NIA की चार्जशीट में रेड फोर्ट धमाके को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के मुताबिक, आरोपी उमर-उन-नबी ने पहले चांदनी चौक के लाल मंदिर के पास कार रोकने की कोशिश की थी, लेकिन भारी ट्रैफिक और पुलिस की मौजूदगी के कारण उसे वहां से जाना पड़ा। इसके बाद रेड फोर्ट के पास धमाका हुआ, जिसमें 11 लोगों की मौत और 29 लोग घायल हुए थे।
नई दिल्ली में रेड फोर्ट के पास हुए धमाके की जांच में एक अहम बात सामने आई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट के अनुसार, हमले के लिए पहले चांदनी चौक के लाल मंदिर इलाके को चुना गया था। आरोपी उमर-उन-नबी ने वहां कार खड़ी करने की कोशिश भी की थी, लेकिन भारी ट्रैफिक और पुलिस की मौजूदगी के कारण उसे अपना स्थान बदलना पड़ा। इसके बाद वह रेड फोर्ट की ओर गया, जहां कुछ ही मिनट बाद धमाका हुआ।
यह घटना 10 नवंबर 2025 को हुई थी। NIA ने मामले की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें धमाके से पहले और बाद की कई अहम जानकारियां दी गई हैं। इस घटना में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 29 लोग घायल हुए थे। आसपास की इमारतों और दूसरी सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा था।
लाल मंदिर के पास पहुंचा था आरोपी NIA की जांच के अनुसार, उमर-उन-नबी ने धमाके से करीब 13 मिनट पहले चांदनी चौक के लाल मंदिर के पास कार रोकने की कोशिश की थी। CCTV फुटेज में उसे शाम करीब 6:37 बजे वहां कार खड़ी करने की कोशिश करते देखा गया।
उस समय लाल मंदिर के आसपास काफी ट्रैफिक था और पुलिस की मौजूदगी भी थी। इस वजह से वह वहां रुक नहीं सका। इसके बाद उसने कार वापस मोड़ी और रेड फोर्ट की तरफ चला गया। शाम करीब 6:50 बजे रेड फोर्ट के गेट नंबर 4 के पास धमाका हुआ।
जांच एजेंसी ने चार्जशीट में इस पूरी गतिविधि का जिक्र किया है। CCTV फुटेज को मामले की जांच में एक अहम सबूत माना गया है। इससे पुलिस और जांच एजेंसी को धमाके से पहले आरोपी की गतिविधियों को समझने में मदद मिली।
धमाके में 11 लोगों की मौत रेड फोर्ट के पास हुए इस धमाके में 11 लोगों की जान गई थी। 29 लोग घायल हुए थे। अस्पताल की रिपोर्ट में मौत की वजह तेज धमाके से लगी चोटों को बताया गया।
धमाके का असर आसपास के इलाके में भी हुआ। कई नजदीकी ढांचों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के आकलन के मुताबिक, संपत्ति को हुए नुकसान की कीमत करीब 17.7 लाख रुपये थी। इस नुकसान का आकलन DMRC, ASI और PWD जैसी एजेंसियों की ओर से किया गया था।
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले की जांच शुरू की। जांच में कार, CCTV फुटेज और दूसरी जगहों से मिले सबूतों को देखा गया।
कार और दूसरे सामान से मिले सबूत NIA के अनुसार, जिस कार में धमाका हुआ था, उसकी भी जांच की गई। कार से मिले एक जैविक नमूने की जांच की गई, जिसे आरोपी के माता-पिता के DNA से मिलाया गया। इससे जांच एजेंसी ने आरोपी की पहचान की पुष्टि की।
जांच के दौरान आरोपी से जुड़े दूसरे लोगों और अलग-अलग जगहों से मिले सामान की भी जांच की गई। एजेंसी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के नोवगाम में हुई एक घटना से जुड़े जब्त सामान की जांच में भी कुछ समान पदार्थ पाए गए। NIA के अनुसार, इससे मामले में शामिल समूह के बारे में जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
चार्जशीट में कई दूसरे सबूतों का भी जिक्र है। जांच एजेंसी ने डिजिटल सामान और अन्य चीजों को भी जांच का हिस्सा बनाया। इन सबूतों के आधार पर एजेंसी ने हमले की तैयारी और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियों को जोड़ने की कोशिश की।
घटना से पहले पुलिस की कार्रवाई की जानकारी चार्जशीट में उमर-उन-नबी की घटना से पहले की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। NIA के अनुसार, 30 अक्टूबर को उसने एक परिचित से मुलाकात की थी। उसने उस व्यक्ति को अपने कमरे की चाबी दी और कमरे से अपने जूते लाने को कहा था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, उस समय तक जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उससे जुड़े समूह के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। चार्जशीट में बताया गया है कि इसके बाद आरोपी परेशान था और फरार रहने की कोशिश कर रहा था।
कुछ समय तक वह नूंह के एक घर में भी रुका था। घर की महिला ने उसके कमरे से बदबू आने की बात कही थी। जांच में इस अवधि को भी आरोपी की गतिविधियों से जोड़कर देखा गया।
नूंह से खरीदे थे नए कपड़े NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि 7 नवंबर को उमर-उन-नबी ने नूंह की एक दुकान से नए कपड़े खरीदे थे। उसने एक टी-शर्ट, लाल-बैंगनी रंग की शर्ट और हरे रंग की कार्गो पैंट खरीदी थी। इन कपड़ों का भुगतान नकद किया गया था।
जांच एजेंसी ने आरोपी की इन गतिविधियों को भी मामले की जांच में शामिल किया है। एजेंसी का कहना है कि घटना से पहले उसकी आवाजाही और अलग-अलग जगहों पर मौजूदगी को समझने के लिए इन जानकारियों की जांच की गई।
जांच में डिजिटल सामान भी शामिल मामले की जांच के दौरान NIA को कुछ डिजिटल सामग्री भी मिली। चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपियों के पेन ड्राइव से कुछ सामग्री बरामद हुई थी। एजेंसी ने एक ऐसी किताब का भी जिक्र किया है, जिसे उसने आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बताया है।
NIA के अनुसार, यह सामग्री उस समूह की सोच और उसकी गतिविधियों को समझने में जांच का हिस्सा बनी। एजेंसी ने यह भी कहा है कि जांच में आरोपियों के संपर्क और उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को देखा गया।
मामले की जांच के दौरान अलग-अलग जगहों से मिले सबूतों को आपस में जोड़ने की कोशिश की गई। इसके लिए CCTV फुटेज, कार से मिले सामान, डिजिटल सामग्री और दूसरे दस्तावेजों की जांच की गई।
रेड फोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला पूरे मामले में लाल मंदिर से रेड फोर्ट तक आरोपी की गतिविधि जांच का एक अहम हिस्सा बनी है। NIA के मुताबिक, आरोपी पहले लाल मंदिर के पास पहुंचा था, लेकिन वहां रुकने की स्थिति नहीं बनी। इसके बाद उसने रेड फोर्ट की ओर जाने का फैसला किया।
CCTV फुटेज के अनुसार, लाल मंदिर के पास पहुंचने और रेड फोर्ट के पास धमाका होने के बीच करीब 13 मिनट का अंतर था। इस वजह से जांच एजेंसी ने इस हिस्से को अपनी चार्जशीट में खास तौर पर शामिल किया है।
धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों की जांच तेज की। अलग-अलग जगहों से मिले सबूतों को भी जांच में शामिल किया गया।
अब आगे क्या होगा NIA की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। चार्जशीट में जांच एजेंसी ने धमाके की तैयारी, आरोपी की गतिविधियों और मामले से जुड़े सबूतों का विवरण दिया है।
फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई अदालत में होगी। जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए सबूत और चार्जशीट में दी गई जानकारी अब कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। रेड फोर्ट धमाके में मारे गए 11 लोगों और घायल हुए 29 लोगों से जुड़ा मामला गंभीर जांच के दायरे में है।
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