आज जिन महाद्वीपों को हम अलग-अलग देखते हैं, कभी वे एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। अब वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि प्राचीन गोंडवाना (Gondwana) महाद्वीप का आकार पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा था। नई रिसर्च के मुताबिक गोंडवाना कभी धरती की कुल महाद्वीपीय परत के करीब 80 प्रतिशत हिस्से में फैला हो सकता था। शोधकर्ताओं ने इसके कई पुराने हिस्से आज के एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पहाड़ी इलाकों के नीचे दबे पाए हैं।
आज जिन महाद्वीपों को हम अलग-अलग देखते हैं, कभी वे एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। अब वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि प्राचीन गोंडवाना (Gondwana) महाद्वीप का आकार पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा था। नई रिसर्च के मुताबिक गोंडवाना कभी धरती की कुल महाद्वीपीय परत के करीब 80 प्रतिशत हिस्से में फैला हो सकता था। शोधकर्ताओं ने इसके कई पुराने हिस्से आज के एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पहाड़ी इलाकों के नीचे दबे पाए हैं।
इस खोज से यह पुरानी बहस भी खत्म होने की दिशा में है कि क्या गोंडवाना को वास्तव में एक सुपरकॉन्टिनेंट यानी विशाल महाद्वीप कहा जा सकता है। पहले वैज्ञानिकों के अनुसार गोंडवाना का मुख्य हिस्सा करीब 10 करोड़ वर्ग किलोमीटर का था, जो आज की महाद्वीपीय जमीन का लगभग 64 प्रतिशत बैठता था। सुपरकॉन्टिनेंट के लिए आम तौर पर करीब 75 प्रतिशत या उससे ज्यादा महाद्वीपीय परत का मानक इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए पुराने अनुमान के आधार पर गोंडवाना इस सीमा से छोटा माना जाता था।
नई रिसर्च में Curtin University के वैज्ञानिकों ने 25 हजार से ज्यादा आइसोटोप मापों का इस्तेमाल किया। इन आंकड़ों की मदद से उन्होंने आज की सतह के नीचे मौजूद बहुत पुरानी महाद्वीपीय परतों का पता लगाया। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लेट टेक्टोनिक्स की हलचल के कारण गोंडवाना के कई हिस्से अलग होकर दूसरे भूभागों से जुड़ गए और बाद में पहाड़ी क्षेत्रों के नीचे दब गए। इस वजह से उनका प्राचीन स्वरूप सतह पर दिखाई नहीं देता।
वैज्ञानिकों ने खास तौर पर समैरियम और नियोडिमियम आइसोटोप के आंकड़ों का अध्ययन किया। इन रासायनिक संकेतों से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किसी चट्टान के नीचे मौजूद पुरानी महाद्वीपीय परत कितनी पुरानी है। रिसर्च में मिले आंकड़ों से एशिया के बड़े हिस्से में प्राचीन गोंडवाना से जुड़े भूखंडों का पता चला। ये क्षेत्र दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन से लेकर तारिम और कजाकिस्तान, फिर ईरान, तुर्की और यूरोप तक फैले हुए पाए गए। उत्तरी अमेरिका के Appalachian Mountains में भी ऐसे पुराने अवशेष मिले हैं।
कजाकिस्तान में मिला एक प्राचीन महाद्वीपीय हिस्सा करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर का माना गया है। सभी नए मिले भूखंडों को मिलाने पर वैज्ञानिकों ने इनकी कुल मात्रा लगभग 2. 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर आंकी है। अलग-अलग आइसोटोप मानकों के आधार पर यह आंकड़ा करीब 2.
05 करोड़ से 2. 55 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक हो सकता है। पुराने गोंडवाना क्षेत्र को इसमें जोड़ने पर इसका आकार आज की महाद्वीपीय परत के करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। वैज्ञानिकों ने इस विस्तारित गोंडवाना को “Greater Gondwana” नाम दिया है।
इस खोज से गोंडवाना की कहानी सिर्फ जमीन के आकार तक सीमित नहीं रहती। वैज्ञानिकों ने करीब 525 मिलियन साल पहले गोंडवाना के चारों ओर एक विशाल ज्वालामुखीय और सबडक्शन सिस्टम होने का भी अनुमान लगाया है। यह प्रणाली करीब 31,700 किलोमीटर लंबी हो सकती थी, यानी पृथ्वी की परिधि के लगभग 79 प्रतिशत के बराबर। इसका फैलाव उन क्षेत्रों तक था, जो आज रूस, चीन, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के हिस्से हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस विशाल ज्वालामुखीय गतिविधि से कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प जैसी गैसें वातावरण में पहुंची होंगी। यह समय पृथ्वी के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण था। करीब 550 से 500 मिलियन साल पहले पृथ्वी की जलवायु में बड़े बदलाव हो रहे थे और इसी दौर में जीव-जंतुओं की विविधता भी तेजी से बढ़ी, जिसे Cambrian Explosion कहा जाता है। रिसर्च में गोंडवाना की ज्वालामुखीय गतिविधि को इस बदलाव से जोड़ने की संभावना बताई गई है, हालांकि वैज्ञानिक यह नहीं कहते कि केवल ज्वालामुखी ही Cambrian Explosion का कारण था।
इस खोज की सबसे खास बात यह है कि आज के विशाल पहाड़ों के नीचे छिपी चट्टानें धरती के बेहद पुराने इतिहास की कहानी बता रही हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर Greater Gondwana में वास्तव में धरती की करीब चार-पांचवीं महाद्वीपीय परत शामिल थी, तो इसका बनना और बाद में टूटना केवल किसी एक क्षेत्र की घटना नहीं, बल्कि पूरे ग्रह को प्रभावित करने वाली बड़ी भूगर्भीय घटना थी।
गोंडवाना महाद्वीप, प्राचीन सुपरकॉन्टिनेंट, Greater Gondwana, धरती का 80 प्रतिशत हिस्सा, प्राचीन महाद्वीपीय परत, पृथ्वी का इतिहास, ज्वालामुखीय गतिविधि, Cambrian Explosion
Gondwana mahadweep, prachin supercontinent, Greater Gondwana, dharti ka 80 pratishat hissa, prachin continental crust, dharti ka itihas, volcanic activity
प्राचीन गोंडवाना महाद्वीप कितना बड़ा था, धरती के 80 प्रतिशत हिस्से पर फैला था गोंडवाना, पहाड़ों के नीचे मिले प्राचीन महाद्वीप के अवशेष, Greater Gondwana क्या है, वैज्ञानिकों को गोंडवाना के नए हिस्से कहां मिले
Science, Earth Science, Gondwana, Supercontinent, Geology, Earth History, Astronomy, Research, Science News, Cambrian Explosion, Continental Crust, NetGramNews, NetGram News
Disclaimer
Disclaimer :
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI. अस्वीकरण: इस्तेमाल की गई तस्वीरें केवल जानकारी/उदाहरण के उद्देश्य से हैं और तस्वीरों में कुछ बदलाव या एडिटिंग AI की मदद से की गई है।
Published by: Zoya. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.