कनाडा की निवेश फर्म फेयरफैक्स फाइनेंशियल ने IDBI बैंक की 60.7% हिस्सेदारी ₹81 प्रति शेयर के भाव पर ₹529 अरब (लगभग $5.5 अरब) में खरीदने का सौदा तय किया है।बुधवार के बंद भाव (₹90.39) से लगभग ₹9 डिस्काउंट पर डील फाइनल होने के कारण गुरुवार को IDBI बैंक का शेयर 7% से अधिक टूट गया, हालांकि सरकार ने ₹75.99 की फेयर वैल्यू की तुलना में इसे बेहतर बताया है।
गुरुवार को शेयर बाजार में IDBI बैंक के शेयरों में 7% से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उस समय देखने को मिली, जब भारत सरकार ने बैंक में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने का आधिकारिक ऐलान किया। सरकार ने बताया कि कनाडा की मशहूर निवेश कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) को बैंक की बहुलांश हिस्सेदारी (Majority Stake) बेचने का फैसला लिया गया है।
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यह पूरा सौदा करीब 529 अरब रुपये (लगभग 5.5 अरब डॉलर) में तय हुआ है। अगर सभी सरकारी और बैंकिंग मंजूरियां मिल जाती हैं, तो यह भारत के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI - Foreign Direct Investment) होगा।
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शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह डील का तय भाव रहा। बुधवार को बाजार बंद होने तक IDBI बैंक का शेयर बाजार में 90.39 रुपये पर कारोबार कर रहा था। लेकिन सरकार और फेयरफैक्स के बीच यह सौदा 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर तय हुआ।
जब निवेशकों को पता चला कि कंपनी की हिस्सेदारी मौजूदा बाजार भाव से लगभग 10 रुपये सस्ते में बेची जा रही है, तो बाजार में घबराहट फैल गई और लोगों ने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए। इसी वजह से गुरुवार को कारोबार खुलते ही बैंक के शेयर 7 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए।
हालांकि, सरकार का कहना है कि बोली प्रक्रिया के दौरान बैंक के शेयर की औसत सही कीमत (Fair Value) 75.99 रुपये आंकी गई थी, जिसकी तुलना में 81 रुपये का ऑफर बेहतर है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, IDBI बैंक लंबे समय से खराब वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्जों से जूझ रहा था। बैंक को चालू रखने और घाटे से उबारने के लिए सरकार को बार-बार अपनी जेब से इसमें पूंजी (पैसा) डालनी पड़ रही थी।
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कुछ समय पहले बैंक की हालत में थोड़ा सुधार जरूर हुआ, लेकिन इसे लंबे समय तक मजबूती से चलाने के लिए सरकार ने किसी मजबूत रणनीतिक खरीदार (Strategic Buyer) को लाने का फैसला किया। इसी रणनीति के तहत सरकार और जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेच रहे हैं। सरकार पूरी तरह बाहर नहीं होगी, बल्कि अपने पास एक छोटी हिस्सेदारी (माइनॉरिटी स्टेक) बनाए रखेगी।
इस बड़े सौदे पर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा:
"हमने IDBI बैंक को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में पूरी मदद की है। अब विदेशी निवेश के जरिए बैंक को विकास के नए दौर में ले जाया जा रहा है। सरकार इसमें अपनी छोटी हिस्सेदारी बनाए रखेगी।"
वित्त मंत्री ने आगे यह भी कहा कि फेयरफैक्स का इतना बड़ा निवेश यह साबित करता है कि भारत की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है और दुनिया भर के बड़े निवेशक भारत की तरक्की और सरकार के आर्थिक सुधारों पर गहरा भरोसा करते हैं।
हालांकि डील की घोषणा हो चुकी है, लेकिन फेयरफैक्स को अभी भारत के केंद्रीय बैंक, यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से हरी झंडी लेनी होगी।
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बैंकिंग नियमों के मुताबिक, किसी भी बैंक का नया मालिक बनने से पहले खरीदार कंपनी को RBI की सख्त 'फिट एंड प्रॉपर' (Fit and Proper) जांच से गुजरना पड़ता है। केंद्रीय बैंक यह जांच करेगा कि क्या फेयरफैक्स के पास भारतीय बैंक चलाने की सही योग्यता, अनुभव और साफ-सुथरा रिकॉर्ड है या नहीं। RBI और दूसरी नियामक संस्थाओं की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही यह डील कानूनी रूप से पूरी होगी।
IDBI बैंक का सौदा सरकार की बड़ी विनिवेश (Disinvestment) योजना का हिस्सा है। सरकार अपने वित्तीय घाटे को कम करने और देश के विकास कार्यों (जैसे सड़कें, रेलवे और बुनियादी ढांचा) के लिए पैसे जुटाने के मकसद से सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है।
इस साल सरकार ने कई अन्य प्रमुख सरकारी कंपनियों के शेयर भी बेचे हैं, जिनमें शामिल हैं:
इसके अलावा, कुछ महीने पहले अगस्त में सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी 6.5% हिस्सेदारी बेचकर बाजार से लगभग 3.3 अरब डॉलर जुटाए थे।
भले ही कम बोली भाव की वजह से अल्पावधि (Short Term) में IDBI बैंक के शेयरों में तेज गिरावट आई हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि लंबे समय के लिए यह कदम बैंक के लिए अच्छा साबित हो सकता है। एक बड़े विदेशी निवेशक के आने से बैंक को नई पूंजी, नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन मिलेगा, जिससे बैंक के काम-काज में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।
यह कोई निवेश सलाह, या बेचने का ऑफर नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि निवेश से पहले खुद रिसर्च करें या SEBI में रजिस्टर्ड किसी निवेश सलाहकार से सलाह लें। लेखक SEBIरजिस्टर्ड निवेश सलाहकार नहीं है
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