तेस्ता नदी में बहकर करीब 4 किमी दूर पहुंचे हाथी के बच्चे को पांच मछुआरों ने बचाया। वन विभाग की मदद से करीब दो घंटे की कोशिश के बाद बच्चे को उसकी मां और झुंड से मिला दिया गया।
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में तेज बहाव वाली तेस्ता नदी में बह रहे हाथी के एक छोटे बच्चे को पांच मछुआरों ने मिलकर बचा लिया। हाथियों का झुंड नदी पार कर रहा था, तभी तेज पानी के कारण हाथी का बच्चा अपने झुंड से अलग हो गया। वह करीब 4 किलोमीटर तक नदी में बहता चला गया। इसी दौरान मछुआरों की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने अपनी छोटी नाव से उसके पास पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
यह घटना सोमवार को तेस्ता नदी में हुई। बताया गया कि पांच हाथियों का एक झुंड गजोलडोबा तेस्ता बैराज के पास नदी के ऊपर की ओर जा रहा था। इसी दौरान नदी के तेज बहाव ने हाथी के बच्चे को झुंड से अलग कर दिया। कुछ समय बाद वह नदी में बहता हुआ पंजाब तटबंध के पास पहुंच गया।
पानी में फंसे हाथी के बच्चे पर पड़ी मछुआरों की नजर हाथी का बच्चा काफी देर तक तेज बहाव में बहता रहा। वह पानी में खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था। उसकी छोटी सूंड पानी के ऊपर दिखाई दे रही थी। नदी का बहाव तेज होने के कारण उसके लिए किनारे तक पहुंचना मुश्किल था।
उसी समय बाबलू दास, मिथुन दास, कादेर दास, बिस्वनाथ और गोपाल नाम के पांच मछुआरों ने उसे देखा। उन्होंने हालात को समझते हुए अपनी नाव को हाथी के बच्चे की तरफ मोड़ दिया।
नदी में पानी का बहाव तेज था, इसलिए बच्चे तक पहुंचना आसान नहीं था। इसके बावजूद मछुआरों ने नाव को आगे बढ़ाया और हाथी के पास पहुंच गए। इसके बाद तीन मछुआरे पानी में उतरे और हाथी के बच्चे को नाव में चढ़ाने में मदद की।
तीन मछुआरे नाव के साथ तैरते रहे हाथी के बच्चे को नाव में खींचने के बाद भी बचाव का काम खत्म नहीं हुआ था। तेज बहाव के कारण नाव को किनारे तक वापस लाना चुनौती भरा था। तीन मछुआरे नाव के साथ पानी में तैरते रहे और उसे आगे बढ़ाने में मदद करते रहे।
काफी कोशिश के बाद मछुआरे हाथी के बच्चे को सुरक्षित नदी किनारे लेकर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने उसे वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप दिया।
मछुआरों की इस कोशिश से हाथी के बच्चे की जान बच गई। अगर वह लंबे समय तक तेज बहाव में रहता तो उसके लिए सुरक्षित रहना मुश्किल हो सकता था।
वन विभाग ने हाथी के बच्चे का इलाज कराया नदी से बाहर निकालने के बाद हाथी के बच्चे को काठामबारी रेंज कार्यालय ले जाया गया। वहां उसे तुरंत पशु डॉक्टरों की देखभाल में रखा गया और जरूरी इलाज दिया गया।
इसके साथ ही वन विभाग की टीम ने बच्चे की मां और उसके झुंड की तलाश शुरू कर दी। अधिकारियों की कोशिश थी कि हाथी के बच्चे को जल्द से जल्द उसकी मां तक पहुंचाया जाए।
हाथी के बच्चे को बैराज के दूसरी तरफ तेस्ता नदी के एक सूखे हिस्से में ले जाया गया। माना जा रहा था कि नदी के तेज पानी से बचने के लिए हाथियों का झुंड इसी इलाके में रुका हुआ था।
करीब दो घंटे तक चला हाथी को मां से मिलाने का प्रयास हाथी के बच्चे को उसकी मां से मिलाने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय लोग और मछुआरे भी जुटे। करीब दो घंटे तक लगातार कोशिश की गई।
इस दौरान टीम ने हाथियों के झुंड को तलाशने और बच्चे को सुरक्षित तरीके से उसके पास पहुंचाने का काम किया। आखिरकार उनकी कोशिश सफल रही और हाथी का बच्चा अपनी मां तक पहुंच गया। बच्चे के पास पहुंचने के बाद उसकी मां ने उसे अपने साथ ले लिया। बाद में मां हाथी को बच्चे को दूध पिलाते हुए भी देखा गया। इससे यह साफ हुआ कि बचाव के बाद बच्चा अपनी मां के साथ सुरक्षित हो गया।
जल्दी मां तक पहुंचाना क्यों जरूरी था? वन विभाग के मुताबिक हाथी के बच्चों को ज्यादा देर तक इंसानों के संपर्क में रखने से परेशानी हो सकती है। कुछ मामलों में झुंड ऐसे बच्चों को वापस नहीं अपनाता, जो लंबे समय तक इंसानों के साथ रहे हों।
इसी वजह से वन विभाग ने बच्चे को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसे जल्द उसकी मां तक पहुंचाने की कोशिश की। इस मामले में स्थानीय लोगों और मछुआरों की मदद भी काफी काम आई।
बैकुंठपुर के डीएफओ मुदित ने मछुआरों की मदद की सराहना की। उन्होंने बताया कि सही समय पर की गई मदद से हाथी के बच्चे को उसकी मां से मिलाने में सफलता मिली।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला उत्तर बंगाल में इससे पहले भी हाथी के बच्चों के नदी में बहने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले साल अक्टूबर में बाढ़ के दौरान मेची नदी से हाथी के एक बच्चे को बचाया गया था।
हालांकि, उस मामले में बाद में हाथियों के झुंड ने उस बच्चे को स्वीकार नहीं किया था। इसी वजह से तेस्ता नदी में मिले हाथी के बच्चे को भी जल्दी से उसकी मां तक पहुंचाना जरूरी माना गया। इस बार वन विभाग, स्थानीय लोगों और मछुआरों ने मिलकर बच्चे को सुरक्षित उसकी मां तक पहुंचा दिया।
मछुआरों की मदद से बची हाथी के बच्चे की जान तेस्ता नदी में हाथी के बच्चे के बहने की घटना उस समय सामने आई जब नदी का पानी तेज था और बच्चा लगातार बहता जा रहा था। पांच मछुआरों ने उसे देखा और बिना देर किए अपनी नाव से उसके पास पहुंच गए।
बचाव के दौरान उन्हें तेज बहाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने बच्चे को नाव में चढ़ाया और उसे सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। बाद में वन विभाग ने इलाज और मां की तलाश का काम संभाला।
करीब दो घंटे की कोशिश के बाद हाथी का बच्चा अपनी मां से मिल गया। मां ने भी उसे अपने साथ रखा और उसे दूध पिलाया। इस तरह जलपाईगुड़ी की तेस्ता नदी में बहा हाथी का बच्चा समय पर मिली मदद के कारण सुरक्षित अपनी मां के पास लौट सका। इस पूरे बचाव में मछुआरों, वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर काम किया।
तेस्ता नदी, हाथी का बच्चा, हाथी का बच्चा रेस्क्यू, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल, मछुआरों ने बचाया हाथी, तेस्ता नदी खबर Teesta nadi, haathi ka bachcha, haathi rescue, Jalpaiguri khabar, West Bengal news, machhuaron ne bachaya haathi तेस्ता नदी में हाथी का बच्चा बहा, मछुआरों ने हाथी के बच्चे को बचाया, जलपाईगुड़ी में हाथी का रेस्क्यू, पश्चिम बंगाल तेस्ता नदी में हाथी का बच्चा तेस्ता नदी, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल, हाथी रेस्क्यू, वन विभाग, वन्यजीव खबर NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. इस लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें सिर्फ समझाने के लिए हैं। कुछ तस्वीरों को AI की मदद से एडिट किया गया है।
Published by: Ishrat. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.