उत्तर-पश्चिमी हिमालय में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन रही है, लेकिन पानी और पोषक तत्वों के सही प्रबंधन की कमी इसकी पैदावार और गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के शोधकर्ताओं के तीन साल के अध्ययन में स्ट्रॉबेरी की बेहतर खेती के लिए कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन रही है, लेकिन पानी और पोषक तत्वों के सही प्रबंधन की कमी इसकी पैदावार और गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के शोधकर्ताओं के तीन साल के अध्ययन में स्ट्रॉबेरी की बेहतर खेती के लिए कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
स्ट्रॉबेरी की जड़ें उथली और नाजुक होती हैं। साथ ही, इसमें पानी की जरूरत भी अधिक होती है। इसलिए पानी की कमी या पोषक तत्वों का असंतुलन फसल को जल्दी प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सटीक सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और मिट्टी में नमी बनाए रखना स्ट्रॉबेरी की अच्छी पैदावार के लिए बेहद जरूरी है।
पॉलीथिन मल्च से 34.7% ज्यादा पैदावार अध्ययन में पॉलीथिन मल्च और पुआल मल्च की तुलना की गई। इसमें पॉलीथिन मल्च ने फूल आने और फल तैयार होने की प्रक्रिया को आगे किया और पुआल मल्च की तुलना में फल उत्पादन 34.7 प्रतिशत बढ़ाया। इसके अलावा पानी के इस्तेमाल की दक्षता यानी वाटर यूज एफिशिएंसी (WUE) 81.1 प्रतिशत, शुद्ध आय 47.4 प्रतिशत और लाभ-लागत अनुपात 43.6 प्रतिशत बेहतर रहा।
खाद देने का सही तरीका भी महत्वपूर्ण शोध में पाया गया कि कुल अनुशंसित NPK (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश) का 25 प्रतिशत हिस्सा बेसल खाद के रूप में और बाकी 75 प्रतिशत फर्टिगेशन के जरिए देने पर 100 प्रतिशत NPK को बेसल खाद के रूप में देने की तुलना में 19. 2 प्रतिशत अधिक पैदावार मिली। इस तरीके से WUE में 17.
9 प्रतिशत, शुद्ध आय में 21. 1 प्रतिशत और लाभ-लागत अनुपात में 18. 6 प्रतिशत सुधार हुआ। फर्टिगेशन में पानी के साथ घुलनशील खाद सीधे सिंचाई प्रणाली के जरिए पौधों तक पहुंचाई जाती है।
0.8 पैन इवैपोरेशन पर सिंचाई रही बेहतर सिंचाई के अलग-अलग स्तरों में 0.8 पैन इवैपोरेशन (PE) पर सिंचाई सबसे बेहतर रही। इससे 0.4 और 0.6 PE की तुलना में फल उत्पादन 43.2 प्रतिशत, WUE 41.3 प्रतिशत, शुद्ध आय 16.1 प्रतिशत और लाभ-लागत अनुपात 16.2 प्रतिशत अधिक रहा।
वहीं, 50 प्रतिशत जैविक और 50 प्रतिशत अकार्बनिक पोषक तत्वों के संयुक्त इस्तेमाल से फल का वजन, एस्कॉर्बिक एसिड और कुल घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS) जैसे गुणवत्ता मानकों में सुधार पाया गया।
खेती के लिए सीधा संदेश अध्ययन का निष्कर्ष साफ है—पानी, खाद और मिट्टी की नमी का सही तालमेल स्ट्रॉबेरी की खेती को ज्यादा उत्पादक और लाभकारी बना सकता है। यह जानकारी खास तौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी है जो हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।
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