मंडी, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के पश्चिमी हिमालय की तलहटी से वैज्ञानिकों को करीब 12 मिलियन साल पुराने जीवाश्म पत्ते पर एक नई प्रजाति के बेहद छोटे फंगस के अवशेष मिले हैं। यह खोज सिर्फ एक प्राचीन फंगस की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में भी मदद मिल रही है कि लाखों साल पहले हिमाचल का पर्यावरण और यहां के जंगल कैसे थे।
मंडी, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के पश्चिमी हिमालय की तलहटी से वैज्ञानिकों को करीब 12 मिलियन साल पुराने जीवाश्म पत्ते पर एक नई प्रजाति के बेहद छोटे फंगस के अवशेष मिले हैं। यह खोज सिर्फ एक प्राचीन फंगस की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में भी मदद मिल रही है कि लाखों साल पहले हिमाचल का पर्यावरण और यहां के जंगल कैसे थे।
यह खोज हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में हुई है। शोधकर्ताओं ने मिडिल शिवालिक (Middle Siwalik) की तलछटी चट्टानों में दबे जीवाश्म पत्तों का अध्ययन किया। इन पत्तों पर मौजूद फंगस इतना सूक्ष्म था कि उसे सामान्य आंखों से देखना लगभग संभव नहीं था।
खास तरीके से खोजा गया फंगस प्राचीन फंगस की इन बारीक संरचनाओं को देखने के लिए वैज्ञानिकों ने मेसरेशन (Maceration) नाम की रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में जीवाश्म को हल्के अम्लों की मदद से सावधानीपूर्वक साफ किया जाता है, ताकि पत्ते की पारदर्शी और मोम जैसी बाहरी परत को अलग किया जा सके।
इसके बाद जीवाश्म को शक्तिशाली प्रकाश माइक्रोस्कोप के नीचे देखा गया। माइक्रोस्कोप की मदद से पत्ते पर मौजूद फंगस की बेहद बारीक संरचनाएं दिखाई दीं। इन्हीं संरचनाओं के अध्ययन से वैज्ञानिकों ने इसे एक नई प्रजाति के रूप में पहचाना।
क्या है नई फंगस प्रजाति का नाम? शोधकर्ताओं ने इस नई प्रजाति का नाम Vizellopsidites miocenicus रखा है। इसके नाम में miocenicus शब्द लेट मियोसीन (Late Miocene) काल से जुड़ा है। यह वह भूवैज्ञानिक समय था, जो लगभग 8 से 12 मिलियन साल पहले का माना जाता है।
इसलिए यह फंगस उस समय के पर्यावरण की जानकारी देने वाला एक महत्वपूर्ण जीवाश्म प्रमाण बन गया है। पुराने फंगस से क्या अंतर था? नई प्रजाति पूरी तरह अनोखी नहीं थी। इसकी कुछ विशेषताएं पुराने और आज के पत्तों पर पाए जाने वाले फंगस से मिलती हैं। हालांकि, इसकी संरचना में कुछ ऐसे अंतर भी मिले, जिनके आधार पर इसे अलग प्रजाति माना गया।
वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना सबसे करीबी ज्ञात विलुप्त प्रजाति Vizellopsidites siwalika से की। V. miocenicus में अपेक्षाकृत बड़ी कोशिकाएं और ढीली, जाल जैसी शाखाओं वाली संरचना थी। वहीं V. siwalika ज्यादा घनी परतों में बढ़ता था और उसकी शाखाएं मुख्य रूप से सिरों से निकलती थीं।
नई प्रजाति में गोल आकार के खास फलनकारी शरीर (fruiting bodies) भी मिले। इन्हीं संरचनाओं से कभी बीजाणु निकलते थे। 12 मिलियन साल पहले हिमाचल कैसा था?
इस खोज का सबसे दिलचस्प हिस्सा प्राचीन हिमाचल के वातावरण से जुड़ा है। वैज्ञानिकों ने इस जीवाश्म फंगस की तुलना आज पाए जाने वाले ऐसे फंगस से की, जो बहुत गर्म और अत्यधिक नमी वाले उष्णकटिबंधीय इलाकों में पाए जाते हैं।
इस तुलना से पता चलता है कि लाखों साल पहले पश्चिमी हिमालय की तलहटी का यह इलाका आज के मुकाबले काफी अलग था। उस समय यहां गर्म और नमी से भरपूर उष्णकटिबंधीय जंगल मौजूद थे। यानी आज जिस हिमालयी क्षेत्र को हम ठंडे और पहाड़ी वातावरण के लिए जानते हैं, उसका अतीत काफी अलग था। एक छोटे से फंगस के जीवाश्म ने उस पुराने पर्यावरण की कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामने ला दिया है।
यह खोज वैज्ञानिकों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पौधों के जीवाश्म के साथ सुरक्षित मिला फंगस उस समय के जलवायु, वनस्पति और पर्यावरणीय परिस्थितियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकता है।
प्राचीन फंगस, हिमाचल का प्राचीन जंगल, 12 मिलियन साल पुराना जीवाश्म, जीवाश्म पत्ता, मंडी हिमाचल, प्राचीन हिमालय, मियोसीन काल, उष्णकटिबंधीय जंगल, फंगस जीवाश्म
Himachal me prachin fungus, 12 million saal purana fossil, Mandi fossil leaf, prachin Himalaya jungle, purane jungle ka rahasya, fossil fungus ki khoj
हिमाचल में 12 मिलियन साल पुराने जीवाश्म पत्ते पर मिला फंगस, मंडी में मिली प्राचीन फंगस की नई प्रजाति, Vizellopsidites miocenicus fungus fossil discovery, 12 million year old fossil leaf Himachal Pradesh, लाखों साल पहले हिमाचल का पर्यावरण कैसा था
Himachal Pradesh, Mandi, Ancient Fungus, Fossil, Fossil Leaf, Vizellopsidites miocenicus, Middle Siwalik, Late Miocene, Himalaya, Ancient Forest, Tropical Environment, Science News, NetGramNews, NetGram News
Disclaimer
Disclaimer :
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. अस्वीकरण: इस्तेमाल की गई तस्वीरें केवल जानकारी/उदाहरण के उद्देश्य से हैं और तस्वीरों में कुछ बदलाव या एडिटिंग AI की मदद से की गई है।
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.