर लगभग चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
सौदों पर हस्ताक्षर में देरी, अमेरिका के मुख्य बाजार में चुनिंदा ग्राहकों से जुड़ी दिक्कतें और हेल्थकेयर सेक्टर में कमजोरी की वजह से कंपनी के नतीजों पर सीधा असर पड़ा है।
कंपनी के आईटी सर्विसेज कारोबार ने सितंबर तिमाही में मिला-जुला प्रदर्शन दिखाया है:
आईटी सर्विसेज रेवेन्यू (कमाई): पिछली तिमाही (जून तिमाही) के मुकाबले कंपनी की कमाई बिल्कुल सपाट यानी फ्लैट रही। स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर सालाना तौर पर इसमें केवल 0.6% की मामूली बढ़त दर्ज की गई।
डॉलर के रूप में आय: डॉलर के हिसाब से कंपनी का कुल रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 0.1% घट गया, हालांकि पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले इसमें 0.3% की बढ़त रही। कंपनी की कुल कमाई 2.6 अरब डॉलर दर्ज की गई।
ऑपरेटिंग मार्जिन (कामकाजी मुनाफा): विप्रो का ऑपरेटिंग मार्जिन 16.5% पर रहा। पिछली तिमाही के मुकाबले मार्जिन में 50 बेसिस पॉइंट्स की अच्छी रिकवरी हुई, लेकिन अगर पिछले साल के इसी समय से तुलना करें, तो यह 20 बेसिस पॉइंट्स कम रहा।
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए ऑर्डर्स और प्रोजेक्ट्स की रही:
टोटल बुकिंग्स: इस तिमाही में विप्रो की कुल बुकिंग्स 2.6 अरब डॉलर रही। स्थिर मुद्रा के आधार पर यह पिछली तिमाही के मुकाबले 22.9% कम है।
बड़े सौदों (Large Deals) का हाल: कंपनी के बड़े प्रोजेक्ट्स की बुकिंग में सबसे तेज गिरावट आई। यह पिछली तिमाही के मुकाबले सीधे 58.6% घटकर केवल 67.4 करोड़ डॉलर (674 मिलियन डॉलर) रह गई।
विप्रो के सीईओ श्रीनी पल्लिया ने नतीजों पर स्थिति साफ करते हुए बताया कि कई बड़े सौदों में अंतिम मुहर लगना बाकी रह गया था।
"इस तिमाही में हमारी बुकिंग्स उम्मीद से कम रही हैं। हालांकि, हमें कुछ ऐसे बड़े सौदे मिल चुके थे जिन पर इस तिमाही के दौरान साइन नहीं हो सके। हमें पूरी उम्मीद है कि ये सौदे तीसरी तिमाही (Q3) में शामिल हो जाएंगे। हम तीसरी तिमाही की बुकिंग्स को लेकर काफी उत्साहित और सकारात्मक हैं।"
उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका 1 (Americas 1) बाजार में एक खास ग्राहक से जुड़ी स्थिति और हेल्थकेयर सेक्टर की मंदी के चलते यह गिरावट देखने को मिली। इसके साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दिसंबर तिमाही में आम तौर पर विदेशी क्लाइंट्स छुट्टियों (Furloughs) पर जाते हैं, जिसका असर काम पर पड़ता है। बावजूद इसके, कंपनी के पास आगे के लिए काम का मजबूत पाइपलाइन मौजूद है।
विप्रो अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाली कमाई के आंकड़े अलग से सार्वजनिक नहीं करती है। इस पर बात करते हुए सीईओ श्रीनी पल्लिया ने कहा कि कंपनी इन आंकड़ों पर अंदरूनी तौर पर पूरी नजर रखती है, लेकिन इन्हें बाहर नहीं बताती।
कंपनी का कहना है कि वे पहले की तरह गलती नहीं दोहराना चाहते, जैसा डिजिटल सर्विसेज के समय हुआ था। विप्रो का मुख्य ध्यान सिर्फ आंकड़े दिखाने पर नहीं, बल्कि अपने क्लाइंट्स को पूरी तरह से एआई-नेटिव (AI-Native) बनाने और उनकी जरूरतों के हिसाब से नई तकनीक लागू करने पर है।
विप्रो का आईटी रेवेन्यू: पिछली तिमाही के मुकाबले सपाट, सालाना आधार पर 0.6% की धीमी बढ़त।
कुल डॉलर रेवेन्यू: 2.6 अरब डॉलर, पिछली तिमाही से 0.1% नीचे।
कुल बुकिंग्स: 22.9% गिरकर 2.6 अरब डॉलर पर पहुंची, जो 4 साल का निचला स्तर है।
बड़े सौदे: 58.6% की भारी गिरावट के साथ 674 मिलियन डॉलर पर सिमटे।
ऑपरेटिंग मार्जिन: 16.5%, तिमाही आधार पर 50 बेसिस पॉइंट्स का सुधार।
कमजोरी की वजह: बड़े सौदों के साइन होने में देरी, अमेरिका 1 मार्केट में क्लाइंट से जुड़ी दिक्कत और हेल्थकेयर सेक्टर में सुस्ती।
आगे की उम्मीद: लंबित सौदे तीसरी तिमाही में पूरे होंगे, जिससे Q3 में मजबूत रिकवरी की उम्मीद है।
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