Bundi District Hospital में 3 साल की बच्ची की जान WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए बचाई गई। बच्ची को Acute Epiglottitis के कारण सांस लेने में गंभीर दिक्कत थी और ऑक्सीजन लेवल 82% तक गिर गया था। अस्पताल में ENT specialist नहीं होने पर डॉक्टरों ने Kota Medical College के सीनियर डॉक्टर से वीडियो कॉल पर सलाह ली। उनकी गाइडेंस में Emergency Needle Cricothyrotomy की गई, जिससे बच्ची की हालत तुरंत सुधरी और ऑक्सीजन 94% तक पहुंच गई। समय पर लिए गए इस फैसले और tele-consultation से बच्ची की जान बच गई।
Rajasthan के Bundi जिला अस्पताल में देर रात एक WhatsApp video call के जरिए 3 साल की बच्ची की जान बचा ली गई। यह मामला Kota Division के Bundi District Hospital का है, जहां समय पर लिए गए 6 मिनट के फैसले ने बड़ा हादसा टाल दिया।
जानकारी के मुताबिक, रात करीब 1:25 बजे Mehak नाम की बच्ची को ICU में लाया गया। उसे सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो रही थी। ड्यूटी पर मौजूद junior pediatrician ने शुरुआती जांच के बाद Acute Epiglottitis की आशंका जताई। यह एक rare लेकिन जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें सांस की नली अचानक ब्लॉक हो सकती है।
उस समय अस्पताल में कोई ENT specialist उपलब्ध नहीं था। बच्ची की oxygen saturation गिरकर 82% तक पहुंच गई थी। Jaipur रेफर करने में करीब 2.5 घंटे लगते, जो हालत को और बिगाड़ सकता था। ऐसे में डॉक्टर ने तुरंत Kota Medical College के ENT consultant से WhatsApp video call पर संपर्क किया।
Live वीडियो में बच्ची की breathing pattern दिखाई गई, गर्दन की सूजन चेक करवाई गई और tongue depressor की मदद से airway की स्थिति दिखाई गई। Senior डॉक्टर ने remote guidance देते हुए Emergency Needle Cricothyrotomy करने की सलाह दी।
यह एक specialist procedure माना जाता है। रात 2:07 बजे वीडियो गाइडेंस में यह प्रक्रिया की गई। प्रक्रिया के कुछ ही सेकंड बाद बच्ची की हालत में सुधार दिखा। Heart rate stabilize होने लगा और oxygen saturation 82% से बढ़कर 94% हो गया।
बाद में बच्ची को Jaipur शिफ्ट किया गया, जहां तक वह stable रही। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के बाद अस्पताल ने रात के समय tele-consultation की SOP लागू कर दी है। वहीं Rajasthan Health Department ने remote emergency support model की समीक्षा शुरू कर दी है।
एक साधारण WhatsApp video call और कुछ मिनटों का साहसिक फैसला, एक मासूम की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हुआ।
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