ब्रह्मांड का एक बड़ा रहस्य डार्क मैटर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर से बना है, लेकिन आज तक इसके अस्तित्व का सीधा प्रमाण नहीं मिला है। अब Brown University से जुड़े शोधकर्ताओं ने एक ऐसे सिग्नल का पता लगाया है, जो डार्क मैटर के किसी कण की मौजूदगी का संकेत दे सकता है। अगर आगे की जांच में यह बात साबित हो जाती है, तो यह डार्क मैटर की पहली सीधी पहचान की दिशा में बड़ी उपलब्धि होगी।
ब्रह्मांड का एक बड़ा रहस्य डार्क मैटर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर से बना है, लेकिन आज तक इसके अस्तित्व का सीधा प्रमाण नहीं मिला है। अब Brown University से जुड़े शोधकर्ताओं ने एक ऐसे सिग्नल का पता लगाया है, जो डार्क मैटर के किसी कण की मौजूदगी का संकेत दे सकता है। अगर आगे की जांच में यह बात साबित हो जाती है, तो यह डार्क मैटर की पहली सीधी पहचान की दिशा में बड़ी उपलब्धि होगी।
यह संकेत LUX-ZEPLIN यानी LZ प्रयोग से मिले 2023 और 2024 की शुरुआत के आंकड़ों में दिखाई दिया है। इस प्रयोग में Brown University के शोधकर्ताओं ने भी आंकड़ों का विश्लेषण किया है। हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि अभी इसे डार्क मैटर की खोज यानी “Discovery” नहीं कहा जा सकता, क्योंकि सिग्नल अभी उस वैज्ञानिक स्तर तक नहीं पहुंचा है, जिसे किसी नई खोज की आधिकारिक पुष्टि के लिए जरूरी माना जाता है।
आखिर डार्क मैटर की जरूरत क्यों महसूस हुई? LZ प्रयोग से जुड़े भौतिक विज्ञानी Richard Gaitskell के अनुसार हमारी Milky Way Galaxy में तारों और दिखाई देने वाले पदार्थ की मात्रा इतनी नहीं है कि उसके हिसाब से सूर्य की कक्षा और उसकी गति को पूरी तरह समझाया जा सके। यानी Galaxy में कुछ ऐसा मौजूद हो सकता है, जो दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका द्रव्यमान गुरुत्वाकर्षण के जरिए असर डाल रहा है। इसी अदृश्य पदार्थ को वैज्ञानिक डार्क मैटर के रूप में समझने की कोशिश कर रहे हैं।
LZ प्रयोग का मुख्य उद्देश्य इसी डार्क मैटर के सबूत तलाशना है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने जमीन के करीब एक मील नीचे एक खास डिटेक्टर लगाया है। यह डिटेक्टर तरल जेनॉन (Liquid Xenon) से भरा एक बड़ा कक्ष है और इसके चारों ओर पानी मौजूद है। वैज्ञानिक ऐसे काल्पनिक कणों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें WIMPs कहा जाता है और जिन्हें डार्क मैटर का संभावित कण माना जाता है।
जब कोई WIMP इस कक्ष में मौजूद तरल जेनॉन से टकराता है, तो जेनॉन से प्रकाश के कण यानी फोटॉन और इलेक्ट्रॉन निकल सकते हैं। डिटेक्टर में लगे प्रकाश सेंसर इन संकेतों को रिकॉर्ड करते हैं। वैज्ञानिक खास तौर पर न्यूक्लियर रीकॉइल (Nuclear Recoil) नाम की प्रक्रिया को देखते हैं, क्योंकि डार्क मैटर के संभावित कण से होने वाली ऐसी टक्कर उसके अस्तित्व का संकेत दे सकती है।
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सिग्नल मिला, लेकिन अभी पुष्टि बाकी शोधकर्ताओं के मुताबिक मिले सिग्नल में ऐसी विशेषताएं हैं, जो डार्क मैटर के कणों की मौजूदगी की ओर इशारा करती हैं। लेकिन यह भी संभव है कि यह सिग्नल किसी ऐसी सामान्य प्रक्रिया से आया हो, जिसका डार्क मैटर से कोई संबंध न हो। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी संभावना बहुत कम है, लेकिन यह पूरी तरह शून्य नहीं है।
इसी वजह से शोधकर्ता अब डिटेक्टर के काम करने के तरीके और मिले आंकड़ों की दोबारा बारीकी से जांच करेंगे। वे यह भी देखेंगे कि नए आंकड़ों में इसी तरह के और कितने संकेत मिलते हैं और क्या वे डार्क मैटर की उम्मीद के मुताबिक दिखाई देते हैं।
शोधकर्ताओं के लिए यह नतीजा बेहद उत्साहजनक है। हालांकि अभी डार्क मैटर की खोज की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ज्यादा डेटा और आगे की जांच से इस रहस्यमयी सिग्नल की असली वजह सामने आ सकती है। अगर यह सच में डार्क मैटर का संकेत साबित होता है, तो यह ब्रह्मांड को समझने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा।
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