किडनी की पथरी यूरिनरी ट्रैक्ट में खनिजों और अपशिष्ट पदार्थों के जमा होकर क्रिस्टल बनने से विकसित होती है। पानी की कमी इसका प्रमुख जोखिम कारक है, जबकि खान-पान, मोटापा, कुछ बीमारियां और पारिवारिक इतिहास भी खतरा बढ़ा सकते हैं। किडनी स्टोन किसी भी उम्र में हो सकता है। छोटी पथरी कई बार अपने आप पेशाब के रास्ते निकल जाती है, लेकिन मूत्रनली में फंसने पर तेज दर्द और पेशाब संबंधी परेशानी हो सकती है।
किडनी की पथरी यूरिनरी ट्रैक्ट में खनिजों और अपशिष्ट पदार्थों के जमा होकर क्रिस्टल बनने से विकसित होती है। पानी की कमी इसका प्रमुख जोखिम कारक है, जबकि खान-पान, मोटापा, कुछ बीमारियां और पारिवारिक इतिहास भी खतरा बढ़ा सकते हैं।
किडनी स्टोन किसी भी उम्र में हो सकता है। छोटी पथरी कई बार अपने आप पेशाब के रास्ते निकल जाती है, लेकिन मूत्रनली में फंसने पर तेज दर्द और पेशाब संबंधी परेशानी हो सकती है।
किडनी की पथरी कैसे बनती है? जब पेशाब में पानी की मात्रा कम और अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो उसमें मौजूद खनिज क्रिस्टल बनाने लगते हैं। समय के साथ ये क्रिस्टल आपस में जुड़कर पथरी का रूप ले सकते हैं। डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी इसका प्रमुख जोखिम कारक है। गहरे पीले या नारंगी रंग का पेशाब कम पानी पीने का संकेत हो सकता है। पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से पथरी बनने का खतरा कम किया जा सकता है।
किडनी स्टोन के मामले पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक देखे जाते हैं। मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ते मामलों के साथ भी पथरी के मामलों में वृद्धि देखी गई है। जीवन में किसी समय 10 में से करीब एक व्यक्ति को किडनी स्टोन होने का जोखिम बताया गया है। एक बार पथरी होने के बाद 5 से 7 वर्षों में इसके दोबारा होने की संभावना 50 प्रतिशत तक हो सकती है।
किडनी स्टोन के चार प्रमुख प्रकार कैल्शियम स्टोन: यह सबसे आम प्रकार है। इनमें मुख्य रूप से कैल्शियम ऑक्सालेट या कैल्शियम फॉस्फेट शामिल होते हैं। यूरिक एसिड स्टोन: पेशाब में एसिड की मात्रा अधिक होने पर इस प्रकार की पथरी बन सकती है।
स्ट्रुवाइट स्टोन: इन्हें इंफेक्शन स्टोन भी कहा जाता है और इनका संबंध यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) से होता है। सिस्टीन स्टोन: यह दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति सिस्टिन्यूरिया से जुड़ी होती है, जिसमें पेशाब में सिस्टीन का रिसाव होने लगता है।
किन लोगों में ज्यादा खतरा? पानी कम पीना और ऐसा भोजन लेना जिसमें नमक, ऑक्सालेट या एनिमल प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो, जोखिम बढ़ा सकता है। मोटापा और परिवार में पहले किसी सदस्य को पथरी होना भी महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
इसके अलावा बार-बार दस्त की समस्या या आंतों से जुड़ी कुछ बीमारियां, पेट की सर्जरी और कुछ चिकित्सीय स्थितियां भी पथरी बनने की संभावना बढ़ा सकती हैं। इनमें हाइपरपैराथायरायडिज्म, डिस्टल रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस, सिस्टिन्यूरिया और प्राइमरी हाइपरॉक्सलुरिया शामिल हैं। कुछ दवाइयां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
तेज दर्द से लेकर पेशाब में खून तक, ये हैं लक्षण किडनी स्टोन का प्रमुख लक्षण पीठ या पसलियों के नीचे साइड में तेज और ऐंठन वाला दर्द है। इसके साथ बार-बार और अचानक पेशाब लगना, पेशाब करते समय जलन, गहरे रंग का पेशाब या पेशाब में खून दिखाई देना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
कुछ लोगों को जी मिचलाने और उल्टी की समस्या भी हो सकती है। यदि पथरी मूत्रनली में फंसकर पेशाब का बहाव रोकती है, तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है और चिकित्सकीय उपचार की जरूरत पड़ सकती है। पानी और संतुलित आहार से कम किया जा सकता है जोखिम किडनी स्टोन से बचाव में पर्याप्त पानी पीना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। सामान्य तौर पर प्रतिदिन करीब 2 से 2.5 लीटर पानी लेने की सलाह दी गई है।
आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल किए जा सकते हैं। नमक और मांसाहार का सेवन सीमित रखना चाहिए। कैल्शियम को पूरी तरह छोड़ने के बजाय संतुलित मात्रा में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना चाहिए।
बचाव के लिए रोजाना पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। प्रतिदिन करीब 2–2.5 लीटर पानी लें, जबकि सोडियम की मात्रा 2,300 मिलीग्राम से अधिक न हो। वयस्कों को रोजाना 1,000–1,200 मिलीग्राम कैल्शियम लेने की सलाह दी जाती है।
पथरी का इलाज आकार और प्रकार पर निर्भर: छोटी पथरी पर्याप्त पानी और दर्द नियंत्रित करने वाली दवाओं की मदद से अपने आप पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है। बड़ी पथरी या ऐसी पथरी जो पेशाब के बहाव में रुकावट पैदा कर रही हो, उसके लिए मेडिकल प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
शॉकवेव लिथोट्रिप्सी में शरीर के बाहर से तरंगों की मदद से पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। यूरेटेरोस्कोपी में पतली ट्यूब और लेजर की मदद से पथरी को निकाला या तोड़ा जाता है। बहुत बड़ी या गंभीर पथरी के मामलों में परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटोमी (PCNL) की जा सकती है। इसमें छोटे चीरे के जरिए पथरी को निकाला जाता है।
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