निफ्टी के अहम लेवल्स: तकनीकी जानकारों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,500 और 22,440 का स्तर काफी अहम सपोर्ट है। अगर बाजार इस स्तर से नीचे फिसलता है, तो गिरावट 22,300 तक बढ़ सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 22,800 का स्तर पार होने पर ही बाजार में नई तेजी लौट सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 8 अक्टूबर को भारी दबाव और गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही बिकवाली हावी हो गई और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में चले गए। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में किया गया बदलाव मुख्य वजह माने जा रहे हैं।
आज सुबह कारोबार की शुरुआत होते ही सेंसेक्स (Sensex) में करीब 500 अंकों तक की तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी (Nifty) भी 70 से 150 अंक से ज्यादा नीचे आ गया।
कारोबार के दौरान निफ्टी फिसलकर 22,550 से 22,500 के अहम सपोर्ट लेवल के करीब आ गया। इससे पहले बीते कारोबारी सत्र में भी निफ्टी करीब 173 अंक टूटकर 22,603 के स्तर पर बंद हुआ था। विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर बढ़ती चिंताओं के कारण निवेशकों ने बिकवाली करना ही बेहतर समझा।
1. अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध का खतरा (US-Iran War Tension)
मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से पूरे वैश्विक बाजार में डर का माहौल है। निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव युद्ध में बदला, तो दुनिया भर की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी।
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2. कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल (Crude Oil Prices)
मध्य पूर्व में तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। वहीं डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 90 डॉलर के ऊपर बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।
3. रिजर्व बैंक का बड़ा फैसला (RBI Repo Rate Hike)
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। इसके साथ ही आरबीआई ने अपना रुख भी सख्त किया है। रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर यह होता है कि बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे आम लोगों की होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ जाती है। इसका सबसे बुरा असर रियल्टी और ऑटो सेक्टर की कंपनियों पर पड़ता दिख रहा है।
4. कमजोर रुपया और अमेरिकी डॉलर की मजबूती
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वैश्विक अनिश्चितता की वजह से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) मजबूत होकर 102 के पार पहुंच गया है। इसके कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.70 से 96.80 के निचले स्तरों के करीब आ गया है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों को बाजार से पैसा निकालने पर मजबूर करता है।
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रियल्टी और मेटल सेक्टर: ब्याज दरें बढ़ने और वैश्विक अनिश्चितता के चलते रियल एस्टेट और धातु कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर: लोन महंगे होने की आशंका से बैंक और वाहन बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला।
आईटी और एक्सपोर्ट कंपनियां: डॉलर मजबूत होने और रुपया कमजोर होने से कुछ आईटी और एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों को सीमित सहारा मिला, लेकिन चौतरफा बिकवाली के आगे बाजार संभल नहीं सका।
सोना और चांदी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर मजबूत होने से सोने और चांदी की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोना 1.50 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसल गया, वहीं चांदी में भी मुनाफावसूली दर्ज की गई।
क्रिप्टो बाजार: वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने के रुख के कारण बिटकॉइन (Bitcoin) गिरकर 83,000 डॉलर के स्तर के आसपास आ गया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में बाजार में काफी उठापटक (volatility) रह सकती है।
निफ्टी के अहम लेवल्स: तकनीकी जानकारों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,500 और 22,440 का स्तर काफी अहम सपोर्ट है। अगर बाजार इस स्तर से नीचे फिसलता है, तो गिरावट 22,300 तक बढ़ सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 22,800 का स्तर पार होने पर ही बाजार में नई तेजी लौट सकती है।
जल्दबाजी से बचें: जब तक कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होतीं और अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता, तब तक निवेशकों को हर गिरावट में संभलकर और किस्तों में ही मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में खरीदारी करनी चाहिए।
यह कोई निवेश सलाह, या बेचने का ऑफर नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि निवेश से पहले खुद रिसर्च करें या SEBI में रजिस्टर्ड किसी निवेश सलाहकार से सलाह लें। लेखक SEBIरजिस्टर्ड निवेश सलाहकार नहीं है
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