सुप्रीम कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा पाए अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की फांसी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर निचली अदालत के रिकॉर्ड भी मांगे हैं। इस मामले में 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा पाए इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की फांसी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत के रिकॉर्ड भी मांगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ए. जी. मसिह और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने आया। बेंच ने अहमद बावा की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी है।
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए थे। ये धमाके करीब 70 मिनट के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
धमाकों के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान कुछ अस्पतालों में भी धमाके हुए थे। इसे लेकर मामले की गंभीरता और बढ़ गई थी।
इस मामले में जांच के बाद इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 38 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं 11 अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी।
विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ आरोपियों ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की थी। 7 जुलाई को हाई कोर्ट ने 38 आरोपियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा। 11 अन्य आरोपियों की उम्रकैद की सजा भी कायम रखी गई।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में मामले में बड़ी साजिश, बड़ी संख्या में लोगों की मौत और समाज में डर फैलाने की कोशिश को अहम माना था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपियों की भूमिका और मामले से जुड़े दूसरे तथ्य मौत की सजा को बनाए रखने के पक्ष में थे।
हाई कोर्ट ने यह भी माना कि विशेष अदालत ने सजा तय करते समय मामले से जुड़े गंभीर और राहत देने वाले दोनों तरह के पहलुओं पर विचार किया था।
अब अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उसकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया और निचली अदालत से मामले से जुड़े रिकॉर्ड मंगवाए। इसके साथ ही अहमद बावा की मौत की सजा पर रोक लगा दी गई है। मामले में सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि यह गंभीर मामला है।
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में विशेष अदालत ने 38 इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों को मौत की सजा दी थी। गुजरात हाई कोर्ट ने जुलाई में इस सजा को बरकरार रखा था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मामले में आरोपियों की भूमिका, साजिश का बड़ा स्तर, लोगों की मौत और समाज में डर का माहौल पैदा करने की कोशिश जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया। 11 अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी। हाई कोर्ट ने इन आरोपियों की सजा भी कायम रखी। अदालत के मुताबिक, इन लोगों की भूमिका आतंकी प्रशिक्षण शिविरों और साजिश के लिए जरूरी मदद से जुड़ी थी।
अहमद बावा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला मामले के आगे के कानूनी कदमों के लिए अहम होगा। फिलहाल कोर्ट ने उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी है और गुजरात सरकार से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं। इस वजह से अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
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