NEET-UG पेपर लीक के विरोध से जुड़े छात्र अक्षत त्रिपाठी को यूपी के एक मजिस्ट्रेट ने नोटिस भेजा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ जबरदस्ती की कार्रवाई पर पहले ही रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने नोटिस जारी करने को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगने की बात कही है।
NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक छात्र को नोटिस भेजने पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मजिस्ट्रेट पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि छात्रों के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं करने का साफ आदेश दिया गया था। नई दिल्ली में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को भेजे गए नोटिस को लेकर नाराजगी जताई। यह नोटिस ग्रेटर नोएडा कमिश्नरेट के कार्यकारी मजिस्ट्रेट, तृतीय की ओर से जारी किया गया था। छात्र का नाम NEET-UG विरोध प्रदर्शन के मामले में सामने आया था।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पूछा कि जब कोर्ट पहले ही छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस कैसे जारी किया। मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा, “मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकता है? हमने साफ कहा था कि किसी भी छात्र के खिलाफ जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं होगी।”
छात्र को किस मामले में नोटिस मिला? अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस में उनसे 5 लाख रुपये का निजी बॉन्ड देने को लेकर जवाब मांगा गया था। नोटिस में छात्र पर सरकार के खिलाफ प्रचार फैलाने और विश्वविद्यालय के छात्रों को जंतर-मंतर पर हुए NEET-UG विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था।
नोटिस जारी होने के कुछ समय बाद इसे वापस ले लिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले को वरिष्ठ वकील बिस्वजीत भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट के सामने मौखिक रूप से उठाया। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के बराबर है। वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि छात्र को दिया गया नोटिस उस रोक के खिलाफ है, जिसमें छात्रों पर कोई जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी।
NEET-UG प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट का आदेश NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शन का एक प्रमुख स्थान दिल्ली का जंतर-मंतर भी रहा। 1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था। इन मामलों में शामिल लोगों में बड़ी संख्या छात्रों की थी।
कोर्ट के इसी आदेश के बाद छात्रों के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर भी स्थिति साफ मानी जा रही थी। इसी वजह से गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र को जारी नोटिस पर कोर्ट ने सवाल उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं करने की बात पहले ही साफ कर दी थी। इसके बावजूद एक छात्र को नोटिस जारी होने पर कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कोर्ट इस मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेगा। यानी नोटिस किस आधार पर जारी किया गया और सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद ऐसी कार्रवाई क्यों हुई, इस बारे में जानकारी ली जाएगी।
मामले में छात्र अक्षत त्रिपाठी पर लगाए गए आरोप नोटिस का हिस्सा थे। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों को लेकर छात्र की ओर से कोई अलग जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने की कार्रवाई पर जवाब लेने की बात कही है। नोटिस वापस लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब कोर्ट यह देखेगा कि उसके पहले के आदेश के बावजूद छात्र को नोटिस भेजने की जरूरत क्यों पड़ी।
NEET-UG प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद शुरू हुए छात्र विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट का रुख पहले भी सामने आ चुका है। 1 सितंबर को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के बाद 9 सितंबर को एक छात्र को जारी नोटिस का मामला अदालत के सामने आया। फिलहाल, कोर्ट की ओर से इस कार्रवाई पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही गई है। मामले में आगे की स्थिति इसी जवाब और सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई से साफ होगी।
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