लगभग 4.5 अरब साल पहले जब हमारा सौर मंडल अपनी बाल्यावस्था में था, तब अंतरिक्ष शांत नहीं बल्कि भीषण टकरावों का अखाड़ा था। 'जायंट इम्पैक्ट हाइपोथिसिस' के अनुसार, मंगल के आकार के एक विशाल पिंड (थिया) के आदि-पृथ्वी (Proto-Earth) से टकराने के बाद ही पृथ्वी और चंद्रमा की मौजूदा प्रणाली तैयार हुई थी। अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने ब्रह्मांड में ठीक इसी तरह के प्रलयंकारी टकरावों से घिरे युवा तारा-प्रणालियों को ढूंढ निकाला है, जिन्हें वैज्ञानिक ‘एक्सट्रीम मलबिस डिस्क’ (Extreme Debris Disks) कहते हैं।
"चट्टानी ग्रहों का निर्माण और विशाल गैसीय ग्रहों का विकास—यह सब हमारे सौर मंडल के बनने की एक ही महागाथा के अलग-अलग हिस्से हैं।" — केट सु, प्रमुख शोधकर्ता, स्पेस साइंस इंस्टीट्यूट (SSI)
लगभग 4.5 अरब साल पहले जब हमारा सौर मंडल अपनी बाल्यावस्था में था, तब अंतरिक्ष शांत नहीं बल्कि भीषण टकरावों का अखाड़ा था। 'जायंट इम्पैक्ट हाइपोथिसिस' के अनुसार, मंगल के आकार के एक विशाल पिंड (थिया) के आदि-पृथ्वी (Proto-Earth) से टकराने के बाद ही पृथ्वी और चंद्रमा की मौजूदा प्रणाली तैयार हुई थी।
अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने ब्रह्मांड में ठीक इसी तरह के प्रलयंकारी टकरावों से घिरे युवा तारा-प्रणालियों को ढूंढ निकाला है, जिन्हें वैज्ञानिक ‘एक्सट्रीम मलबिस डिस्क’ (Extreme Debris Disks) कहते हैं।
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द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने की अनूठी खिड़की देता है कि हमारी धरती और चंद्रमा किस तरह वजूद में आए।
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तारे जब जन्म लेते हैं, तो उनके चारों ओर गैस और धूल का घना घेरा (प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क) होता है। समय के साथ यह गैस खत्म हो जाती है और केवल मलबे के छल्ले (डेब्रिस डिस्क) बचते हैं:
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वैज्ञानिकों ने रासायनिक संरचना के आधार पर इन 21 डिस्क को दो श्रेणियों में बांटा, जिससे यह तय हुआ कि टकराव कितना शक्तिशाली था:
| डिस्क का प्रकार | नमूनों की संख्या | अनुमानित टकराव का स्रोत | तारे की आयु सीमा |
|---|---|---|---|
| सिलिका-रिच (Silica-Rich) | 8 | मंगल के आकार के विशाल पिंडों की भीषण टक्कर (अत्यधिक ऊर्जा, वाष्पीकृत पदार्थ) | 30 करोड़ (300 Million) वर्ष से कम |
| सिलिका-पुअर (Silica-Poor) | 13 | चंद्रमा के आकार के छोटे पिंडों की कम ऊर्जा वाली टक्करें | विस्तृत आयु सीमा (युवा से लेकर पुराने तारे तक) |
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यह खोज सौर मंडल के विकास के दो अहम अध्यायों पर मुहर लगाती है:
कंप्यूटर सिमुलेशन बताते हैं कि पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रह तारे के जन्म के शुरुआती कुछ सौ मिलियन वर्षों में ही बनते हैं। सिलिका-रिच डिस्क केवल 300 मिलियन वर्ष से छोटे तारों के पास मिली हैं। यह सटीक रूप से उस मॉडल से मेल खाता है जिसके अनुसार सूर्य बनने के 10 करोड़ साल बाद मंगल जितने बड़े पिंड की टक्कर से चंद्रमा बना था।
सिलिका-पुअर डिस्क पुराने तारों के आसपास भी देखी गई हैं। यह उस दौर की याद दिलाता है जब हमारे सौर मंडल में बृहस्पति और शनि जैसे गैसीय दिग्गजों ने अपनी कक्षाएं बदली थीं। उनके गुरुत्वाकर्षण से छोटे क्षुद्रग्रह अपनी कक्षा से भटक गए और उन्होंने सौर मंडल के भीतरी ग्रहों पर भीषण उल्कापात (Late Heavy Bombardment) शुरू कर दिया था। संभवतः हमारे सूर्य ने भी अरबों साल पहले ऐसी ही एक सिलिका-पुअर चरम डिस्क का अनुभव किया होगा।
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वेगा (Vega) और फोमलहौत (Fomalhaut) जैसे ठंडे मलबे वाले तारों के मुकाबले यह खोज ग्रहों के हिंसक जन्म का प्रत्यक्ष प्रमाण देती है। वैज्ञानिक दल अब आने वाली पीढ़ी के टेलीस्कोपों से उम्मीद लगाए बैठा है:
ये उन्नत उपकरण ब्रह्मांड के सुदूर कोनों में और अधिक टक्करों को रिकॉर्ड करेंगे, जिससे यह गुत्थी सुलझेगी कि क्या पृथ्वी जैसा जीवन-समर्थक ग्रह बनना ब्रह्मांड में एक सामान्य घटना है या सिर्फ एक दुर्लभ महा-टक्कर का अनोखा नतीजा।
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