प्रशांत महासागर में स्थित Tonga का Home Reef एक ऐसा समुद्री ज्वालामुखी है, जो बार-बार अपना रूप बदलता रहा है। साल 1984 में इस ज्वालामुखी के फटने से आसमान में करीब 12 किलोमीटर ऊंचा धुआं और राख का गुबार उठा था। इस विस्फोट के बाद समुद्र के बीच एक नया ज्वालामुखीय द्वीप बन गया। इसके बाद से यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए लगातार अध्ययन का विषय बना हुआ है।
प्रशांत महासागर में स्थित Tonga का Home Reef एक ऐसा समुद्री ज्वालामुखी है, जो बार-बार अपना रूप बदलता रहा है। साल 1984 में इस ज्वालामुखी के फटने से आसमान में करीब 12 किलोमीटर ऊंचा धुआं और राख का गुबार उठा था। इस विस्फोट के बाद समुद्र के बीच एक नया ज्वालामुखीय द्वीप बन गया। इसके बाद से यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए लगातार अध्ययन का विषय बना हुआ है।
Home Reef की खास बात यह है कि यहां ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण द्वीप कई बार बने और फिर समुद्र में गायब होते रहे हैं। 19वीं सदी से ही इस समुद्री ज्वालामुखी ने कई बार नए भू-भाग बनाए हैं। समुद्र की लहरों और ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण इनका आकार समय के साथ बदलता रहा।
अब करीब 42 साल बाद Home Reef में फिर बदलाव देखा गया है। हाल की ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण यहां बना द्वीप लगातार फैल रहा है और इसके भू-भाग में करीब 20 एकड़ की बढ़ोतरी हुई है। यानी जिस जगह कभी समुद्र का पानी दिखाई देता था, वहां अब ज्वालामुखी से निकली सामग्री जमा होकर जमीन का नया हिस्सा बना रही है।
वैज्ञानिक इस बदलाव पर लगातार नजर रख रहे हैं। इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों की मदद ली जा रही है। इन तस्वीरों से ज्वालामुखीय द्वीप के आकार में हो रहे बदलाव, राख, लावा के फैलाव और समुद्र में उठने वाले पानी के गुबार को देखा जा सकता है। इससे विशेषज्ञों को यह समझने में मदद मिलती है कि ज्वालामुखी किस तरह समुद्र के बीच नई जमीन बना रहा है।
Home Reef का यह बदलाव केवल जमीन बनने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि ज्वालामुखीय गतिविधियों का आसपास के समुद्री जीवन और पक्षियों पर क्या असर पड़ सकता है। नया बना भू-भाग भविष्य में समुद्री जीवों और पक्षियों के लिए किस तरह का वातावरण तैयार करता है, इस पर भी नजर रखी जा रही है।
Home Reef इस बात का दिलचस्प उदाहरण है कि धरती की सतह आज भी लगातार बदल रही है। समुद्र के नीचे मौजूद ज्वालामुखी कुछ ही समय में नई जमीन बना सकते हैं, जबकि समुद्र की लहरें और प्राकृतिक गतिविधियां उसे दोबारा बदल भी सकती हैं। वैज्ञानिकों के लिए Home Reef इसी प्राकृतिक बदलाव को करीब से समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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