सितंबर में भारतीय शेयर बाजार पर दबाव रहा और निफ्टी 50 में 6.7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। विदेशी निवेशकों ने निफ्टी फ्यूचर्स में शॉर्ट पोजीशन बढ़ाई है, जबकि ब्रोकरेज कंपनियों ने निफ्टी के लिए 22,350-22,500 को अहम स्तर बताया है।
भारतीय शेयर बाजार में सितंबर के खराब प्रदर्शन के बाद अक्टूबर की शुरुआत को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों ने निफ्टी इंडेक्स फ्यूचर्स में अपनी शॉर्ट पोजीशन बढ़ाई है, जबकि ब्रोकरेज कंपनियों का मानना है कि बाजार में आने वाली तेजी कुछ समय के लिए ही रह सकती है। भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर का आखिरी डेरिवेटिव्स एक्सपायरी दिन दबाव भरा रहा। बाजार में तेजी की उम्मीद वाली कई पोजीशन बंद की गईं और विदेशी निवेशकों की ओर से शेयरों की बिक्री भी बढ़ी। ब्रोकरेज कंपनियों के अनुसार, दुनिया भर में बॉन्ड बाजार में आई बड़ी गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
निफ्टी में सितंबर के दौरान बड़ी गिरावट
सितंबर की डेरिवेटिव्स सीरीज में निफ्टी 50 में 6.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह एशिया के प्रमुख बाजारों में सबसे बड़ी गिरावट रही। वहीं बैंक निफ्टी भी 5.7 फीसदी नीचे आया। बैंक निफ्टी में गिरावट का असर निफ्टी 50 पर भी काफी रहा।
बाजार में इस गिरावट के बीच निवेशकों का ध्यान अब अक्टूबर के प्रदर्शन पर है। ब्रोकरेज कंपनियां मान रही हैं कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजीशन बढ़ी
विदेशी निवेशकों की निफ्टी इंडेक्स फ्यूचर्स में शॉर्ट पोजीशन सितंबर के दौरान तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट की संख्या करीब 1.84 लाख से बढ़कर लगभग 2.67 लाख कॉन्ट्रैक्ट हो गई है।
शॉर्ट पोजीशन का बढ़ना बताता है कि विदेशी निवेशक बाजार में गिरावट की संभावना को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति बना रहे हैं। इसके साथ ही बाजार में तेजी वाली पोजीशन को कम किया गया है।
डेरिवेटिव्स बाजार में इस बदलाव को निवेशकों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में हर समय गिरावट ही आएगी। शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों के बीच पोजीशन में बदलाव होता रहता है।
22,350-22,500 पर निफ्टी के लिए अहम स्तर
ब्रोकरेज कंपनियों के मुताबिक निफ्टी 50 के लिए 22,350 से 22,500 का स्तर अहम सपोर्ट जोन हो सकता है। आसान भाषा में कहें तो अगर बाजार नीचे आता है, तो इन स्तरों के आसपास खरीदारी देखने को मिल सकती है।
वहीं ऊपर की तरफ 23,300 से 23,400 का स्तर अहम माना जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार को फिर से दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
ब्रोकरेज की राय के अनुसार, अगर निफ्टी में तेजी आती भी है तो उसे अभी पक्की तेजी मानना सही नहीं होगा। बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और छोटी अवधि की तेजी के बाद फिर दबाव बन सकता है।
बैंक निफ्टी में भी गिरावट
सितंबर की सीरीज में बैंक निफ्टी में 5.7 फीसदी की गिरावट आई। बैंकों से जुड़े शेयरों में कमजोरी ने निफ्टी 50 पर भी असर डाला।
बैंक निफ्टी भारतीय शेयर बाजार का एक अहम हिस्सा है और इसमें होने वाली बड़ी चाल का असर पूरे बाजार के माहौल पर पड़ सकता है। सितंबर में बैंक निफ्टी की गिरावट ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।
ग्लोबल बॉन्ड बाजार की गिरावट का असर
भारतीय बाजार में दबाव की एक वजह दुनिया भर के बॉन्ड बाजार में आई बड़ी गिरावट भी बताई गई है। वैश्विक बाजारों में बॉन्ड को लेकर चिंता बढ़ने का असर दूसरे बाजारों पर भी देखने को मिला। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक अपने निवेश को लेकर ज्यादा सावधानी बरतते हैं। भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिक्री बढ़ने और फ्यूचर्स में शॉर्ट पोजीशन बढ़ने से बाजार पर दबाव और बढ़ा है।
अक्टूबर में बाजार पर रहेगी नजर
सितंबर की गिरावट के बाद अब अक्टूबर भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम महीना हो सकता है। निवेशक निफ्टी और बैंक निफ्टी की चाल के साथ विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर भी नजर रखेंगे।
डेरिवेटिव्स में हुए बदलाव से फिलहाल बाजार में सावधानी का संकेत मिल रहा है। निफ्टी के लिए 22,350-22,500 का स्तर नीचे की तरफ अहम माना जा रहा है, जबकि 23,300-23,400 का स्तर ऊपर की तरफ महत्वपूर्ण रह सकता है।
अगर बाजार में तेजी आती है तो ब्रोकरेज कंपनियां इसे फिलहाल सावधानी के साथ देखने की बात कह रही हैं। सितंबर में बड़ी गिरावट के बाद अक्टूबर में बाजार किस दिशा में जाता है, यह विदेशी निवेशकों की गतिविधि और वैश्विक बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों ने निफ्टी फ्यूचर्स में अपनी शॉर्ट पोजीशन बढ़ाई है और निफ्टी तथा बैंक निफ्टी की सितंबर सीरीज में कमजोरी रही। ऐसे में अक्टूबर की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर इन अहम स्तरों और विदेशी निवेशकों के रुख पर रहेगी।
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