झारखंड के गिरिडीह से प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें विवादित जमीन पर आवास की मंजूरी देने के मामले में नगर परिषद के पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तीन महीने के भीतर कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट देने को कहा है।
झारखंड के गिरिडीह से प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें विवादित जमीन पर आवास की मंजूरी देने के मामले में नगर परिषद के पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तीन महीने के भीतर कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट देने को कहा है।
मामला गिरिडीह नगर परिषद के वार्ड नंबर 16 के चिरैयाघाट इलाके का है। आरोप है कि यहां ऐसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों की मंजूरी दी गई, जिसका मामला पहले से अदालत में चल रहा था। लोकायुक्त के आदेश पर नगर विकास विभाग ने मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए गए।
सुमन, उर्मिला और शकुंतला को मिली थी आवास की मंजूरी जांच के अनुसार, राजीव कुमार मिश्रा पर सुमन देवी, उर्मिला देवी और शकुंतला देवी को नियमों के खिलाफ जाकर प्रधानमंत्री आवास योजना की मंजूरी देने का आरोप था। ये आवास गिरिडीह नगर परिषद के वार्ड नंबर 16 स्थित चिरैयाघाट में खाता नंबर 5 के प्लॉट नंबर 119 और खाता नंबर 36 के प्लॉट नंबर 135 से जुड़े हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नियमों में स्पष्ट है कि जिस जमीन पर कानूनी विवाद चल रहा हो, वहां योजना का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद विवादित जमीन पर आवास की मंजूरी दिए जाने का मामला सामने आया।
आवेदन पर पहले ही लिख दिया गया था- जमीन विवादित है मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि सुमन देवी और उर्मिला देवी के प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन पर नगर परिषद के कर्मचारी ने खुद टिप्पणी की थी कि संबंधित जमीन विवादित है और मामला अदालत में लंबित है। इसके बावजूद इस टिप्पणी को नजरअंदाज करते हुए आवेदकों के पक्ष में योजना की स्वीकृति दे दी गई।
वहीं, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार मिश्रा ने अपने स्पष्टीकरण में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताया था। हालांकि, लोकायुक्त के आदेश पर कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए और इसके बाद कार्रवाई की सिफारिश की गई।
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2017 में लोकायुक्त के पास पहुंचा था मामला यह मामला नया नहीं है। इसकी शिकायत 22 अगस्त 2017 को गिरिडीह के चिरैयाघाट रोड, बरमसिया निवासी अनिल चौहान ने लोकायुक्त कार्यालय में की थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि वह अपनी पुश्तैनी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं और उनके बगल में कुछ लोगों ने गली की जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनवा लिया।
शिकायत में यह भी कहा गया था कि जमीन को लेकर सिविल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और इसकी जानकारी तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी को भी दी गई थी। शिकायतकर्ता ने अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप भी लगाया था। हालांकि, यह रिश्वत संबंधी बात शिकायत में लगाए गए आरोप के रूप में सामने आई थी।
पक्का मकान और डेयरी फार्म होने का भी आरोप मामले में एक अन्य शिकायत सीता देवी और उनकी बहू शकुंतला देवी से जुड़ी थी। शिकायत के अनुसार, शकुंतला देवी के पास पहले से पक्का मकान और डेयरी फार्म था। आरोप है कि इन बातों की जानकारी छिपाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की मंजूरी ली गई।
अब लोकायुक्त की कार्रवाई की सिफारिश के बाद संबंधित विभाग से तीन महीने के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले ने प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रता, जमीन से जुड़े विवाद और सरकारी योजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
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