केंद्र सरकार ने FCRA कानून में बदलाव को लेकर कहा है कि इसका मकसद किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, नए नियमों का मुख्य ध्यान विदेश से आने वाले पैसों और देश की सुरक्षा पर है। वहीं, विपक्ष और कुछ ईसाई संगठनों ने इस बदलाव को लेकर चिंता जताई है। इस बिल पर संसद की संयुक्त समिति चर्चा कर रही है और उसकी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में आने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने विदेशी चंदे से जुड़े FCRA कानून में बदलाव को लेकर अपनी बात रखी है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्तावित बदलाव किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं। सरकार के मुताबिक, इन बदलावों का मुख्य मकसद देश की सुरक्षा और विदेश से आने वाले पैसों पर नजर रखना है।
नई दिल्ली में शुक्रवार को गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने FCRA में बदलाव से जुड़े बिल पर संसद की संयुक्त समिति के सामने जानकारी दी। गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने सांसदों के सवालों के जवाब दिए। यह इस समिति की पहली बैठक थी, जिसमें बिल के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई। गृह मंत्रालय ने क्या कहा
गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कानून किसी संस्था के चंदा लेने या सामाजिक काम करने पर रोक लगाने के लिए नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, असली चिंता विदेश से आने वाले पैसों और उनके इस्तेमाल को लेकर है।
अधिकारियों ने समिति को बताया कि देश की सुरक्षा, अंदरूनी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण हैं। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव किसी खास धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं हैं।
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act के तहत भारत में विदेश से मिलने वाले पैसे पर नियम लागू होते हैं। सरकार का कहना है कि विदेशी पैसे का इस्तेमाल ऐसे कामों में नहीं होना चाहिए, जिनसे देश के हित या सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
विपक्ष और ईसाई संगठनों ने जताई चिंता FCRA में बदलाव को लेकर विपक्षी दलों और कुछ ईसाई संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि नए नियमों का असर खास तौर पर ईसाई संगठनों पर पड़ सकता है।
विपक्ष के कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि देश में FCRA लाइसेंस रखने वाले धार्मिक संगठनों में बड़ी संख्या ईसाई संगठनों की है और इसलिए नए बदलावों का असर उन पर ज्यादा पड़ सकता है।
DMK के सांसद पी. विल्सन ने भी बैठक में इस तरह की चिंता रखी। कुछ विपक्षी सांसदों ने कहा कि कई ऐसे संगठन दलितों और महिलाओं के लिए काम करते हैं और नए नियमों से उनके काम पर असर पड़ सकता है।
विपक्षी सांसदों ने प्रस्तावित बदलावों को लेकर कड़े सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि अगर कोई संस्था अपना FCRA लाइसेंस वापस कर देती है, तब भी उसकी संपत्ति जब्त किए जाने की बात चिंता की वजह है।
BJP सांसद ने विदेशी पैसे को लेकर सवाल उठाए बैठक में BJP सांसद निशिकांत दुबे ने विदेशी पैसे के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में पहले भी विदेशी पैसे का इस्तेमाल देश के हित से जुड़े मुद्दों पर असर डालने के लिए किए जाने की बात सामने आती रही है।
उन्होंने Ford Foundation का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि उसे दिल्ली के लोधी एस्टेट में जगह क्यों दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि FCRA कानून बनने से पहले अलग-अलग कानूनों के तहत विदेशी फंड से जुड़े 1,400 से ज्यादा NGO बंद किए गए थे।
बैठक में Rockefeller Foundation का भी जिक्र हुआ। हालांकि इन मुद्दों को लेकर सांसदों की राय अलग-अलग रही।
कुडनकुलम और सरदार सरोवर का भी जिक्र समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु संयंत्र और गुजरात के सरदार सरोवर बांध के खिलाफ हुए विरोध का भी जिक्र किया।
BJP से जुड़े लोगों का आरोप रहा है कि विदेशी पैसे पाने वाले कुछ NGO ने पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं की आड़ में इन बड़ी परियोजनाओं के खिलाफ लोगों को जुटाने की कोशिश की थी। हालांकि इस बारे में अलग-अलग पक्षों की राय अलग है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा FCRA संगठन गृह मंत्रालय की ओर से समिति को दिए आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा FCRA पंजीकरण वाले संगठन हैं। वहां ऐसे 2,102 संगठन हैं।
इसके बाद महाराष्ट्र में 1,578, कर्नाटक में 1,355 और दिल्ली में 1,218 संगठन FCRA के तहत पंजीकृत हैं।
विदेश से मिलने वाले पैसों की कुल रकम भी बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारत में 22,974 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा आया। 2015-16 में यह रकम 17,832 करोड़ रुपये थी।
2024-25 में मिले विदेशी चंदे का 57 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक कामों के लिए था। शिक्षा से जुड़े कामों के लिए करीब 30 प्रतिशत रकम मिली। धार्मिक कामों के लिए मिलने वाली रकम करीब 8 प्रतिशत थी।
धार्मिक कामों के लिए मिली रकम में 73 प्रतिशत ईसाई संगठनों को, 17.8 प्रतिशत हिंदू संगठनों को और एक प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा मुस्लिम संगठनों को मिला।
अमेरिका और ब्रिटेन भारत में विदेशी चंदा भेजने वाले बड़े देशों में रहे। 2024-25 में अमेरिका से करीब 12,113 करोड़ रुपये और ब्रिटेन से करीब 2,414 करोड़ रुपये आए।
बिल पर आगे क्या होगा FCRA में बदलाव वाला बिल संसद के बजट सत्र में पेश किया गया था। इसके बाद इसे जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया। बिल को लेकर विपक्षी दलों और कुछ ईसाई संगठनों ने विरोध जताया है।
समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा है कि समिति को उम्मीद है कि वह संसद के शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकेगी। फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच FCRA में बदलाव को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। सरकार इसे देश की सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और कुछ संगठनों को इसके असर को लेकर चिंता है। अंतिम फैसला संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
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