चमगादड़ दुनिया के सबसे रहस्यमयी स्तनधारियों में गिने जाते हैं। वे अंधेरे में रहते हैं, ऐसी जगहों पर छिपकर आराम करते हैं जहां पहुंचना आसान नहीं होता और उनके पास उड़ने तथा इकोलोकेशन जैसी अनोखी क्षमताएं हैं। कुछ चमगादड़ लंबे समय तक जीवित भी रहते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से यह पता लगाना मुश्किल रहा है कि इन खास खूबियों का विकास कैसे हुआ और चमगादड़ पहली बार धरती पर कब और कहां दिखाई दिए।
चमगादड़ दुनिया के सबसे रहस्यमयी स्तनधारियों में गिने जाते हैं। वे अंधेरे में रहते हैं, ऐसी जगहों पर छिपकर आराम करते हैं जहां पहुंचना आसान नहीं होता और उनके पास उड़ने तथा इकोलोकेशन जैसी अनोखी क्षमताएं हैं। कुछ चमगादड़ लंबे समय तक जीवित भी रहते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से यह पता लगाना मुश्किल रहा है कि इन खास खूबियों का विकास कैसे हुआ और चमगादड़ पहली बार धरती पर कब और कहां दिखाई दिए।
अब चमगादड़ों के जीन और जीवाश्मों पर अब तक की सबसे बड़ी स्टडी ने उनकी उत्पत्ति और विकास को समझने में नई जानकारी दी है। Nature जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, चमगादड़ों की शुरुआती उत्पत्ति करीब 6.5 करोड़ साल पहले यूरोप में हुई थी। इसके बाद वे अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैलते गए।
इस रिसर्च में दुनिया की 21 जीवित बैट फैमिली की 103 प्रजातियों के जीनोम का अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने पूरे जीनोम के साथ-साथ कुछ खास क्रोमोसोम की भी तुलना की। इन आनुवंशिक आंकड़ों को चमगादड़ों के जीवाश्मों से मिली जानकारी के साथ जोड़ा गया। इससे वैज्ञानिकों ने चमगादड़ों का एक नया विकासवादी पेड़ तैयार किया।
इस नए पेड़ ने चमगादड़ों की कई प्रजातियों के आपसी रिश्तों को लेकर पुरानी धारणाओं को बदल दिया है। उदाहरण के लिए, मेडागास्कर के सकर-फुटेड चमगादड़ों को पहले दक्षिण अमेरिका और मध्य अमेरिका के कुछ चमगादड़ों के साथ जोड़ा जाता था। लेकिन नई स्टडी में उन्हें वेस्पर बैट वाले समूह के करीब रखा गया है। वेस्पर बैट दुनिया में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले चमगादड़ों में शामिल हैं। इसी समूह का संबंध सैक-विंग्ड चमगादड़ों से भी काफी करीब पाया गया, जबकि पहले इन्हें दूर का रिश्तेदार माना जाता था।
वैज्ञानिकों ने यह भी जानने की कोशिश की कि चमगादड़ों की शुरुआत दुनिया के किस हिस्से से हुई। अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका को संभावित जगह माना गया था, लेकिन जीनोम और जीवाश्मों से मिली जानकारी को मिलाने के बाद यूरोप सबसे मजबूत शुरुआती स्थान के रूप में सामने आया।
स्टडी का एक और अहम हिस्सा चमगादड़ों की इकोलोकेशन क्षमता से जुड़ा है। इकोलोकेशन में चमगादड़ आवाज की तरंगें छोड़ते हैं और उनके वापस आने से आसपास की चीजों का पता लगाते हैं। वैज्ञानिकों के बीच लंबे समय से यह सवाल रहा है कि चमगादड़ों में पहले उड़ने की क्षमता आई या इकोलोकेशन विकसित हुई।
नई स्टडी से संकेत मिलता है कि इकोलोकेशन चमगादड़ों की आज की अलग-अलग फैमिली बनने से पहले ही विकसित हो गई थी। हालांकि वैज्ञानिक अभी यह तय नहीं कर पाए हैं कि उड़ने की क्षमता पहले आई थी या इकोलोकेशन। शोधकर्ताओं के अनुसार, दोनों क्षमताएं चमगादड़ों के विकास के शुरुआती दौर में ही विकसित हुई हो सकती हैं।
यह अध्ययन Bat1K प्रोजेक्ट का पहला चरण है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य दुनिया में मौजूद सभी जीवित चमगादड़ प्रजातियों के जीनोम को समझना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि नया विकासवादी पेड़ आगे उन जीन की पहचान करने में मदद करेगा जो चमगादड़ों की उड़ान, इकोलोकेशन और बीमारियों से लड़ने की क्षमता के पीछे काम करते हैं।
दुनिया में चमगादड़ों की करीब 1,500 जीवित प्रजातियां हैं, जो सभी स्तनधारी प्रजातियों का पांचवें हिस्से से ज्यादा हैं। वे अंटार्कटिका को छोड़कर लगभग हर महाद्वीप पर पाए जाते हैं। नई स्टडी से उनकी पुरानी विकास कहानी को समझने में एक बड़ी कड़ी जुड़ी है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए अभी भी कई सवालों के जवाब तलाशना बाकी हैं।
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